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ईरान की बढ़ी टेंशन: ट्रंप के साथ आए 5 ताकतवर देश, होर्मुज में भेजेंगे अपने जंगी जहाज

Trump Hormuz Coalition: ट्रंप ने साफ-साफ उन देशों के नाम लिए हैं जिनसे उन्हें इस मिशन में मदद की उम्मीद है. इनमें चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम (UK) शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ये वो देश हैं जिन पर इस रास्ते के बंद होने का सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ रहा है. ट्रंप के मुताबिक, ये देश अमेरिका के साथ मिलकर एक ‘टीम एफर्ट’ करेंगे ताकि इस समुद्री रास्ते को फिर से सुरक्षित और खुला रखा जा सके. उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान भले ही कमजोर हो गया हो, लेकिन वह अभी भी ड्रोन, समुद्री माइन्स और मिसाइलों से जहाजों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है.

ईरान का पलटवार, कहा- अमेरिका झूठ बोल रहा है

ट्रंप के इस दावे पर ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के नेवी चीफ अलीरेजा तंगसिरी ने X (ट्विटर) पर लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी पूरी तरह बंद नहीं है, बल्कि सिर्फ उनके कंट्रोल में है. उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले तो ईरान की नेवी खत्म करने का झूठा दावा करता है और अब खुद डरकर दूसरे देशों से मदद मांग रहा है. वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया कि यह रास्ता सिर्फ उनके दुश्मनों के जहाजों के लिए बंद है, सबके लिए नहीं.

हिंदुस्तान और तुर्की को मिली खास छूट

इस तनाव के बीच हिंदुस्तान के लिए राहत भरी समाचार आई. हिंदुस्तान के दो एलपीजी (LPG) टैंकर (शिवालिक और नंदा देवी) शनिवार सुबह सुरक्षित इस रास्ते से गुजरे. मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद हिंदुस्तान को यह खास छूट मिली है. इसी तरह तुर्की के एक जहाज को भी रास्ता दिया गया है, जबकि उसके 14 और जहाज अभी परमिशन का इंतजार कर रहे हैं.

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दुनिया पर मंडराया बड़ा खतरा

होर्मुज का रास्ता बंद होने से दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों और तेल की कमी हो सकती है. ‘सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज’ के अनुसार, इस रास्ते से खाद बनाने वाली गैस सप्लाई होती है. अगर यह ज्यादा दिन बंद रहा, तो खेती और खाने की सप्लाई चैन टूट जाएगी. संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी टॉम फ्लेचर ने भी चेतावनी दी है कि अगर मानवीय मदद वाले जहाज नहीं निकले, तो करोड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है.

क्या काम आएगा ट्रंप का ‘प्लान-B’?

अल जजीरा में छपी समाचार के मुताबिक, मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट एंड्रियास क्रिग का कहना है कि ट्रंप का यह गठबंधन वाला आइडिया असल में किसी ठोस प्लान की कमी को छिपाने की कोशिश है. अमेरिका के पास हॉर्मुज को तुरंत खुलवाने का कोई जादुई तरीका नहीं है. वहीं, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि पेंटागन हालात से निपट रहा है और डरने की जरूरत नहीं है. फिलहाल, 2,500 अमेरिकी मरीन्स और ‘USS त्रिपोली’ युद्धपोत इस इलाके की तरफ रवाना हो चुके हैं. इससे पहले, दो अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट में तैनात है. युद्ध में अब तक ईरान में 1,444 लोग मारे जा चुके हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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