Hemant Soren, रांची, (सुनील चौधरी की रिपोर्ट): झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने शनिवार को असम के मजबत और रांगापाड़ा विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी जनसभाओं को संबोधित किया. आगामी 9 अप्रैल को होने वाले एक दिवसीय मतदान के मद्देनजर उन्होंने झामुमो प्रत्याशियों के समर्थन में जनता से वोट की अपील की. साथ ही क्षेत्र की वर्तमान नेतृत्वक व सामाजिक स्थिति पर तीखा प्रहार किया. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से चाय बागान श्रमिकों और किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि ये लोग ही असम की वित्तीय स्थिति की असली रीढ़ हैं, लेकिन विडंबना यह है कि दशकों की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद भी उन्हें वह सम्मान और संवैधानिक अधिकार नहीं मिला, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं.
बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे श्रमिक परिवार
चाय बागान क्षेत्रों का दौरा करने के बाद अपनी चिंता व्यक्त करते हुए सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि इन सुदूरवर्ती इलाकों में आज भी बिजली, पक्की सड़क और प्रधानमंत्री आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. उन्होंने श्रमिक परिवारों की दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि लोगों ने अपनी समस्याओं और भविष्य की उम्मीदों को उनसे साझा किया है. मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जो लोग देश और दुनिया के लोगों के लिए चाय का उत्पादन करते हैं, उनके खुद के जीवन में विकास की रोशनी अब तक क्यों नहीं पहुंची?
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एकजुटता और जागरूक मतदान का आह्वान
हेमंत सोरेन ने किसान, मजदूर और आदिवासी समाज को एक मंच पर आने की सलाह देते हुए कहा कि एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे केवल चुनावी वादों और नारों के बहकावे में न आएं, बल्कि अपनी वर्तमान बदहाली और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर अपने मताधिकार का उपयोग करें. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जागरूक मतदाता का सही निर्णय ही व्यवस्था परिवर्तन का आधार बनता है, इसलिए समाज के हर वर्ग को संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी.
विभाजन की नेतृत्व के खिलाफ सामाजिक सौहार्द पर जोर
अपने संबोधन के अंतिम चरण में, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने समाज में आपसी भाईचारा और शांति बनाए रखने पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा ‘विभाजन की नेतृत्व’ है, जो समुदायों को आपस में लड़ाकर असली मुद्दों से भटकाने का काम करती है. उन्होंने मतदाताओं को आगाह किया कि बेहतर भविष्य के लिए सभी समुदायों को मिलकर आगे बढ़ना होगा और ऐसी ताकतों को नकारना होगा जो विकास के बजाय द्वेष को बढ़ावा देती हैं. झामुमो के इस चुनावी अभियान ने असम के टी ट्राइब बेल्ट में नेतृत्वक हलचल को और तेज कर दिया है.
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