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आधार सेंटर की कमी, कार्ड में सुधार या नया बनवाने में करना पड़ रहा घंटों इंतजार

फोटो 1 आधार में सुधर को ले लगी भीड़ 2. गोद में 11 माह के शिशु के साथ आयी ज्योति 3 अपनी 3 वर्षीय बेटी अनाया यादव के साथ आये अरविंद यादव 4. अपनी 5 साल की बेटी के साथ सुनीता देवी कड़ाके की ठंड में सुबह पांच बजे से लग रही लंबी लाइन, शिशु-बुजुर्ग बेहाल आधार सेंटरों की कमी से लोग ठंड में घंटों लाइन ठिठुरने को विवश रोजाना सैकड़ों लोग काम नहीं होने से निराश होकर लौटने को मजबूर भभुआ शहर. आधार कार्ड आज लगभग हर प्रशासनी व कई निजी सेवाओं के लिए अनिवार्य हो गया है. राशन कार्ड, पेंशन, छात्रवृत्ति, किसान सम्मान निधि, बैंक खाता, मोबाइल सिम, स्कूल में नामांकन सहित अन्य कई योजनाओं के लिए आधार जरूरी हो गया है. ऐसे में आधार में जरा-सी गलती या अपडेट की जरूरत लोगों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है. खासकर ग्रामीण व पहाड़ी इलाकों के लोगों को आधार सेंटर तक पहुंचने में ही कई घंटे लग जाते हैं. दूसरी ओर जिले में पर्याप्त आधार सेंटर की व्यवस्था नहीं होने के कारण आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आधार में सुधार, बायोमेट्रिक अपडेट, मोबाइल नंबर बदलवाने व नया आधार बनवाने के लिए लोग दूर-दराज के गांवों, पहाड़ी व दुर्गम इलाकों से भभुआ पहुंचते हैं, लेकिन सेंटर कम रहने से घंटों लाइन में इंतजार करना पड़ता है. हालत यह है कि कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग सुबह पांच बजे से ही लाइन में खड़े हो जाते हैं. ठंड से ठिठुरते छोटे-छोटे शिशु, स्त्रीएं व बुजुर्ग पूरे दिन इंतजार करते नजर आते हैं. इसके बावजूद कई लोगों का काम उसी दिन नहीं हो पाता है. इसके बाद आधार सेंटर आने व लाइन लगाने का सिलसिला कई दिनों तक चलता है, तब जाकर कहीं लोगों का कार्य पूरा हो पाता है. शनिवार को भी देखा गया कि सुबह के अंधेरे में ही पोस्ट ऑफिस व भगवानपुर स्थित आधार सेंटरों के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गयी थी. लोगों का कहना है कि यदि थोड़ी भी देर हो जाये तो नंबर लग पाना मुश्किल हो जाता है. मजबूरी में लोग तड़के घर से निकल पड़ते हैं. कई लोग तो रात में ही गांव से चलकर भभुआ पहुंचते हैं, ताकि सुबह सबसे पहले लाइन में जगह मिल सके. ठंड इतनी अधिक है कि लोग ऊनी कपड़ों, शॉल व कंबलों में लिपटे हुए आते हैं. लंबे समय तक खुले में खड़े रहना आसान नहीं होता. सीमित काउंटर व कर्मचारियों की कमी के कारण रोजाना सैकड़ों लोग काम नहीं होने से निराश होकर लौटने को मजबूर हो जाते हैं. कई लोगों ने बताया कि वे तीसरी या चौथी बार सेंटर आये हैं, फिर भी काम नहीं हो पाया है, जिससे समय व पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है. पंचायत स्तर पर अतिरिक्त आधार सेंटर खोलने की मांग इधर, कड़ाके की ठंड में लाइन में खड़े लोगों के लिए न तो बैठने की समुचित व्यवस्था दिखी और न ही ठंड से बचाव का कोई विशेष इंतजाम. स्त्रीएं छोटे बच्चों को गोद में लिए घंटों लाइन में खड़ी देखी गयीं. कई बार बुजुर्गों को सहारा देने वाला भी कोई नहीं होता है. कुछ लोग ठंड व थकान के कारण बीच में ही लाइन छोड़कर लौट जाते हैं. लोगों ने मांग की है कि क्षेत्रों, पंचायतों व प्रखंड स्तर पर अतिरिक्त आधार सेंटर खोले जायें, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके. – आधार सेंटरों पर आने लोगों की पीड़ा — बंजारिया गांव से आयी ज्योति अपने गोद में 11 माह के शिशु को लिए सुबह 8 बजे लाइन में खड़ी थी. शिशु को ठंड से बचाने के लिए उन्होंने उसे शॉल में लपेट रखा था. पूछे जाने पर बताया कि दो दिनों से आधार कार्ड में सुधार के लिए चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार भीड़ ज्यादा होने के कारण उनका नंबर नहीं आ पाया. आज इसलिए बहुत सुबह आ गयी हूं, ताकि किसी तरह आज मेरा नंबर आ जाये. शिशु को लेकर ठंड में खड़े रहना बहुत मुश्किल है, लेकिन विवशता है. आधार के बिना कई काम अटके हुए हैं. — पोस्ट ऑफिस गेट के सामने अरविंद यादव जो अपनी बेटी अनाया यादव का आधार बनवाने पहुंचे थे. कहते हैं सुबह सात बजे से ही लाइन में लगे हैं. बच्चों का आधार स्कूल, प्रशासनी योजनाओं व अन्य कामों के लिए जरूरी हो गया है. मजबूरी में इतनी ठंड में भी बच्ची को लेकर आना पड़ा है. — धड़निया गांव से आये 65 वर्षीय बब्बन राम ने बताया उम्र हो गयी है, ठंड भी बहुत लगती है, फिर भी मजबूरी है. छह बजे से लाइन में खड़ा बानी. आपन उंगली के पहचान करावल जरूरी है, ताकि पेंशन और अन्य प्रशासनी लाभ समय पर मिल जाये. आधार अपडेट नहीं होइ त पेंशन रुक जायी. भीड़ देख डर लग रहल बा कि आज काम होई भी कि नाहीं. — पहाड़ी क्षेत्र से आये 70 वर्षीय लालमुनि राम कहते हैं सुबह पांच बजे ही बस पकड़ कर भभुआ पहुंचे हैं. छह बजे से ही लाइन में लगे हैं. आधार कार्ड में मोबाइल नंबर बदलवाना है, क्योंकि किसान रजिस्ट्रेशन और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के लिए मोबाइल नंबर का अपडेट रहना जरूरी है. ठंड बहुत है, पैरों में जान नहीं बची है, लेकिन क्या करें. अगर आधार में मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होगा तो किसान रजिस्ट्रेशन नहीं हो पायेगा और प्रशासनी लाभ भी नहीं मिलेगा. — खालसपुर गांव से आयी सुनीता देवी ने बताया कि वह अपनी पांच साल की बेटी और 65 वर्षीय सास के साथ सुबह छह बजे से लाइन में खड़ी है. एक ही सेंटर होने के वजह से यहां बहुत भीड़ हो जाती है. शिशु और बुजुर्ग दोनों को लेकर आना बहुत कठिन है, लेकिन आधार से जुड़े काम टाल भी नहीं सकते.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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