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Supreme Court Decision on SIR West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य में चल रहे वोटर लिस्ट स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने एसआईआर के लिए पर्याप्त संख्या में ‘ए’ ग्रेड के ऑफिसर उपलब्ध नहीं कराने पर बंगाल प्रशासन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को आदेश दिया कि वे एसआईआर के लिए लीगल ऑफिसर्स की तैनाती करें. साथ ही रिटायर्ड जजों की भी तलाश करें. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अखिल हिंदुस्तानीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने अपनी बड़ी जीत बतायी है. तृणमूल कांग्रेस ने क्या बयान दिया है, यह भी आपको बतायेंगे, लेकिन उससे पहले जान लें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या-क्या कहा है.
सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर को इन 6 प्वाइंट्स में समझें
- लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट में शामिल लोगों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए लीगल ऑफिसर नियुक्त करने के आदेश
- सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट से कहा- मुख्य सचिव, डीजीपी और निर्वाचन आयोग के अधिकारियों समेत सभी स्टेकहोल्डर्स की बैठक बुलायें.
- सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिश करने की अनुमति दी. सप्लीमेंट्री लिस्ट बाद में भी जारी की जा सकती है.
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेवारत और पूर्व न्यायिक अधिकारी तार्किक विसंगति सूची में शामिल लोगों के दावों और आपत्तियों पर फैसला करेंगे.
- वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवजीन के लिए ‘ए’ ग्रेड अफसर उपलब्ध नहीं कराने पर सुप्रीम कोर्ट बंगाल प्रशासन से नाराज
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कलकत्ता हाईकोर्ट के जज बंगाल में एसआईआर में मदद के लिए लीगल ऑफिसर्स उपलब्ध करायें और पूर्व जजों की तलाश करें
वोटर लिस्ट पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वोटर लिस्ट का प्रकाशन नहीं रुकेगा. कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह 28 फरवरी 2026 को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी कर सकता है. कहा कि इसके बाद सप्लीमेंट्री लिस्ट भी जारी कर सकते हैं. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विवादों से घिरी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग की सहायता के लिए वर्किंग और रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जजों की तैनाती का शुक्रवार को निर्देश दिया.
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लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के मामले निबटायेंगे लीगल ऑफिसर
निर्वाचन आयोग और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली प्रशासन के बीच ‘दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप’ पर खेद जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नये निर्देश जारी किये. पीठ ने तार्किक विसंगति सूची (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट) में शामिल व्यक्तियों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का आदेश दिया.
बंगाल प्रशासन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से पश्चिम बंगाल में एसआईआर के काम में सहायता के लिए न्यायिक अधिकारियों को मुक्त करने और पूर्व जजों को खोजने के लिये कहा. पीठ ने पश्चिम बंगाल प्रशासन द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए ‘ए’ श्रेणी के पर्याप्त अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराने पर कड़ा रुख अपनाया.
28 फरवरी को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करने की कोर्ट ने दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को 28 फरवरी तक राज्य में मतदाताओं की मसौदा सूची प्रकाशित करने की अनुमति दे दी. साथ ही निर्वाचन आयोग को बाद में पूरक सूचियां (सप्लीमेंट्री लिस्ट्स) जारी करने की भी अनुमति दी.
एसआईआर के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट तैनात करेगा लीगल ऑफिसर्स
पीठ ने पश्चिम बंगाल के जिलाधिकारियों और एसपी को निर्देश दिया कि वे जारी एसआईआर कवायद के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों को सहायता और सुरक्षा प्रदान करें. साथ ही यह स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों को न्यायालय के आदेश के समान माना जायेगा. कोर्ट ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों को ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ और राज्य प्रशासन के अधिकारियों द्वारा सहायता प्रदान की जायेगी.
Supreme Court Decision: लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को राज्य की मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी समेत सभी हितधारकों की शनिवार तक बैठक आयोजित करने का निर्देश भी दिया. वर्ष 2002 की मतदाता सूची से संतानों के संबंध में तार्किक विसंगतियों में माता-पिता के नाम का मेल न होना और मतदाता तथा उनके माता-पिता की आयु में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर होना शामिल है.
तृणमूल कांग्रेस ने फैसले को बताया बंगाल की बड़ी जीत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल के लोगों की बड़ी जीत बताया है. पार्टी ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है कि आज का दिन ऐतिहासिक विध्वंस का प्रतीक है. इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया का अहंकार चूर-चूर हो गया. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने एक बार एक अछूत अधिपति की तरह इधर-उधर घूमते हुए आश्वस्त किया कि उसका शब्द अंतिम था. वह भ्रम टूटकर विस्मृत हो गया है.
HUGE VICTORY FOR THE PEOPLE OF BENGAL!
Today marks a historic demolition of @ECISVEEP‘s bloated arrogance. The CEC once strutted around like an untouchable overlord, convinced his word was final. That delusion has been shattered into oblivion.
Roll observers had been… pic.twitter.com/vRjT2vBHHq
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) February 20, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने दिया नॉकआउट पंच – तृणमूल कांग्रेस
तृणमूल कांग्रेस ने आगे लिखा है कि रोल पर्यवेक्षक अपने नेतृत्वक आकाओं के लिए स्पोर्ट्स में हेरा-फेरी करने के लिए वैध मतदाताओं को मिटाने की साजिश रचते हुए, वैध दावों पर रोक लगा रहे थे और रोक रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने अभी-अभी नॉकआउट पंच दिया है. सभी दावे, आपत्तियां और तार्किक विसंगति के मामले अब कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा नियुक्त निष्पक्ष न्यायिक अधिकारियों द्वारा संभाले जायेंगे.
टीएमसी ने फैसले को बताया चुनाव आयोग के लिए झटका
यह चुनाव आयोग के लिए एक झटका है. जिस चुनाव आयोग ने अपने पवित्र संवैधानिक कर्तव्य को त्याग दिया और भाजपा के निहित स्वार्थों को पूरा करने वाले एक पक्षपातपूर्ण हिट दस्ते में बदल गया. वास्तव में उन्हें मुंह की खानी पड़ी है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें याद दिलाया है कि लोगों की संप्रभु शक्ति सत्ता में बैठे लोगों की छोटी महत्वाकांक्षाओं को कुचल देती है.
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