Hot News

अगर ईरान में सत्ता बदली और रजा पहलवी लौटे, तो भारत के साथ कैसा रिश्ता रहेगा? प्रिंस ने दिया जवाब

ईरान में विरोध प्रदर्शन लगभग 20 दिन से हो रहे हैं. 28 दिसंबर को गिरती मुद्रा की वजह से तेहरान के बाजारों में व्यापारियों ने नारेबाजी शुरू की. हालांकि, यह आक्रोश थोड़े समय का था, एक दो दिन में ही थम गया. लेकिन इसके बाद देश भर में आग लग गई. महंगाई और आर्थिक कारणों से ईरान के भीतरी इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनी भवनों में आग लगानी शुरू कर दी. मस्जिदों को खाक कर दिया और खामेनेई शासन के खिलाफ नारेबाजी भी होने लगी. नतीजा- हमेशा की तरह, क्रूर शासन ने दमन किया. अब तक की रिपोर्ट के मुताबिक हजारों लोग मारे गए हैं, जिसकी संख्या 2000-12,000 बताई जा रही है. गिरफ्तार नागरिकों की संख्या भी 19,000 के पार ही है. इस आंदोलन में देश के बाहर बैठे रजा पहलवी भी सक्रिय रहे. उनकी वापसी के बड़े चर्चे हुए. लेकिन हिंदुस्तान इसे लेकर सशंकित ही रहा. अब उन्होंने इस मुद्दे पर खुद टिप्पणी की है. 

ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने शुक्रवार को कहा कि एक लोकतांत्रिक ईरान हिंदुस्तान के साथ निकट और सहयोगात्मक संबंध बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा. एक समाचार सम्मेलन में बोलते हुए पहलवी ने कहा,“एक लोकतांत्रिक ईरान उन सभी देशों के साथ बेहतर संभव संबंध स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध (कमिटेड) होगा, जो संप्रभुता और स्वतंत्रता जैसे समान मूल्यों का पालन करते हैं. हम ऐसे देशों के साथ कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं और साझेदारी कर सकते हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक इतिहास में ईरान और हिंदुस्तान के बीच अच्छे रिश्ते रहे हैं. उन्होंने उस समय को याद किया जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ईरान की यात्रा की थी. उन्होंने कहा कि उस समय वह बहुत छोटे थे, इसलिए यह रिश्ता काफी पुराना है. हिंदुस्तान की सभ्यतागत विरासत की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने समृद्ध संस्कृति और समृद्ध इतिहास पर गर्व कर सकते हैं. उनके मुताबिक यह एक मजबूत संबंध और सहयोग का स्वाभाविक रास्ता बन सकता है.

पहलवी ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए गहरे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है और इस दिशा में हिंदुस्तान की भूमिका अहम होगी. उन्होंने कहा कि हमारी धरती के सामने कई चुनौतियाँ हैं, ऊर्जा से जुड़ी समस्याएँ हैं, जनसंख्या से संबंधित मुद्दे हैं, ऊर्जा की कमी है और जल संकट भी मौजूद है. उन्होंने हिंदुस्तान की क्षमताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि तकनीक और विशेषज्ञता के क्षेत्र में हिंदुस्तान एक अग्रणी देश है.

उन्होंने कहा कि सहयोग का दायरा नई और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के साथ ही अन्य उभरते क्षेत्रों तक बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने दोनों देशों के विशेषज्ञों, उद्यमियों और कारोबारी समुदायों के बीच अधिक निकट सहयोग की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि अन्य सभी लोग अपने हिंदुस्तानीय समकक्षों के साथ बहुत नजदीकी से काम करें. उन्होंने आगे कहा कि उम्मीद है कि जब हम स्वतंत्र होंगे, तब हम पूरी तरह से एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकेंगे.”

कौन हैं रजा पहलवी?

रजा पहलवी, ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे हैं. उन्हें 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान सत्ता से हटा दिया गया था. राजशाही के पतन के बाद से ही रजा पहलवी निर्वासन में रह रहे हैं. वे लगातार ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को समर्थन देने और उन्हें जारी रखने की अपील करने वाली एक प्रमुख आवाज रहे हैं.

हिंदुस्तान और ईरान के संबंध सैकड़ों साल पुराने

ईरान और हिंदुस्तान के बीच सैकड़ों साल पुराने सांस्कृतिक संबंध रहे हैं. इनमें भाषा, लिटरेचर और ट्रेड शामिल रहे हैं. 20वीं सदी के अधिकांश समय तक दोनों देशों के बीच घनिष्ठ रिश्ते बने रहे. हालांकि, 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद इन संबंधों का स्वरूप बदला. हाल के वर्षों में क्षेत्रीय नेतृत्व, प्रतिबंधों और ऊर्जा से जुड़े कारकों ने इन्हें प्रभावित किया है.

ईरान पर पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका का कड़ा रुख

ईरान में पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से व्यापक प्रशासन विरोधी प्रदर्शन नेतृत्वक बदलाव और देश की धार्मिक शासकीय व्यवस्था के अंत की मांग में बदल गए हैं. इस पर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है. उसकी तैयारियों को देखकर लगा कि उसने पहले ईरान पर सीधा हमला करने की नीति बनाई थी. हालांकि अब हमला करने की बजाय अमेरिका ने आर्थिक दबाव का कसाव और मजबूत करना शुरू किया है. इसी हफ्ते डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसे अमेरिका के साथ ट्रेड करने पर 25% का टैरिफ देना पड़ेगा. 

हिंदुस्तान ने चाबहार पोर्ट से हुआ बाहर

ऐसे में इसका असर हिंदुस्तान पर भी पड़ा रहा है. हिंदुस्तान चाबहार पोर्ट को लंबे समय से विकसित कर रहा था. इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) को इस बंदरगाह के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को चलाने का अधिकार मिला था. इसका उपयोग हिंदुस्तान अपनी पहुंच अफगानिस्तान तक बढ़ाने के लिए करता था. लेकिन शुक्रवार की इकॉनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुस्तान ने अब इससे बाहर निकलने का फैसला किया है. हिंदुस्तान ने 120 मिलियन डॉलर चुका दिए हैं और वह अप्रैल 2026 तक इससे पूरी तरह बाहर हो जाएगा. IPGL के प्रशासनी डायरेक्टरों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है. इसकी वेबसाइट भी बंद कर दी गई है. 

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

हालांकि, शनिवार को हिंदुस्तानीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर टिप्पणी की. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि 28 अप्रैल 2025 को अमेरिकी वित्त विभाग ने एक लेटर जारी किया था. इसमें हिंदुस्तान को चाबहार पोर्ट से 26 अप्रैल 2026 तक के लिए वैलिड शर्तों के साथ प्रतिबंध में छूट के दिशा निर्देश दिए गए थे. जायसवाल ने आगे कहा कि हिंदुस्तान इस मामले में अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान का ईरान के साथ लंबे समय से संबंध है. हम इन घटनाक्रमों पर नजर बनाए हैं. वहीं हिंदुस्तान ने अपने नागरिकों को ईरान से बाहर निकालने का काम भी शुरू कर दिया है. दूतावास ने इसके तहत एडवाइजरी जारी की थी. शुक्रवार देर रात कई हिंदुस्तानीय नागरिक दिल्ली एयरपोर्ट उतरे. 

ये भी पढ़ें:-

‘हिंदुओं को वोट देना जायज नहीं’, ‘मंदिर-मूर्तियां तोड़ने के लिए’; बांग्लादेश चुनाव प्रचार के बीच कट्टरपंथियों के भड़काऊ बयान

ग्रीनलैंड पर विवाद खड़ा कर ट्रंप जाएंगे स्विट्जरलैंड, किस कार्यक्रम में होंगे शामिल?

दक्षिणी अफ्रीकी देशों में बारिश-बाढ़ से भारी तबाही, 100 से ज्यादा लोगों की मौत, हजारों घर हुए तबाह

The post अगर ईरान में सत्ता बदली और रजा पहलवी लौटे, तो हिंदुस्तान के साथ कैसा रिश्ता रहेगा? प्रिंस ने दिया जवाब appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top