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Nepal Flood Live: नेपाल बाढ़ में 165 शव बरामद, 800 से ज्यादा लापता, UP-बिहार में अलर्ट

Nepal Flood Live: नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ में कई लोगों की जान चली गई है. तेज जलप्रवाह और बाढ़ के बाद यूपी-बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है. अब तक करीब 165 शव बरामद हुए हैं, जबकि 800 से ज्यादा लोग लापता हैं. बाढ़ से बुनियादी ढांचे को भी बहुत नुकसान पहुंचा है. काठमांडू पोस्ट के मुताबिक नौ जलविद्युत परियोजनाएं और कमर्शियल बैंकों के नौ ब्रांच तबाह हो गए हैं. जबकि 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर राजमार्ग बह गए हैं. The post Nepal Flood Live: नेपाल बाढ़ में 165 शव बरामद, 800 से ज्यादा लापता, UP-बिहार में अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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IND vs SL 2nd Test Day 5 Live: श्रीलंका का स्कोर 276/6, ऑलआउट करने के लिए भारत को चाहिए 4 विकेट

कोलंबो टेस्ट के आखिरी दिन श्रीलंका दूसरी पारी में 276/6 के स्कोर पर है और हिंदुस्तान से 63 रन आगे है. टीम इंडिया जीत की स्थिति में है, लेकिन बारिश उसकी राह में बाधा बन सकती है. The post IND vs SL 2nd Test Day 5 Live: श्रीलंका का स्कोर 276/6, ऑलआउट करने के लिए हिंदुस्तान को चाहिए 4 विकेट appeared first on Naya Vichar.

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JPSC घोटाला: कोचिंग संस्थान भी CBI की रडार पर, छापेमारी में मिले साक्ष्यों से खुलेंगे ‘सिंडिकेट’ के राज

रांची : JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच में अब CBI की रडार पर कोचिंग संस्थान भी आ गये हैं. सीबीआई अब जेपीएससी की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा में उनकी भूमिका की भी जांच करने में जुट गयी है. ऐसा रांची और हजारीबाग के दो कोचिंग संचालकों के परिसरों में छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर किया जा रहा है. जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इन संस्थानों के माध्यम से किसी अभ्यर्थी को गलत तरीके से परीक्षा में सफल कराया गया था. साथ ही कोचिंग संस्थानों से जुड़े किन लोगों के संपर्क जेपीएससी या टीडीपीएल के निदेशक और मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के कथित सिंडिकेट से थे, इसकी भी पड़ताल की जा रही है. साक्षात्कार में सफलता के लिए 15 लाख की डील ज्ञात हो कि अभय तिवारी ने पूछताछ में सीबीआई को बताया था कि जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में साक्षात्कार में सफल कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये लिये गये थे. जांच में यह बात भी सामने आयी है कि कथित सिंडिकेट की पहुंच जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते और पूर्व सदस्य डॉ अजीता भट्टाचार्य और डॉ जमाल अहमद तक थी. कोचिंग संचालकों और आरोपियों के कनेक्शन की जांच कोचिंग संचालकों के अभय तिवारी या अन्य आरोपियों से संबंध की हो रही जांच पतंजलि कोचिंग के रवि कुमार, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और कोचिंग संचालक आदित्य पांडेय के नाम भी प्रकरण में सामने आये हैं. सीबीआई के अनुसार जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ अजीता भट्टाचार्य साक्षात्कार में अभ्यर्थियों को सफल कराने के लिए अपने पीए ब्रजराम के माध्यम से पैसे लेती थीं. दस्तावेजों से कड़ियां जोड़ रही CBI वहीं जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते द्वारा मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र के माध्यम से पैसे लिये जाने की बात सामने आयी है. हालांकि इन आरोपों की सत्यता की अभी जांच की जा रही है. छापेमारी में मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई अब इन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. The post JPSC घोटाला: कोचिंग संस्थान भी CBI की रडार पर, छापेमारी में मिले साक्ष्यों से खुलेंगे ‘सिंडिकेट’ के राज appeared first on Naya Vichar.

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Smash the Patriarchy 2 : जब गाली बनी Gen Z की स्लैंग, तो लड़कियों के लिए क्यों बदल जाता है पैमाना?

ऐसे में जब Gen Z लड़कियों की जुबान से बिना कॉमा-फुलस्टॉप के गालियां निकलती हैं, तो कई लोगों को यह किसी कल्चरल शॉक से कम नहीं लगता. सड़क पर कोई लड़की गाली दे दे तो बात सिर्फ उसकी भाषा तक नहीं रहती, उसके चरित्र से होते हुए परिवार की परवरिश और संस्कार तक पहुंच जाती है. वहीं यही काम कोई लड़का करे तो अक्सर उसे लड़कों की आदत, दोस्तों की भाषा या मस्ती कहकर टाल दिया जाता है. सवाल यह है कि गाली गलत है या उसका जेंडर तय करता है कि उसे कितना गलत माना जाएगा? क्या लड़कियों की जुबान पर लगाई गयी पाबंदियां उन्हें विद्रोही बना रही हैं? या फिर सोशल मीडिया और Gen Z की स्लैंग कल्चर ने भाषा की उन सीमाओं को ही बदल दिया है, जिन्हें पिछली पीढ़ियां मर्यादा मानती थीं? इस कहानी को समझने के लिए हमने अलग-अलग शहरों की Gen Z लड़कियों से बात की. उनकी बातें बताती हैं कि वे गाली को सही नहीं ठहरातीं, लेकिन यह सवाल जरूर उठाती हैं कि भाषा और चरित्र का पैमाना लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग क्यों हो? पहले Gen Z को समझें लखनऊ की शाम्भवी मुखर्जी जो पेशे से एक टीचर हैं कहती हैं कि इस विषय को समझने के लिए पहले आपको जेन जी को समझना होगा. जेन जी दो तरह के हैं-एक जो मेट्रो सिटी में रहते हैं और दूसरे वो जो स्माॅल टाउन में रहते हैं. आप देखेंगे कि जो स्माॅल टाउन के जेन जी हैं, उनके लैंग्वेज में अभद्र शब्द कम होते हैं, जबकि मेट्रो सिटी के जेन जी में ज्यादा होते हैं. यहां यह गौर करने वाली बात भी है कि दोनों के ब्रिंग अप में भी काफी फर्क होता है. किसी को अपने पैरेंट्‌स के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका मिलता है और किसी को कम. ऐसे में वे सोशल मीडिया की ओर जाते हैं, जहां अभद्र भाषा और गालियों की भरमार है. अगर बात सिर्फ गाली देने की है, तो इसे ऐसे समझना चाहिए कि हमारे समाज में यह बहुत आम है. शहरी स्त्रीएं भले ही पब्लिक प्लेस में उस तरह से गालियां ना बकती हों, लेकिन गांव की स्त्रीएं, छोटे शहरों की स्त्रीएं काफी पुराने समय से गालियां देती रही हैं. जेंडर बायसनेस ने स्त्रीओं को बनाया rebellious शाम्भवी मुखर्जी कहती हैं कि हमारे समाज में जेंडर बायनेस तो आज भी है, चाहे उसकी वजह कुछ भी हो. मैं इस बात को मानती हूं कि मां-बाप अपनी सुरक्षा के लिए लड़कियों पर बंदिश लगाते हैं, लेकिन कहीं ना कहीं इन्हीं बंदिशों ने लड़कियों को रिबेलियस यानी विद्रोही बना दिया. अगर गाली देना बुरी बात है तो इसके लिए लड़कों को भी रोका जाना चाहिए. सिगरेट पीने से अगर कैंसर होता है, तो यह ज्ञान सिर्फ लड़कियों को नहीं लड़कों को भी देना चाहिए. बस इसी वजह से लड़कियों ने उन मर्यादाओं को तोड़ा, जो उनपर बंदिशें लगा रही थीं. आईआईटी दिल्ली की मुस्कान झा कहती हैं कि गाली देना बुरी बात है यह सबको पता है, लेकिन अगर आप इसे केवल लड़कियों से जोड़ते हैं तो वह सही नहीं लगता है. इसकी वजह यह कि आप इससे स्त्रीओं का कैरेक्टर डिफाइन करने लगते हैं. इसमें लड़का और लड़की का फर्क नहीं किया जाना चाहिए. गाली देना किसी की पर्सनालिटी डिफाइन नहीं करता आईआईटी दिल्ली की मुस्कान कहती हैं कि यहां आने से पहले मैं बहुत संकोची स्वभाव की थी और मुझे ऐसा लगता था कि गाली देने वाला व्यक्ति खराब होता है. आईआईटी दिल्ली आकर मैंने यह जाना कि ऐसा नहीं है, गाली देना अलग बात है और अच्छा इंसान होना अलग. कई लोग ऐसे हैं जो अपनी भाषा में गालियों का प्रयोग नहीं करते, लेकिन उनकी सोच छोटी होती है. लड़कियां जब अपने घरों में रहती हैं ग्रुपिंग के लिए गाली-गलौच की भाषा में बात करते हैं जेन जी मुस्कान कहती हैं कि जेन जी को यह पता है कि भाषा की मर्यादा क्या होती है. हमलोग अपने दोस्तों के साथ बातचीत में दोस्ताना माहौल के लिए गाली-गलौज की भाषा में जरूर बात करते हैं, लेकिन किसी पब्लिक प्लेस में या अपने पैरेंट्‌स के सामने ऐसे बात नहीं करते हैं. हमें पता है कि भाषा की मर्यादा क्या होती है. मुंबई की आरुषि अभी ग्रेजुएशन कर रही हैं वे कहती हैं कि गाली अब बोलचाल का हिस्सा हो गया है. जेन जी जिस माहौल में जिस तरह से पल पढ़ रहे हैं, उन्हें इस तरह की भाषा का प्रयोग करना पड़ता है क्योंकि सब कर रहे हैं. अगर नहीं करेंगे तो उनका मजाक बनेगा. रांची की प्राची भी इस बात को कहती हैं कि अगर आप जेन जी के स्लैंग का प्रयोग नहीं करेंगे तो आप उनके ग्रुप से बाहर हो जाएंगे और आपका मजाक बनेगा. बस इसी चक्कर में वे गालियां देते हैं. सोशल मीडिया ने बिगाड़ी भाषा जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तस्वीर (Photo- PTI) आरुषि कहती हैं कि Gen Z के जीवन का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर गुजरता है. रील्स, मीम्स, कमेंट्स और चैटिंग में जिस तरह की स्लैंग और बेझिझक भाषा का इस्तेमाल होता है, वह धीरे-धीरे उनकी रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन जाती है. शुरुआत में जो शब्द सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित होते हैं, वही दोस्तों के बीच बातचीत में आने लगते हैं और फिर आदत का हिस्सा बन जाते हैं. कई बार ऐसी भाषा को ‘कूल’, बेबाक और ग्रुप में घुलने-मिलने का तरीका भी माना जाता है. यही वजह है कि Gen Z के लिए कुछ ऐसे शब्द, जिन्हें पिछली पीढ़ियां अभद्र मानती थीं, अब सामान्य बोलचाल और स्लैंग का हिस्सा बन चुके हैं. जंतर-मंतर पर जो हुआ वह गलत इस स्टोरी के दौरान नया विचार ने अलग-अलग शहरों की कई Gen Z लड़कियों से बात की. दिलचस्प बात यह रही कि एक भी लड़की ने जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री के प्रति इस्तेमाल की गयी आपत्तिजनक भाषा को सही नहीं ठहराया. उनका साफ कहना था कि असहमति जताने और किसी के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के बीच फर्क होना चाहिए. देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है-चाहे वह कोई लड़का करे या लड़की. हालांकि, इन लड़कियों ने एक

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Nepal Flash Flood: नेपाल की बाढ़ और कैलाश मानसरोवर यात्रा का क्या है कनेक्शन? जानें पूरा मामला

Nepal flash flood Kailash Mansarovar Yatra: नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह आई भीषण फ्लैश फ्लड का असर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी पड़ा है. तिब्बत जा रहे सैकड़ों तीर्थयात्रियों से संपर्क टूटने की समाचार है, जिनमें बड़ी संख्या हिंदुस्तानीय श्रद्धालुओं की बताई जा रही है. अचानक आई बाढ़ से बढ़ी मुश्किल बताया जा रहा है कि रसुवा जिले में बुधवार सुबह अचानक फ्लैश फ्लड की स्थिति बनी. तेज बहाव और भारी मलबे के कारण कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई. कैलाश मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्री भी इसी क्षेत्र से होकर आगे बढ़ रहे थे. ऐसे में अचानक आई बाढ़ ने उनकी यात्रा को मुश्किल में डाल दिया. ये भी पढ़ें: Nepal Flood Live: नेपाल बाढ़ में 162 लोगों की मौत, 750 से ज्यादा लापता, UP-बिहार में अलर्ट करीब  750 से ज्यादा लापता नेपाल फ्लैश फ्लड के बाद लगभग  750 से ज्यादा लापता होने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. इन यात्रियों में अधिकांश हिंदुस्तानीय बताए जा रहे हैं. इसके अलावा करीब 93 नेपाली तीर्थयात्री भी प्रभावित बताए गए हैं. फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता यात्रियों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना है. कैलाश मानसरोवर यात्रा से क्यों जुड़ा है मामला? कैलाश मानसरोवर यात्रा धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. हिंदुस्तान समेत कई देशों से श्रद्धालु हर साल कैलाश पर्वत और मानसरोवर के दर्शन के लिए यात्रा करते हैं. नेपाल का रसुवा क्षेत्र तिब्बत की सीमा से जुड़ा होने के कारण इस यात्रा के मार्ग में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. यही वजह है कि रसुवा में आई बाढ़ का सीधा असर तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर पड़ा है. परिवारों की बढ़ी चिंता तीर्थयात्रियों से संपर्क टूटने की समाचार सामने आने के बाद उनके परिजनों में चिंता का माहौल है. प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाने तथा राहत एवं बचाव प्रयासों पर ध्यान दिया जा रहा है. हालांकि, यात्रियों की वास्तविक स्थिति को लेकर आधिकारिक और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. ऐसे में नेपाल की फ्लैश फ्लड सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं रही, बल्कि इसने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी बड़ा असर डाला है. यात्रियों की सुरक्षित वापसी अब सबसे अहम चिंता बनी हुई है. The post Nepal Flash Flood: नेपाल की बाढ़ और कैलाश मानसरोवर यात्रा का क्या है कनेक्शन? जानें पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood Live: नेपाल फ्लैश फ्लड में 160 मौत, 750 से ज्यादा लापता, UP-बिहार में अलर्ट

Nepal Flood Live: नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ में कई लोगों की जान चली गई है. तेज जलप्रवाह और बाढ़ के बाद यूपी-बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है. बाढ़ के कारण 160 लोग मारे गए हैं और 133 हिंदुस्तानीय नागरिकों समेत 750 से ज्यादा लोग लापता हैं. बाढ़ से बुनियादी ढांचे को भी बहुत नुकसान पहुंचा है. काठमांडू पोस्ट के मुताबिक नौ जलविद्युत परियोजनाएं और कमर्शियल बैंकों के नौ ब्रांच तबाह हो गए हैं. जबकि 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर राजमार्ग बह गए हैं. The post Nepal Flood Live: नेपाल फ्लैश फ्लड में 160 मौत, 750 से ज्यादा लापता, UP-बिहार में अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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हिमालय में भूकंप से कैसे आती है फ्लैश फ्लड, जानिए डेंजर जोन में क्यों रहता है नेपाल

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने हिमालयी इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें एक बार फिर सामने ला दी है. हालांकि इस घटना ने कई सवाल भी छोड़े हैं कि फ्लैश फ्लड यानी अचानक आने वाली बाढ़ इतनी खतरनाक क्यों होती है? क्या भूकंप से भी बाढ़ आ सकती है? और नेपाल की पहाड़ी जमीन इस खतरे को क्यों बढ़ा देती है? आइए आसान भाषा में समझते हैं. फ्लैश फ्लड क्या होती है? फ्लैश फ्लड का मतलब होता है बहुत कम समय में अचानक से आने वाली तेज बाढ़. इसमें नदी या नाले का पानी अचानक इतना बढ़ जाता है कि लोगों को संभलने या सुरक्षित जगह जाने का ज्यादा समय नहीं मिलता. फ्लैश फ्लड यानी बहुत कम समय में अचानक और तेज रफ्तार से आने वाली बाढ़ पहाड़ों में इसका खतरा और ज्यादा होता है. यहां जमीन पर ढलान ज्यादा होती है. इसलिए ऊपर से आने वाला पानी तेजी से नीचे की तरफ जाता है. इस दौरान पानी अपने साथ मिट्टी, पत्थर, पेड़ और दूसरे मलबे को भी बहाकर लाता है. इस वजह से फ्लैश फ्लड सिर्फ पानी की बाढ़ नहीं रहती, बल्कि एक खतरनाक धारा बन जाती है. ये भी पढ़ें: Nepal Flood Video: जल प्रलय का खौफनाक मंजर, वायरल वीडियो में देखिए कैसे हैं नेपाल के हालात भूकंप से बाढ़ कैसे आती है? भूकंप सीधे तौर पर बाढ़ नहीं लाता. लेकिन वह ऐसी घटनाओं को जन्म दे सकता है, जो बाद में अचानक बाढ़ की वजह बन जाएं. हिमालय के ऊंचे पहाड़ों पर बड़ी मात्रा में बर्फ, ग्लेशियर और चट्टान मौजूद हैं. इनमें से कुछ हिस्से काफी अस्थिर होते हैं. जब भूकंप के तेज झटके आते हैं तो पहाड़ की ये अस्थिर चट्टानें और बर्फ खिसक सकती हैं. अगर बड़ी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मिट्टी अचानक नीचे गिरने लगे तो इसे हिमस्खलन या चट्टानी मलबे का बहाव कहा जाता है. और अगर यह मलबा किसी नदी या झील में गिर जाए तो इसके बाद एक और खतरनाक स्थिति बन सकती है. नदी में मलबा गिरने के बाद क्या होता है? पहाड़ से आया भारी मलबा नदी और झील के दबाव को बढ़ाने का काम करता है और कभी कभी यह उसके पानी के बहाव को भी रोक देता है. रास्ता रूक जाने पर पानी उसके पीछे जमा होने लगता है. इससे वहां कुछ समय के लिए एक छोटी झील जैसी स्थिति बन सकती है. लेकिन यह कोई पक्का बांध नहीं होता. यह मिट्टी, पत्थर और बर्फ से बना अस्थायी बांध होता है. पानी लगातार जमा होने से उस पर दबाव बढ़ता रहता है. और जब यह अवरोध टूटता है तो पीछे जमा पानी अचानक बहुत तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहता है. पानी के साथ पहले से जमा पत्थर और मलबा भी बहने लगता है. यह स्थिति फ्लैश फ्लड को बेहद खतरनाक बना सकती है. हालांकि किसी खास घटना में वास्तव में यही हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद की जाती है. ये भी पढ़ें: Nepal flood explained : बर्फ के चट्टान, ग्लेशियर झील या बारिश, नेपाल में बाढ़ की क्या है वजह नेपाल में बाढ़ का खतरा ज्यादा क्यों है? नेपाल की भौगोलिक स्थिति इस खतरे को बढ़ाती है. नेपाल का बड़ा हिस्सा पहाड़ों और हिमालयी क्षेत्र में है. यहां ऊंचे पहाड़ों के बीच कई जगह नदियां बहुत संकरी और गहरी घाटियों से होकर गुजरती हैं. जब अचानक बहुत ज्यादा पानी आता है तो उसे फैलने के लिए ज्यादा जगह नहीं मिलती और पानी संकरी घाटी में तेजी से आगे बढ़ता है. इसके अलावा पहाड़ों की ढलान भी काफी तेज होती है. ऊंचाई से नीचे आते समय पानी की रफ्तार बढ़ती जाती है. पहाड़ों के बाढ़ में सिर्फ पानी का ही खतरा नहीं रहता पहाड़ों में बाढ़ के दौरान सबसे बड़ा खतरा सिर्फ पानी नहीं होता. तेज बहाव नदी के किनारे की मिट्टी और चट्टानों को भी काट देता है. इसके कारण पानी के साथ बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आने लगता है. यही मलबा सड़कें बंद कर सकता है, पुलों को नुकसान पहुंचा सकता है और बिजली तथा संचार व्यवस्था को तोड़ सकता है. बचाव दलों के लिए भी ऐसी स्थिति काफी मुश्किल होती है. सड़कें बंद होने पर राहत सामग्री और बचावकर्मी प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पाते. खराब मौसम और पहाड़ी इलाकों में हेलीकॉप्टर उतारने की मुश्किल भी चुनौती बढ़ा देती है. ग्लेशियर झील भी बन सकती है खतरे की वजह हिमालय में अचानक बाढ़ का एक और कारण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, यानी ग्लेशियर झील का अचानक टूटना हो सकता है. ग्लेशियर के पास बर्फ और पत्थरों के बीच पानी जमा होकर झील बना सकता है. अगर इस झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध टूट जाए तो बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है. ऐसी बाढ़ काफी दूर तक असर डाल सकती है और रास्ते में आने वाले गांवों, सड़कों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है. ये भी पढ़ें: ग्लेशियर झील के कारण नेपाल में तबाही! हिंदुस्तान के लिए क्यों है चिंता का संकेत नेपाल की बाढ़ का असर हिंदुस्तान तक क्यों पहुंचता है? नेपाल की कई बड़ी नदियां आगे चलकर हिंदुस्तान में प्रवेश करती हैं. इसलिए नेपाल के पहाड़ी इलाकों में आई बड़ी बाढ़ का असर हिंदुस्तान के मैदानी इलाकों में भी पड़ सकता है. बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इन नदियों का पानी पहुंचता है. अगर ऊपर पहाड़ों में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ता है तो नीचे के इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. यही वजह है कि हिमालय में होने वाली ऐसी घटनाओं पर सिर्फ नेपाल में ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान के निचले इलाकों में भी नजर रखी जाती है. हालांकि हिमालय में आने वाली फ्लैश फ्लड की हर घटना की वजह भूकंप और उसके बाद होने वाली प्रक्रिया हो, यह जरूरी नहीं है. फ्लैश फ्लड की वजह कभी-कभी भारी बारिश, बादल फटने, ग्लेशियल झील टूटने या दूसरे कारण भी हो सकती है. The post हिमालय में भूकंप से कैसे आती है फ्लैश फ्लड, जानिए डेंजर जोन में क्यों रहता है नेपाल appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood: चीन की बारिश बनी नेपाल के लिए आफत, 45 मीटर लंबा मैत्री पुल भी डैमेज

Nepal Flood : NDRRMA ने एक्स पर नेपाल बाढ़ से जुड़ी जानकारी देते हुए बताया, चीन के केरुंग क्षेत्र में भारी बारिश के कारण नदी का बहाव अचानक बढ़ा और रसुवा के भोटेकोशी में बाढ़ आई. बुधवार को सुबह 8:40 बजे बाढ़ की प्रारंभिक सूचना मिली. उसके बाद तेजी से राहत और बचाव कार्य चलाया गया. चीन से नेपाल को जोड़ने वाला मैत्री पुल डैमेज NDRRMA ने बताया, बाढ़ के कारण चीन से नेपाल को जोड़ने वाला 45 मीटर लंबा मैत्री पुल और करीब 10 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है. ये भी पढ़ें: ग्लेशियर झील के कारण नेपाल में तबाही! हिंदुस्तान के लिए क्यों है चिंता का संकेत रसुवागढ़ी क्षेत्र में हिम-चट्टान खिसकने के कारण ल्हेंदे खोल में भारी बाढ़ आई नेपाल प्रशासन की ओर से बताया गया, “नेपाल-चीन सीमा के रसुवागढ़ी क्षेत्र में हिम-चट्टान खिसकने के कारण ल्हेंदे खोल में भारी बाढ़ आई. तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी के रास्ते आई बाढ़ रसुवागढ़ी, टिमुरे और आसपास के क्षेत्रों से होते हुए त्रिशूली नदी में पहुंची. इससे रसुवा, नुवाकोट, धादिङ, गोरखा और चितवन जिलों के नदी तटीय क्षेत्रों में गंभीर स्थिति पैदा हुई.” ये भी पढ़ें: Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ से बिहार और यूपी पर मंडराया खतरा, NDRF की टीम हाई अलर्ट पर ये भी पढ़ें: हिमालय में भूकंप से कैसे आती है फ्लैश फ्लड, जानिए डेंजर जोन में क्यों रहता है नेपाल 35 पुल बाढ़ में बह गए, 45 डैमेज NDRRMA ने बताया, नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कारण 35 पुल बह गए, जबकि 45 पुल डैमेज हो गए. 123 लोगों को बचाया गया भीषण बाढ़ से तबाह नेपाल में अब तक 123 लोगों को बचाया गया है. जिसमें नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर से 88 और सिविल हेलीकॉप्टर से 28 लोगों को रेस्क्यू किया गया. रसुवा: 43 नुवाकोट: 47 धादिङ: 3 ये भी पढ़ें: Nepal Flood Update: नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, अब तक 157 लोगों की मौत, 133 हिंदुस्तानीय सहित 500 लापता, 12 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट डैमेज The post Nepal Flood: चीन की बारिश बनी नेपाल के लिए आफत, 45 मीटर लंबा मैत्री पुल भी डैमेज appeared first on Naya Vichar.

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ग्लेशियर झील के कारण नेपाल में तबाही! भारत के लिए क्यों है चिंता का संकेत

नेपाल के रसुवा जिले में 26 तारीख की सुबह करीब 9 बजे अचानक आई बाढ़ ने हिमालय में बढ़ते एक बड़े खतरे की ओर फिर ध्यान खींचा है. ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों के टूटकर गिरने के बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और देखते ही देखते गांव, सड़कें और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट इसकी चपेट में आ गए. सैकड़ों लोगों के लापता होने की समाचार है. यह घटना इसलिए भी चिंता बढ़ाती है क्योंकि करीब एक साल पहले, जुलाई 2025 में, इसी क्षेत्र के आसपास तिब्बत में एक ग्लेशियर झील फटने के बाद भोटेकोशी नदी में बाढ़ आई थी. उस घटना में भी 9 लोगों की मौत हुई थी. यानी हिमालयी इलाकों में ग्लेशियर, झील और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है. और इसका असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है. हिमालय से निकलने वाली कई नदियां हिंदुस्तान से होकर गुजरती हैं. ऐसे में पहाड़ों पर होने वाला बदलाव नीचे बसे मैदानी इलाकों के लिए भी खतरे का संकेत है. गर्म होता हिमालय बढ़ा रहा है खतरा हिमालय में तापमान बढ़ने का सीधा असर वहां मौजूद ग्लेशियरों पर होता है. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में, जुलाई 2026 में हुई IIT खड़गपुर की एक स्टडी के हवाले से बताया गया कि ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों का तापमान पिछले दो दशकों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है. अब जानकारों की मानें तो तापमान बढ़ने का मतलब सिर्फ ग्लेशियरों का पिघलना नहीं होता है. इससे ग्लेशियरों के आसपास बनने वाली झीलों का आकार भी बढ़ सकता है. इसका मतलब है कि ग्लेशियरों में पिघली हुई बर्फ पानी के रूप में इन झीलों में जमा होती रहती है. इससे झील में पानी की मात्रा बढ़ती जाती है और उसे रोकने वाली बर्फ, मलबे या चट्टानों से बनी प्राकृतिक दीवार पर दबाव बढ़ सकता है. अगर यह प्राकृतिक दीवार किसी वजह से टूट जाती है, तो झील का पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है और इससे बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक ग्लेशियल झीलों को हिमालय में बढ़ते तापमान से जुड़ा एक गंभीर जोखिम मान रहे हैं. अचानक और भारी बाढ़ के भोटे कोशी नदी में उफान के बाद जगह-जगह बिखरा हुआ मलबा GLOF क्या होता है? दरअसल, ऊंचे पहाड़ों में ग्लेशियर के पिघलने से निकलने वाला पानी कई बार किसी जगह जमा होकर झील बना लेता है। इसे ग्लेशियर की झील कहा जाता है. इन झीलों के सामने अक्सर बर्फ, चट्टान और पहाड़ से आया मलबा जमा होकर एक तरह की प्राकृतिक दीवार बना देता है. सामान्य स्थिति में यह दीवार झील के पानी को रोककर रखती है. लेकिन अगर किसी वजह से यह प्राकृतिक बांध टूट जाए, तो जमा पानी अचानक नीचे की ओर बहने लगता है. इसी पूरी घटना को Glacial Lake Outburst Flood यानी GLOF कहा जाता है. इसमें खतरा इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि पानी सिर्फ बहता नहीं है, बल्कि अपने साथ चट्टान, मिट्टी, बर्फ और दूसरे मलबे को भी नीचे ले आता है. इससे नदी का बहाव बेहद तेज हो सकता है और रास्ते में आने वाले पुल, सड़क, घर और दूसरी इमारत तेजी से टूट सकती हैं. ग्लेशियर झील फटने की वजह क्या हो सकती है? ग्लेशियल लेक के अचानक टूटने के पीछे एक नहीं, कई कारण हो सकते हैं. ग्लेशियर का पिघलना बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघलते और छोटे होते हैं. इससे उनका पिघला हुआ पानी आसपास जमा होता रहता है और नई झीलें बन सकती हैं या फिर पहले से मौजूद झीलों का आकार बढ़ सकता है. मतलब की यह बर्फ के पिघलने पर निर्भर है, लेकिन इसको लेकर जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिस तरह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है उस हिसाब से अगले करीब 70 वर्षों में हिमालय-काराकोरम क्षेत्र की लगभग 65 फीसदी बर्फ खत्म हो जाएगी है.  पहाड़ से बर्फ या चट्टान का झील में गिरना दूसरा बड़ा खतरा पहाड़ से अचानक गिरने वाला मलबा है. भूस्खलन या बर्फ के बड़े हिस्से के अचानक गिरने के दौरान बड़ी मात्रा में चट्टान, मिट्टी या बर्फ झील में गिर सकती है. इससे झील में अचानक तेज लहर पैदा होती है, जो झील को रोकने वाली दीवार पर बहुत ज्यादा दबाव डालती है. अगर दबाव ज्यादा हो गया तो वह टूट सकती है और भारी मात्रा में पानी नीचे की तरफ बह सकता है. नेचर की ही एक स्टडी में हिमालय-काराकोरम क्षेत्र में 388 से ज्यादा GLOF घटनाओं का अध्ययन किया गया. इस स्टडी में सामने आया कि बर्फ के बड़े हिस्से के अचानक गिरने को ग्लेशियल झीलों के फटने की सबसे आम वजह है.  भारी बारिश भी बन सकती है वजह कभी-कभी लगातार या बहुत तेज बारिश से झील का पानी तेजी से बढ़ जाता है. ऐसे में जब पानी झील के ऊपर से निकलने लगता है या उस पर दबाव बढ़ाता है, तो उसके टूटने का खतरा पैदा हो जाता है. इसके अलावा भूकंप, पहाड़ों में खुदाई, पेड़ों की कटाई और हाइड्रोपावर जैसी गतिविधियां भी पहाड़ी ढलानों और झीलों के आसपास की मजबूती को प्रभावित कर सकती हैं. क्या GLOF को रोका जा सकता है? अब सवाल ये है कि क्या इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है. इसका जवाब है कि पूरी तरह इस तरह की घटनाओं को रोकना मुश्किल है, लेकिन हां, इसके खतरे को कम जरूर किया जा सकता है. इसके लिए सबसे पहले उन ग्लेशियल झीलों की पहचान जरूरी है, जिनसे नीचे बसे इलाकों को ज्यादा खतरा है. सैटेलाइट तस्वीरों, पुराने रिकॉर्ड और जमीन पर किए जाने वाले सर्वे की मदद से ऐसी झीलों की निगरानी की जा सकती है. हिंदुस्तान में ISRO भी इस तरह की निगरानी में भूमिका निभाता है. इसके बाद संवेदनशील झीलों में पानी का स्तर और प्राकृतिक बांध की स्थिति लगातार मॉनिटर की जा सकती है. रडार और सेंसर जैसी तकनीक इसमें मदद कर सकती हैं. अगर किसी झील को बेहद खतरनाक माना जाता है, तो उसका पानी नियंत्रित तरीके से निकालने के लिए कृत्रिम चैनल या दूसरी इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इन सभी उपायों का एक ही मकसद है कि पानी एक साथ जमा होकर अचानक बाहर न

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Nepal Flood Update: नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, अब तक 95 लोगों की मौत, 133 भारतीय सहित 500 लापता, 12 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट डैमेज

Nepal Flood Live Updated: तिब्बत से लगे नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह अचानक विनाशकारी बाढ़ आई. जिसमें अब तक 95 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 133 हिंदुस्तानीय सहीत 500 लोग लापता हैं. नेपाल बाढ़ से जुड़ी हर जानकारी आपको इस लाइव ब्लॉग में मिलेगी. The post Nepal Flood Update: नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, अब तक 95 लोगों की मौत, 133 हिंदुस्तानीय सहित 500 लापता, 12 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट डैमेज appeared first on Naya Vichar.

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