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गया जी में जहरीली गैस से पिता-पुत्र समेत चार की मौत, कुएं में मोटर ठीक करने उतरे थे, बचाने पहुंचा फायर ब्रिगेड कर्मी भी बेहोश

Gaya News : गया जी में कुएं में जहरीली गैस के कारण दम घुटने से चार लोगों की मौत हो गयी है. बताया जा रहा है कि चारों लोग 30 फीट गहरे कुएं में मोटर ठीक करने के लिए उतरे थे. इसी दौरान कुएं के अंदर जहरीली गैस की चपेट में आने से उनका दम घुट गया. घटना डोभी प्रखंड के गढ़ करमौनी गांव की है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुएं के अंदर जहरीली गैस जमा होने के कारण यह हादसा हुआ. मोटर ठीक करने के दौरान चारों ग्रामीण इसकी चपेट में आ गये. प्रशासन की ओर से घटना की विस्तृत जानकारी जुटायी जा रही है. घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीण डीएसपी शेरघाटी ने बताया हादसे का घटनाक्रम डीएसपी शेरघाटी ने बताया कि कुएं की गहराई करीब 30 फीट है. कुएं में मोटर से संबंधित काम करने के लिए लोग नीचे उतरे थे. इसी दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से हादसा हुआ. घटना की सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में जुट गयी. View on Instagram डीएसपी ने बताया कि कुएं के अंदर ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होने की वजह से बचाव अभियान में भी सावधानी बरतनी पड़ी. शुरुआती जानकारी के अनुसार, दो लोगों को बाहर निकाला गया है, जबकि अन्य लोगों को निकालने के लिए राहत और बचाव कार्य जारी रहा. डीएसपी शेरघाटी आपदा राहत कोष से मिलेगा चार-चार लाख का मुआवजा डोभी बीडीओ ने बताया कि जीआरपी की टीम मौके पर पहुंच गयी है. हादसे में जान गंवाने वाले चारों लोगों के परिजनों को आपदा राहत कोष के माध्यम से प्रति व्यक्ति चार लाख रुपये की सहायता राशि दी जायेगी. उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है, ताकि मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध करायी जा सके. गया जी: टिकारी में दिनदहाड़े किसान की धारदार हथियार से हत्या, आरोपी गिरफ्तार, परिवार में मचा कोहराम The post गया जी में जहरीली गैस से पिता-पुत्र समेत चार की मौत, कुएं में मोटर ठीक करने उतरे थे, बचाने पहुंचा फायर ब्रिगेड कर्मी भी बेहोश appeared first on Naya Vichar.

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फुकेत-दिल्ली फ्लाइट टर्बुलेंस: चार सेकंड तक विमान पर नहीं रहा कंट्रोल, FDR डिकोडिंग में सामने आई वजह

फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 की ऊंचाई अचानक करीब 300 फीट कम होने के मामले में शुरुआती तकनीकी जानकारी सामने आई है. एयरबस ने विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) को डिकोड करने के बाद कहा है कि घटना की वजह फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर की खराबी नहीं, बल्कि हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव का कुछ समय के लिए कम होना हो सकता है. 4 अगस्त को अचानक नीचे आया था विमान यह घटना 4 अगस्त 2026 को हुई थी. एयर इंडिया का एयरबस A320 विमान फुकेत से दिल्ली आ रहा था, तभी ओडिशा के ऊपर उसकी ऊंचाई अचानक करीब 300 फीट कम हो गई. कुछ समय बाद पायलटों ने विमान को दोबारा नियंत्रित कर लिया और दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग कराई. विमान में तीन बच्चों समेत 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य सवार थे. इनमें दो पायलट और छह केबिन क्रू शामिल थे. घटना में 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य घायल हुए थे. हाइड्रोलिक प्रेशर अचानक हुआ कम शुरुआती जांच के अनुसार, विमान के ग्रीन, ब्लू और येलो हाइड्रोलिक सिस्टम में कुछ समय के लिए दबाव कम हो गया था. ये सिस्टम विमान के कई महत्वपूर्ण फ्लाइट कंट्रोल को चलाने में मदद करते हैं. इनमें एलिवेटर, एइलरॉन और स्पॉइलर जैसे हिस्से शामिल हैं. एलिवेटर विमान की फ्रंट पॉइंट (Nose)को ऊपर-नीचे करने में मदद करता है, जबकि एइलरॉन और स्पॉइलर विमान को दाएं-बाएं झुकाने और नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं. चार सेकंड तक प्रभावित रहे फ्लाइट कंट्रोल आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, हाइड्रोलिक प्रेशर कम होने के बाद करीब चार सेकंड तक एलिवेटर और एइलरॉन सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाए. इसी दौरान विमान की पिच में अचानक बदलाव आया और ऑटोपायलट भी डिस्कनेक्ट हो गया. कुछ ही समय बाद सिस्टम सामान्य हुआ और पायलटों ने मैन्युअल कंट्रोल संभाल लिया. इसके बाद विमान को स्थिर किया गया. एयरबस ने कंप्यूटर में खराबी से किया इनकार एयरबस के शुरुआती तकनीकी आकलन में प्राथमिक फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर में किसी खराबी के संकेत नहीं मिले हैं. कंपनी का मानना है कि विमान का व्यवहार उस स्थिति से मेल खाता है, जब हाइड्रोलिक प्रेशर कम हो जाता है. इस दौरान फ्लाइट कंट्रोल सतहें डैम्पिंग मोड में चली गई थीं, जिसके कारण विमान की प्रतिक्रिया में अचानक बदलाव आया. एयर इंडिया को कई तकनीकी जांच के निर्देश एयरबस ने एयर इंडिया को ग्रीन, येलो और ब्लू हाइड्रोलिक सिस्टम की विस्तृत जांच करने की सलाह दी है. इसके साथ ही प्रेशर स्विच और ट्रांसड्यूसर की भी जांच करने को कहा गया है. कंपनी ने कुछ खास प्रेशर ट्रांसड्यूसर और लीक मापने वाले स्विच को निकालकर अलग से जांचने का सुझाव भी दिया है. मेंटेनेंस रिकॉर्ड भी मांगा गया एयरबस ने एयर इंडिया से विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम के हाल के मेंटेनेंस का पूरा रिकॉर्ड मांगा है. इसके अलावा घटना के समय फ्लाइट गाइडेंस और फ्लाइट ऑग्मेंटेशन कंप्यूटर में दर्ज डेटा भी साझा करने के लिए कहा गया है. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि हाइड्रोलिक प्रेशर क्यों कम हुआ और क्या इसके पीछे किसी पुर्जे या रखरखाव से जुड़ी समस्या थी. विमान की संरचना की भी होगी जांच अचानक ऊंचाई कम होने के कारण विमान के ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है. इसे देखते हुए एयरबस ने विमान की संरचना की भी पूरी जांच करने की सिफारिश की है. इसके अलावा पायलटों और केबिन क्रू से भी घटना के दौरान देखी और महसूस की गई स्थितियों की विस्तृत जानकारी मांगी गई है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है. हाइड्रोलिक सिस्टम, फ्लाइट कंट्रोल और विमान की संरचना की विस्तृत जांच की जा रही है. तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि हाइड्रोलिक प्रेशर में अचानक कमी किस वजह से आई थी. Also Read: चमोली सुरंग हादसा: सात लोगों की मौत, कई घायल, रेस्क्यू जारी The post फुकेत-दिल्ली फ्लाइट टर्बुलेंस: चार सेकंड तक विमान पर नहीं रहा कंट्रोल, FDR डिकोडिंग में सामने आई वजह appeared first on Naya Vichar.

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CJI सूर्यकांत का NALSAR छात्रों पर कार्रवाई को लेकर BCI को नोटिस, बोले- उनका कोई लेना-देना नहीं है

CJI Surya Kant: सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR (National Academy of Legal Studies and Research) के छात्रों से जुड़े मामले में हिंदुस्तानीय बार काउंसिल (BCI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर छात्र कानूनी तरीके से विरोध कर रहे हैं, तो BCI को इसमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है. सीजेआई ने कहा, “इस मामले में बीसीआई का कोई लेना-देना नहीं है. हम आपके साथ हैं. छात्रों ने मुझे पत्र लिखा है. यह छात्रों और मेरे बीच संवाद है. उन्हें बेवजह परिपत्र जारी करने का क्या अधिकार है? जब मैं कॉलेज में था, तब मैं छात्रों की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था. कभी-कभी, भले ही वे गलत बात कह रहे हों, अगर वे कानूनी रूप से अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो इसकी अनुमति दी जानी चाहिए.” वरिष्ठ अधिवक्ता ने कार्रवाई के आदेश को बताया अवैध छात्रों पर कार्रवाई के मामले के वापस लिए जा चुके फैसले पर वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा, “एक नियामक के तौर पर उन्हें पहले यह जांचना चाहिए था कि क्या वह ऐसा आदेश जारी कर सकते हैं. बार काउंसिल ऑफ इंडिया में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो चेयरमैन को किसी विशेष बैच के नामांकन पर रोक लगाने जैसा व्यापक आदेश जारी करने की शक्ति देता हो. इसलिए यह आदेश पूरी तरह अवैध था. ये भी पढ़ें: UP में जिस पनीर और खोवा को असली समझकर खरीद रहे थे, उसमें मिलाया जा रहा था कपड़े धोने वाला केमिकल छात्रों के नामांकन पर रोक का था मामला दरअसल, NALSAR यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने दीक्षांत समारोह में CJI को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाए जाने का विरोध किया था. छात्रों का आक्रोश युवाओं पर किए गए एक टिप्पणी को लेकर था. जिसके चलते कुछ छात्रों ने सीजेआई सूर्यकांत से अपनी डिग्री नहीं लेने की बात कही थी. इस विरोध से नाराज होकर BCI ने एक सर्कुलर जारी कर छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने और कार्रवाई की बात कही थी. ये भी पढ़ें: उम्र का अंतर कम होने पर भी स्त्री कर्मचारी को मिलेगा मातृत्व अवकाश,लखनऊ हाई कोर्ट का फैसला परिषद ने आदेश वापस लिया हालांकि, BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि परिषद ने अपने पहले के आदेश को वापस ले लिया है और बताया कि छात्रों के खिलाफ कोई जांच नहीं होगी. उन्होंने कहा कि BCI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कानून के छात्र को न्यायिक इंटर्नशिप के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो. The post CJI सूर्यकांत का NALSAR छात्रों पर कार्रवाई को लेकर BCI को नोटिस, बोले- उनका कोई लेना-देना नहीं है appeared first on Naya Vichar.

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Pakistan Day Special -2: सिर्फ एक देश नहीं… एक Process भी क्यों है पाकिस्तान?

पाकिस्तान को हम आमतौर पर एक Nation-State के रूप में देखते हैं. एक देश, जिसकी अपनी प्रशासन, सेना, संविधान, सीमाएं और संस्थाएं हैं. लेकिन पाकिस्तान की नेतृत्व को समझने का एक दूसरा तरीका भी है. पाकिस्तान को एक ‘Process’ की तरह देखिए. यानी ऐसा नेतृत्वक प्रोजेक्ट, जिसकी राष्ट्रीय पहचान, सुरक्षा नीति और सत्ता की संरचना समय के साथ लगातार एक-दूसरे को प्रभावित करती रही हैं. इस नजरिए से देखें तो पाकिस्तान की कहानी सिर्फ हिंदुस्तान-पाकिस्तान विवाद की कहानी नहीं रह जाती. यह पहचान, सुरक्षा, सेना, धर्म, नेतृत्व और Proxy Warfare के बीच बने एक जटिल रिश्ते की कहानी बन जाती है. पाकिस्तान पर मेरी किताब यहां से पढ़ें 1. पहचान का सवाल: ‘हम कौन हैं?’ हर राष्ट्र अपनी पहचान बनाने की कोशिश करता है. हिंदुस्तान की राष्ट्रीय पहचान को समझने के लिए उसकी हजारों वर्षों की सभ्यतागत परंपराओं, भाषाओं, संस्कृतियों, धर्मों और सामाजिक विविधता को देखा जा सकता है. पाकिस्तान की स्थिति कुछ अलग रही. 1947 में पाकिस्तान का निर्माण एक अलग मुस्लिम नेतृत्वक पहचान और उपमहाद्वीप के मुस्लिमों के लिए अलग नेतृत्वक व्यवस्था की मांग के संदर्भ में हुआ. लेकिन आजादी के बाद उसके सामने एक बड़ा सवाल था- एक नए देश की पहचान क्या होगी? क्या वह सिर्फ एक मुस्लिम राष्ट्र होगा? क्या उसकी पहचान इस्लाम से तय होगी? क्या वह पंजाबी, सिंधी, बलोच, पश्तून और बंगाली जैसी क्षेत्रीय पहचानों को साथ लेकर चलेगा? या उसकी राष्ट्रीय पहचान का सबसे बड़ा आधार हिंदुस्तान से अलग होना होगा? यहीं से पाकिस्तान की Identity Politics की जटिलता शुरू होती है. इसे ‘Negative Identity’ के रूप में समझा जा सकता है- जहां किसी पहचान का एक हिस्सा यह बताने से बनता है कि हम कौन नहीं हैं. हालांकि, पाकिस्तान की पहचान को सिर्फ हिंदुस्तान-विरोध तक सीमित करना भी सही नहीं होगा. वहां इस्लामी पहचान, क्षेत्रीय संस्कृतियां, भाषाई विविधता और अलग-अलग नेतृत्वक विचारधाराएं भी महत्वपूर्ण रही हैं. लेकिन हिंदुस्तान के साथ उसका संबंध उसकी राष्ट्रीय नेतृत्व का एक स्थायी तत्व जरूर बन गया. 2. हिंदुस्तान: पड़ोसी से ‘Security Threat’ तक 1947 के बाद हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुए. कश्मीर विवाद बना रहा और दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे. इस माहौल ने पाकिस्तान की नेतृत्व में National Security को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया. धीरे-धीरे एक विचार मजबूत हुआ- हिंदुस्तान एक संभावित और स्थायी सुरक्षा चुनौती है. यहीं से Pakistan का Security State वाला चरित्र मजबूत होने लगा. जब किसी देश की नेतृत्व में सुरक्षा का मुद्दा लगातार सबसे ऊपर रहता है, तो सेना और सुरक्षा संस्थाओं की भूमिका भी बढ़ती है. पाकिस्तान में सेना सिर्फ सीमा की रक्षा करने वाली संस्था नहीं रही. उसने कई बार सीधे सत्ता संभाली और लंबे समय तक नेतृत्वक व्यवस्था पर निर्णायक प्रभाव बनाए रखा. यानी एक चक्र बनता गया- हिंदुस्तान से सुरक्षा चिंता → मजबूत सैन्य भूमिका → Security State → सेना की नेतृत्वक भूमिका → फिर Security Narrative की मजबूती. यही चक्र पाकिस्तान की नेतृत्व को समझने की एक महत्वपूर्ण कुंजी है. 3. जब युद्ध महंगा हो, तो Proxy क्यों? अब आते हैं तीसरे चरण पर: Proxy Warfare. सीधे युद्ध में सैनिक, हथियार, पैसा और नेतृत्वक जोखिम सब कुछ लगता है. इसलिए कई राज्य ऐसे संगठनों या समूहों का समर्थन करते हैं, जिनके जरिए वे अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, जबकि औपचारिक रूप से सीधे युद्ध में शामिल होने से बचते हैं. इसे ही broadly Proxy War कहा जाता है. पाकिस्तान के संदर्भ में यह रणनीति खास तौर पर अफगानिस्तान और कश्मीर के संदर्भ में चर्चा में रही है. 1979 के बाद अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप के दौरान पाकिस्तान अमेरिका और अन्य देशों के समर्थन से बने anti-Soviet jihadist network का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना. इस अनुभव ने पाकिस्तान की सुरक्षा सोच को प्रभावित किया. बाद के दशकों में कश्मीर में भी विभिन्न militant और extremist संगठनों को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर हिंदुस्तान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गंभीर आरोप और बहस होती रही. इसका सबसे बड़ा फायदा यह था कि राज्य प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय कम तीव्रता वाले संघर्ष के जरिए अपने विरोधी पर दबाव बनाए रख सकता था. लेकिन यहां एक बड़ा खतरा भी था- Proxy को पैदा करना आसान हो सकता है, नियंत्रित करना हमेशा आसान नहीं होता. Read more: पाकिस्तान में कैसे ‘जिहाद’ बना State Policy? General Zia ने 1979 में बदली रणनीति, तैयार हुआ ‘Proxy War’ का मॉडल 4. हथियार से ज्यादा ताकतवर होती है कहानी किसी भी लंबे संघर्ष को सिर्फ हथियारों से नहीं चलाया जा सकता. उसके पीछे एक Narrative चाहिए. यही कारण है कि पाकिस्तान में शिक्षा, मीडिया और नेतृत्वक विमर्श में National Security, Kashmir और हिंदुस्तान के साथ संबंधों को लेकर विशेष प्रकार के narratives लंबे समय तक प्रभावशाली रहे हैं. स्कूल की किताबों से लेकर नेतृत्वक भाषणों तक, इतिहास और राष्ट्रीय पहचान की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती रही हैं. इससे एक संदेश मजबूत हो सकता है- हम खतरे में हैं. और जब किसी समाज में खतरे की भावना लगातार बनी रहती है, तो सुरक्षा संस्थाओं की भूमिका भी अधिक स्वीकार्य दिखाई दे सकती है. हालांकि, पाकिस्तान के समाज को एक ही विचारधारा से संचालित मानना गलत होगा. वहां लोकतांत्रिक आंदोलनों, उदार विचारों, क्षेत्रीय पहचानों, धार्मिक विविधताओं और सेना की भूमिका पर सवाल उठाने वाली आवाजों की भी लंबी परंपरा रही है. यानी Pakistan का समाज और Pakistan का State एक ही चीज नहीं हैं. Read more: Strategic Depth: जब अफगानिस्तान बना पाकिस्तान की रणनीति का केंद्र 5. तो क्या पाकिस्तान सचमुच एक ‘Process’ है? यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है. पाकिस्तान को केवल एक असफल या अस्थिर देश के रूप में देखना समस्या को बहुत सरल बना देता है. वह एक ऐसा राज्य है, जहां Identity, Security, Military Power और Political Institutions ने दशकों से एक-दूसरे को प्रभावित किया है. इसे एक चक्र की तरह समझिए- Identity → Threat Perception → Security State → Military Influence → Proxy Strategy → National Narrative → फिर वही Identity. यही कारण है कि पाकिस्तान को समझने के लिए केवल यह पूछना पर्याप्त नहीं है कि वहां प्रशासन कौन चला रहा है. हमें यह भी पूछना होगा- राज्य की प्राथमिकताएं क्या हैं? खतरे की उसकी परिभाषा क्या

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राहुल गांधी के बयान पर भड़के नड्डा, कहा- ऐसा विपक्षी नेता देखना ही बाकी रह गया था

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीजेपी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किए गए हमले के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पलटवार किया है. नड्डा ने राहुल गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे विपक्षी नेता को देखना देश का दुर्भाग्य है. देश के लोकतंत्र का दुर्भाग्य जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी पर हमला करते हुए लिखा- अब बस विपक्ष के ऐसे नेता को देखना ही बाकी रह गया था, यह देश का दुर्भाग्य है. कांग्रेस के लिए भी राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार करना कितने दुख की बात होगी. नड्डा का यह बयान राहुल गांधी की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा था. गुरुवार को रचनात्मक कांग्रेस अधिवेशन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि देश में कई लोग लंबे समय से भाजपा और आरएसएस के सामने डरकर व्यवहार करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि विपक्ष जिन लोगों से मुकाबला कर रहा है, उन्हें हिंदुस्तान के दर्शन और इतिहास की समझ नहीं है. बोले राहुल गांधी- मोदी और शाह के हटने तक लड़ाई जारी रहेगी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला करते हुए कहा कि विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा. उन्होंने कहा- आप लिख लो, जब तक नरेंद्र मोदी इस्तीफा नहीं देते और गृह मंत्री हट नहीं जाते, तब तक हम उनको सोने नहीं देंगे, हम इन्हें जगाकर रखेंगे. राहुल गांधी ने पीएम मोदी की मिमिक्री की राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर भी कटाक्ष किया था. मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगाते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिमाग में यह बात बैठ गई है कि गले मिलना ही विदेश नीति है. इस दौरान संदीप दीक्षित ने मजाकिया लहजे में पूछा कि कहीं राहुल ने उन्हें जॉर्जिया मेलोनी समझकर तो गले नहीं लगाया. इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और कुछ लोगों ने इसे स्त्री विरोधी बताया. Also Read: PM मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी का तंज, बोले- ‘नेताओं को गले लगाना विदेश नीति नहीं’ The post राहुल गांधी के बयान पर भड़के नड्डा, कहा- ऐसा विपक्षी नेता देखना ही बाकी रह गया था appeared first on Naya Vichar.

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गया जी में जहरीली गैस से चार लोगों की मौत, मोटर ठीक करने के दौरान हुआ हादसा

Gaya News : डोभी प्रखंड अंतर्गत गढ़ करमौनी गांव में कुएं में जहरीली गैस के कारण दम घुटने से चार ग्रामीणों की मौत हो गयी. बताया जा रहा है कि चारों ग्रामीण कुएं में मोटर ठीक करने के लिए उतरे थे. इसी दौरान कुएं के अंदर जहरीली गैस की चपेट में आने से उनका दम घुट गया. दो शव कुएं से बाहर निकाले गये घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गयी. अब तक दो लोगों के शव कुएं से बाहर निकाले जा चुके हैं, जबकि दो अन्य ग्रामीणों की तलाश जारी है. स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव कार्य किया जा रहा है. घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीण जहरीली गैस से दम घुटने की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुएं के अंदर जहरीली गैस जमा होने के कारण यह हादसा हुआ. मोटर ठीक करने के दौरान चारों ग्रामीण इसकी चपेट में आ गये. प्रशासन की ओर से घटना की विस्तृत जानकारी जुटायी जा रही है. गया जी: टिकारी में दिनदहाड़े किसान की धारदार हथियार से हत्या, आरोपी गिरफ्तार, परिवार में मचा कोहराम The post गया जी में जहरीली गैस से चार लोगों की मौत, मोटर ठीक करने के दौरान हुआ हादसा appeared first on Naya Vichar.

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7 घराने, 7.52 लाख करोड़ संपत्ति, जानिए देश के सबसे अमीर परिवारों में यूपी के किन दिग्गजों का नाम

UP News: बार्कलेज प्राइवेट क्लाइंट्स और हुरुन इंडिया की ताजा सूची में उत्तर प्रदेश से जुड़े सात कारोबारी घरानों को जगह मिली है. इन सभी समूहों की संयुक्त नेटवर्थ करीब 7.52 लाख करोड़ रुपये है. नोएडा, ग्रेटर नोएडा, कानपुर, गाजियाबाद और अमरोहा जैसे शहर इन कारोबारों के प्रमुख केंद्र हैं. एचसीएल टेक्नोलॉजीज सबसे आगे शिव नाडर और रोशनी नाडर के नेतृत्व वाला एचसीएल टेक्नोलॉजीज यूपी से जुड़ा सबसे मूल्यवान कारोबारी समूह है. इसकी वैल्यू करीब 2.91 लाख करोड़ रुपये है और राष्ट्रीय सूची में यह आठवें स्थान पर है. कंपनी का मुख्यालय नोएडा में है. डाबर इंडिया की मजबूत मौजूदगी मोहित बर्मन की अगुवाई वाले डाबर इंडिया का मूल्यांकन करीब 1.03 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी की कॉरपोरेट मौजूदगी कौशांबी, साहिबाबाद और गाजियाबाद में है. गाजियाबाद में उसका कार्यालय और शोध एवं विकास केंद्र भी मौजूद है. जुबिलेंट भरतिया समूह श्याम एस. भरतिया के नेतृत्व वाले जुबिलेंट भरतिया समूह की नेटवर्थ करीब 82,700 करोड़ रुपये है. इसका कॉरपोरेट कार्यालय नोएडा में है, जबकि जुबिलेंट फार्मोवा का पंजीकृत कार्यालय अमरोहा के गजरौला में है. समूह दवा, रसायन और कृषि समेत कई क्षेत्रों में सक्रिय है. जेके सीमेंट का बड़ा कारोबार जेके सीमेंट का मूल्यांकन करीब 74,400 करोड़ रुपये है। समूह की प्रमुख कारोबारी मौजूदगी कानपुर से जुड़ी है. इसके अलीगढ़, हमीरपुर और प्रयागराज समेत कई स्थानों पर संयंत्र हैं। सीमेंट उद्योग में समूह की मजबूत पकड़ है. हैवेल्स, पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट और जैक्सन अनिल राय गुप्ता की हैवेल्स इंडिया की वैल्यू करीब 72,800 करोड़ रुपये है और इसका कार्यालय नोएडा में है. ग्रेटर नोएडा स्थित पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट की नेटवर्थ 15,300 करोड़ रुपये, जबकि समीर गुप्ता के नेतृत्व वाले जैक्सन समूह की हैसियत करीब 13,000 करोड़ रुपये है. नए शहरों में बढ़ रहा कारोबार हुरुन इंडिया के मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद के मुताबिक नए शहरों में नए कारोबारी परिवार तेजी से उभर रहे हैं. यूपी की सूची में मजबूत मौजूदगी प्रदेश के बढ़ते कारोबारी आधार और मजबूत होती वित्तीय स्थिति का संकेत है. हुरुन इंडिया का मुख्यालय मुंबई में है. Must Read: यूपी के 52 मॉडल स्कूलों में बनेंगे मिनी स्टेडियम The post 7 घराने, 7.52 लाख करोड़ संपत्ति, जानिए देश के सबसे अमीर परिवारों में यूपी के किन दिग्गजों का नाम appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तान में कैसे ‘जिहाद’ बना State Policy? General Zia ने 1979 में बदली रणनीति, तैयार हुआ ‘Proxy War’ का मॉडल

कभी-कभी इतिहास में कोई एक साल ऐसा आता है, जिसके असर को समझे बिना आने वाले दशकों की नेतृत्व समझना मुश्किल हो जाता है. पाकिस्तान के मामले में वह साल था- 1979 एक ही साल में तीन बड़े घटनाक्रम हुए- सोवियत संघ ने अफगानिस्तान में सैनिक भेजे. ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई. मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर हथियारबंद लोगों ने कब्जा कर लिया. इन तीनों घटनाओं का आपस में सीधा संबंध नहीं था. लेकिन इनका असर उस समय के मुस्लिम विश्व, शीत युद्ध (cold war) और दक्षिण एशिया की नेतृत्व पर पड़ा. खासकर अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप ने पाकिस्तान को अमेरिका, सऊदी अरब और अफगान मुजाहिदीन के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कड़ी बना दिया. यहीं से वह प्रक्रिया तेज हुई, जिसमें ‘जिहाद’ की धार्मिक अवधारणा को राज्य की सुरक्षा और विदेश नीति के उद्देश्यों से जोड़ने की कोशिश की गई. पाकिस्तान पर मेरी किताब पढ़ें यहां से 1979: जब अफगानिस्तान शीत युद्ध का नया मैदान बना दिसंबर 1979 के आखिर में सोवियत सैनिक अफगानिस्तान में दाखिल हुए. सोवियत नेतृत्व काबुल की कम्युनिस्ट प्रशासन को बचाए रखना चाहता था और उसे डर था कि अफगानिस्तान में चल रहा विद्रोह उसके लिए रणनीतिक खतरा बन सकता है. अमेरिकी विदेश विभाग के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, सोवियत सेना ने दिसंबर के अंत में अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर प्रवेश किया और काबुल समेत महत्वपूर्ण इलाकों पर नियंत्रण स्थापित किया. अमेरिका के लिए यह सिर्फ अफगानिस्तान की कहानी नहीं थी. यह Cold War था. वॉशिंगटन के सामने सवाल था- क्या सोवियत संघ से सीधे भिड़ा जाए? या फिर- ऐसी ताकत तैयार की जाए जो अफगानिस्तान में सोवियत सेना को लगातार चुनौती देती रहे? अमेरिका ने दूसरा रास्ता चुना. यहीं से शुरू हुआ वह गुप्त अभियान, जिसे बाद में Operation Cyclone के नाम से जाना गया. अमेरिका का पैसा, पाकिस्तान की ISI और अफगान मुजाहिदीन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. अमेरिका ने अफगानिस्तान में सीधे अपनी सेना उतारकर सोवियत संघ से युद्ध नहीं किया. उसने अफगान विद्रोहियों को समर्थन देने का रास्ता अपनाया. CIA के ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि जुलाई 1979 में ही अमेरिकी प्रशासन ने अफगान विद्रोहियों के लिए गुप्त सहायता को मंजूरी दी थी- यानी सोवियत सेना के बड़े पैमाने पर प्रवेश से पहले ही. शुरुआती सहायता सीमित थी, लेकिन बाद में यह अभियान काफी बड़ा हुआ. और यहां पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई. ISI यानी Inter-Services Intelligence अफगान लड़ाकों और बाहरी सहायता के बीच प्रमुख माध्यम बनी. सरल भाषा में समझें- अमेरिका → धन और हथियारों का समर्थन सऊदी अरब → आर्थिक और वैचारिक समर्थन पाकिस्तान/ISI → प्रशिक्षण, वितरण और नेटवर्किंग में प्रमुख भूमिका अफगान मुजाहिदीन → सोवियत सेना के खिलाफ लड़ाई इस व्यवस्था ने पाकिस्तान को अचानक ऐसी रणनीतिक अहमियत दे दी, जो 1979 से पहले उसके पास इस स्तर पर नहीं थी. पाकिस्तान को क्या मिला? सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान पाकिस्तान सिर्फ एक पड़ोसी देश नहीं रहा. वह Cold War की एक frontline state बन गया. अफगान सीमा के पास प्रशिक्षण शिविर, शरणार्थी शिविर, हथियारों की आवाजाही और विभिन्न militant factions के बीच नेटवर्क विकसित होने लगे. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से स्वयंसेवक भी अफगान युद्ध में शामिल होने पहुंचे. यहीं एक नया बदलाव आया. स्थानीय युद्ध धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप लेने लगा. धर्म, भू-नेतृत्व, पैसा, हथियार और anti-Soviet नेतृत्व एक ही संघर्ष में मिल गए. यही वह ecosystem था जिसने आगे चलकर transnational jihadist networks के लिए जमीन तैयार की. लेकिन क्या अमेरिका ने ‘अल-कायदा’ बनाई थी? यहां इतिहास को बहुत सरल बनाकर देखने से बचना जरूरी है. यह कहना सही नहीं होगा कि CIA ने सीधे अल-कायदा बनाई. अफगान जिहाद के दौरान विभिन्न देशों और संगठनों से आए लड़ाकों के अलग-अलग नेटवर्क बने. अल-कायदा का गठन 1988 के आसपास हुआ, जब सोवियत-अफगान युद्ध अपने अंतिम चरण में था. इसलिए ज्यादा सटीक बात यह है कि- अफगान जिहाद के लिए बनाया गया अंतरराष्ट्रीय militant ecosystem बाद में उन नेटवर्कों के लिए महत्वपूर्ण आधार बना, जिनमें अल-कायदा भी शामिल थी. यानी यह कहानी किसी एक संस्था की बनाई हुई योजना से ज्यादा कई नेटवर्कों, विचारधाराओं और राज्य-हितों के मिलन की कहानी है. मदरसों और विचारधारा की भूमिका युद्ध सिर्फ बंदूक से नहीं लड़ा जाता. उसके लिए कहानी और विचारधारा भी चाहिए. अफगान युद्ध के दौरान पाकिस्तान में धार्मिक संस्थानों और मदरसों की भूमिका बढ़ी. सऊदी अरब से आने वाली धार्मिक और आर्थिक सहायता ने भी इस प्रक्रिया को प्रभावित किया. Brookings के अनुसार, 1970 के दशक से पाकिस्तान के Ahl-e-Hadith और Deobandi मदरसों में सऊदी प्रभाव और निजी वित्तीय सहायता बढ़ी थी. अफगान मुजाहिदीन को प्रशिक्षित करने वाले कई मदरसे इसी व्यापक नेटवर्क से जुड़े थे. यहां एक और सावधानी जरूरी है. हर मदरसा militant training center नहीं था और न ही हर धार्मिक छात्र militant बना. लेकिन कुछ संस्थानों, संगठनों और militant networks के बीच जो संबंध विकसित हुए, उन्होंने पाकिस्तान-अफगानिस्तान क्षेत्र की नेतृत्व पर लंबे समय तक असर डाला. उधर ईरान में हो रही थी इस्लामिक क्रांति 1979 का दूसरा बड़ा घटनाक्रम था ईरानी क्रांति. अयातुल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में ईरान में राजशाही समाप्त हुई और इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना हुई. इसका संदेश पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण था- धार्मिक विचारधारा सिर्फ सामाजिक या आध्यात्मिक शक्ति नहीं; वह नेतृत्वक सत्ता को भी चुनौती दे सकती है. हालांकि ईरान की क्रांति शिया नेतृत्वक आंदोलन की अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से निकली थी और इसे अफगान जिहाद या सुन्नी militant networks के साथ सीधे जोड़ना गलत होगा. लेकिन इसने पूरे पश्चिम एशिया और मुस्लिम दुनिया में धर्म और नेतृत्व के संबंध पर बहस को जरूर बदल दिया. और फिर मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर हमला 20 नवंबर 1979 को हथियारबंद लोगों ने मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर कब्जा कर लिया. यह घटना सऊदी शासन के लिए बेहद बड़ा झटका थी. सऊदी नेतृत्व को यह एहसास हुआ कि कट्टर धार्मिक विचारधारा केवल विदेश नीति का साधन नहीं है- वह खुद सत्ता के लिए चुनौती भी बन सकती है. इसके बाद सऊदी धार्मिक नीति और वैश्विक धार्मिक प्रभाव को लेकर कई बदलाव हुए. पाकिस्तान में धार्मिक संस्थानों को मिलने वाली सऊदी सहायता का इतिहास हालांकि 1979 से पहले का भी है और 1980 के दशक के अफगान जिहाद

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एक्सप्लेनर : हाजीपुर में ठेकेदार हत्याकांड की पूरी कहानी, शूटरों ने 10 सेकेंड में मारी थी 5 गोलियां, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ?

Hajipur Contractor Murder Case :  हाजीपुर में गुरुवार को सुबह सुबह कंस्ट्रक्शन ठेकेदार राम नरेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. बाइक से आए 5 शूटरों ने महज 10 सेकेंड में ठेकेदार पर पांच गोलियां बरसाई. इस घटना में मौके पर ही ठेकेदार की मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है. बीते गुरुवार को पूरे दिन इलाके में पुलिस की तैनाती रही. पुलिस ने मात्र कुछ ही घंटे में एक नामजद आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया. आइए जानते हैं इस मामले में अब तक क्या क्या हुआ? क्या है पूरा मामला दरअसल, पूरा मामला हाजीपुर जिला के सदर थाना क्षेत्र के दिग्घी नया टोला का है. जहां गुरुवार की सुबह अपराधियों ने कंस्ट्रक्शन ठेकेदार राम नरेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी. अपराधियों ने ठेकेदार को नजदीक से ताबड़तोड़ पांच गोलियां मारीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज करते हुए एक नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. सुबह टहलने निकले थे ठेकेदार, तभी पहुंच गए हमलावर बता दें कि, रामनरेश राय रोजाना की तरह गुरुवार की सुबह टहलने के लिए घर से निकले थे. आम दिनों में उनके साथ करीब पांच से छह लोग भी सुबह की सैर पर रहते थे, लेकिन गुरुवार को वह अकेले ही निकले थे. इसी दौरान दिग्घी नया टोला इलाके में बाइक सवार अपराधी उनके पास पहुंचे. बाइक रोककर उनसे बातचीत करते दिखाई देते हैं. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया. कुछ पल की बातचीत के बाद भागने लगे रामनरेश राय CCTV फुटेज में दिखाई दे रही गतिविधियों के मुताबिक बाइक सवार अपराधियों और रामनरेश राय के बीच कुछ देर बातचीत हुई. इसके बाद ठेकेदार को खतरे का अंदाजा हुआ और उन्होंने वहां से भागने की कोशिश की. ठेकेदार जंगल की ओर भागे और बाइक पर पीछे बैठे दो अपराधी नीचे उतरे और रामनरेश राय का पीछा करने लगे. दोनों उनका पीछा करते हुए पास के जंगल की तरफ पहुंचे. इसी दौरान ठेकेदार पर गोलियां चलाई गईं. View on Instagram 10 सेकेंड में पांच गोलियां, मौके पर ही मौत हमलावरों ने बेहद नजदीक से रामनरेश राय को निशाना बनाया. बताया जा रहा है कि करीब 10 सेकेंड के भीतर उन पर पांच गोलियां चलाई गईं. गोलियां लगने के बाद ठेकेदार की मौके पर ही मौत हो गई. वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी वहां से फरार हो गए. सुबह के समय हुई इस हत्या के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. आसपास के लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जुट गई. CCTV फुटेज बनी पुलिस जांच की अहम कड़ी घटनास्थल के पास लगे CCTV कैमरों में वारदात से पहले की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं. फुटेज में बाइक सवार संदिग्धों का ठेकेदार के पास पहुंचना, बातचीत करना और फिर उनका पीछा करना दिखाई दे रहा है. पुलिस CCTV फुटेज के साथ तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच का आधार बना रही है. फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान और घटना में उनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है. घर में माता-पिता के साथ रहते थे रामनरेश राय रामनरेश राय कंस्ट्रक्शन का काम करते थे और दिग्घी कला में अपने माता-पिता के साथ रहते थे. उनकी पत्नी रेखा देवी पटना में रहकर अपने इकलौते बेटे की पढ़ाई-लिखाई संभाल रही हैं. ठेकेदार की हत्या की समाचार मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. अचानक हुई हत्या से इलाके के लोग भी सकते में हैं. View on Instagram पत्नी के बयान पर तीन नामजद और चार अज्ञात पर केस मामले में मृतक की पत्नी रेखा देवी के बयान पर सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है. FIR में तीन नामजद आरोपियों के अलावा चार अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपी सहदेव राय को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके बयानों के आधार पर दूसरे आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है. जमीन विवाद और रंगदारी की मांग को हत्या की वजह बताया प्राथमिकी में हत्या की वजह जमीन विवाद और रंगदारी की मांग से जुड़ी बताई गई है. रेखा देवी के अनुसार, दिग्घी कला स्थित कुमहिया पोखर के पास परिवार की करीब 55 डिसमिल निजी जमीन है. इसी जमीन पर राम बाबू राय वेयर हाउस के नाम से गोदाम संचालित है. बताया गया है कि यह गोदाम एनबीएचसी कॉरपोरेशन के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्र स्थित विजय फ्लावर मिल्स को किराये पर दिया गया है. यहां खाद्य सामग्री से जुड़े वाहनों का आवागमन होता है. परिजनों का आरोप है कि इसी जमीन और गोदाम को लेकर आरोपियों की ओर से रंगदारी की मांग की जा रही थी. हालांकि, इन आरोपों और हत्या के वास्तविक कारण की पुलिस जांच अभी जारी है. View on Instagram मई में भी धमकी देने का लगाया गया आरोप रेखा देवी के बयान के अनुसार, सहदेव राय की ओर से मई महीने में भी धमकी दी गई थी. आरोप है कि 1 और 2 मई को सहदेव राय ने गोदाम के प्रबंधक और किरायेदार के मोबाइल फोन पर कॉल कर वाहनों के आने-जाने पर रोक लगाने की मांग की थी. परिजनों का आरोप है कि मांग नहीं मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी. परिवार के अनुसार, इस मामले को लेकर रामनरेश राय ने मई में ही सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने कुछ ही घंटे में एक आरोपी को दबोचा हत्या के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेजी से शुरू की. CCTV फुटेज, प्राथमिकी में दर्ज आरोपों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कुछ ही घंटे में नामजद आरोपी सहदेव राय को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या की साजिश कैसे रची गई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और वारदात को अंजाम देने वाले शूटरों का आरोपियों से क्या संबंध है. View on Instagram बाकी आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी सहदेव राय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब दूसरे नामजद और अज्ञात आरोपियों तक पहुंचने पर केंद्रित है. पुलिस संभावित

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सुबह-सुबह शेयर बाजार का मूड खराब, सेंसेक्स 300+ अंक गिरा, निफ्टी 24400 के नीचे

शुक्रवार को हिंदुस्तानीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 75 अंक से अधिक नीचे फिसल गया. बाजार में बिकवाली का दबाव दिखा और निफ्टी 24,400 के स्तर से नीचे आ गया. सुबह कारोबार के दौरान BSE Sensex 316.95 अंक यानी 0.41 फीसदी गिरकर 77,763.01 पर पहुंच गया. वहीं NSE Nifty 50 75.45 अंक यानी 0.31 फीसदी की गिरावट के साथ 24,320.40 पर कारोबार कर रहा था. बाजार में गिरावट की वजह क्या है? Geojit Investments Limited के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, फिलहाल बाजार एक सीमित दायरे में घूम रहा है. निफ्टी 23,800 से 24,400 के बीच बना हुआ है और अभी ऐसा कोई मजबूत कारण नहीं दिख रहा, जिससे यह इस दायरे से ऊपर निकले या नीचे जाए. उनके मुताबिक, अभी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा गतिविधि देखने को मिल रही है. वहीं लंबे समय के नजरिए से चुनिंदा प्राइवेट सेक्टर बैंकों में खरीदारी का मौका बन सकता है. कच्चे तेल का बाजार पर कितना असर? बाजार में पहले तेजी की उम्मीद थी, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच संभावित डील नहीं होने के बाद कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई. इससे निफ्टी की 24,400 के ऊपर जाने की उम्मीद को झटका लगा. हालांकि अब कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई है, जो शेयर बाजार के लिए राहत की बात है. Brent crude: 87.14 डॉलर प्रति बैरल Crude oil: 81.42 डॉलर प्रति बैरल वीके विजयकुमार ने कहा कि FPI की बिकवाली की रफ्तार कम हुई है और हाल में वे खरीदार भी बने हैं, लेकिन FII की गतिविधियों से बाजार में अभी कोई साफ ट्रेंड सामने नहीं आया है. ये भी पढ़ें: क्रूड ऑयल में फिर गिरावट, 2% से ज्यादा लुढ़का भाव, ईरान-ओमान की डील पर सबकी नजर अमेरिकी बाजार के संकेत कैसे रहे? दिलचस्प बात यह है कि हिंदुस्तानीय बाजार की कमजोरी के बावजूद अमेरिकी बाजार से संकेत सकारात्मक रहे. शुक्रवार को Dow Jones Futures 0.09 फीसदी ऊपर 53,886.07 पर था. S&P 500 Futures 0.65 फीसदी चढ़कर 7,798.99 और Nasdaq Futures 0.81 फीसदी बढ़कर 26,803.03 पर पहुंच गया. यानी ग्लोबल संकेत पूरी तरह कमजोर नहीं थे, लेकिन घरेलू बाजार पर कच्चे तेल और सीमित दायरे में कारोबार का दबाव बना रहा. सोने की कीमत भी क्यों फिसली? सोने की कीमत में भी शुक्रवार को दबाव देखने को मिला. यह 10 हफ्ते के ऊंचे स्तर से नीचे आया, हालांकि लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त की राह पर बना हुआ है. Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई के नरम आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी की उम्मीद कम हुई है. जुलाई के PPI आंकड़े भी उम्मीद से नरम रहे. फिलहाल सितंबर में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब एक-तिहाई मानी जा रही है. आगे अमेरिका के रोजगार आंकड़े, फेड चेयर केविन वार्श के जैक्सन होल भाषण और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम सोने और कच्चे तेल की दिशा तय करने में अहम रहेंगे. रिपोर्टिंग के समय सोना 22.97 डॉलर यानी 0.53 फीसदी गिरकर 4,326.58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था. ये भी पढ़ें: बाजार की सुबह रही फीकी, सेंसेक्स 93 अंक लुढ़का, निफ्टी 72 पॉइंट्स डाउन The post सुबह-सुबह शेयर बाजार का मूड खराब, सेंसेक्स 300+ अंक गिरा, निफ्टी 24400 के नीचे appeared first on Naya Vichar.

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