गोगरी. बच्चों को सुरक्षित माहौल देने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने कदम उठाया है. जिले के स्कूलों में अब विद्यार्थियों को शोषण के खिलाफ आवाज उठाना सिखाया जायेगा. इसके तहत प्रारंभिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जायेगा, जिसमें बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों को भी शामिल किया जायेगा. यह अभियान सूबे के करीब 70 हजार स्कूलों में लागू होगा. प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने सभी जिलों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं. निर्देश के अनुसार कक्षा पहली से पांचवीं और छठी से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अलग-अलग ग्रुप में प्रशिक्षण दिया जायेगा.. छठी से 12वीं तक के छात्रों के लिए 40 से 50 विद्यार्थियों का एक ग्रुप बनाया जायेगा, जिसमें उन्हें बाल संरक्षण से जुड़े नियम, कानूनी अधिकार और शोषण के विभिन्न रूपों की जानकारी दी जायेगी. बच्चों को जागरूक करने के लिए नाटक का सहारा कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों को जागरूक करने के लिए नाटक, शॉर्ट फिल्म और गेम का सहारा लिया जायेगा. स्पोर्ट्स-स्पोर्ट्स में बच्चों को गुड टच और बैड टच का फर्क समझाया जायेगा. साथ ही उन्हें यह भी बताया जायेगा कि किस तरह के व्यवहार को गलत मानना है और ऐसी स्थिति में तुरंत अपने अभिभावकों या शिक्षकों को सूचना देनी है. इस अभियान में स्कूल के शिक्षकों और अन्य कर्मियों की भी सक्रिय भागीदारी होगी. चयनित संस्थाओं के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि बच्चों प्रभावी तरीके से संदेश पहुंच सके. समग्र शिक्षा के डीपीओ शिवम ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा हमारा सर्वोच्च प्राथमिकता है. यह अभियान बच्चों को न सिर्फ जागरूक करेगा, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास भी देगा कि किसी भी गलत व्यवहार का विरोध कैसे करना है. अभिभावकों और शिक्षकों की सहभागिता से यह प्रयास और मजबूत होगा.
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