Iran War Tucker Carlson: अमेरिकी राष्ट्रपति के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक टकर कार्लसन अब मुश्किल में फंस गए हैं. कार्लसन ने दावा किया है कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने ईरान के साथ युद्ध से पहले उनके टेक्स्ट मैसेज पढ़े, ताकि उन्हें विदेशी एजेंट के रूप में फंसाया जा सके. उनका कहा है कि अमेरिकी प्रशासन उनके खिलाफ विदेशी एजेंट से जुड़े कानून के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर सकती है. उन्होंने इस घटना के बारे में अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया.
सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कार्लसन ने कहा, ‘सीआईए मेरे खिलाफ किसी तरह का आपराधिक रेफरल तैयार कर रही है, यानी मेरे द्वारा कथित तौर पर किए गए अपराध के आधार पर न्याय विभाग को एक क्राइम रिपोर्ट भेजी जा रही है.’ कार्लसन ने आगे कहा, ‘अपराध क्या है? युद्ध से पहले ईरान में लोगों से बात करना. उन्होंने (सीआईए) मेरे टेक्स्ट मैसेज पढ़े.’
कार्लसन ने दावा किया कि उनके खिलाफ फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1938 के तहत मामला दर्ज करने की तैयारी है. यह कानून उन लोगों को न्याय विभाग में पंजीकरण कराने के लिए बाध्य करता है जो विदेशी प्रशासनों से लॉबिंग या नेतृत्वक प्रचार के लिए भुगतान लेते हैं.
कार्लसन ने यह भी संकेत दिया कि उनकी इजरायल और ईरान युद्ध पर राय के कारण कुछ खुफिया अधिकारी उन्हें निशाना बना रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खुफिया एजेंसियां कभी-कभी निगरानी के वारंट हासिल करने के लिए शिकायतों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेज देती हैं.
When you discover the CIA has been reading your texts in order to frame you for a crime. pic.twitter.com/XgoluHw8EG
— Tucker Carlson (@TuckerCarlson) March 14, 2026
कौन हैं टकर कार्लसन?
56 वर्षीय टकर कार्लसन एक अमेरिकी टेलीविजन कमेंटेटर और नेतृत्वक होस्ट हैं. वह पहले फॉक्स न्यूज के प्रमुख एंकर रह चुके हैं. कार्लसन पहले राष्ट्रपति ट्रंप के मजबूत समर्थक रहे हैं. लेकिन ट्रंप से कुछ मुद्दों पर मतभेद होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने कार्यक्रम और वीडियो शुरू किए. कार्लसन अमेरिका की नेतृत्व, विदेश नीति और मीडिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं.
ट्रंप ने 9 जनवरी को व्हाइट हाउस में तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ एक लंच के दौरान कार्लसन को ‘बहुत रूढ़िवादी और बहुत अच्छा व्यक्ति’ बताया था. कार्लसन ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई शुरू होने से पहले कई बार व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी. जबकि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी.
माना जाता है कि उनकी आखिरी मुलाकात 23 फरवरी को हुई थी, जो इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी के साथ उनके विवादित इंटरव्यू के तुरंत बाद हुई थी. उस मुलाकात के समय को लेकर अटकलें लगाई गईं कि व्हाइट हाउस में ट्रंप ने कार्लसन को कड़ी फटकार लगाई थी.
अमेरिका और इजरायल की ईरान युद्ध को लेकर आलोचना की
हाल के हफ्तों में उन्होंने ईरान पर हुए हमलों को लेकर अमेरिका और इजरायल की आलोचना की है. जुलाई 2025 में कार्लसन की आलोचना हुई थी जब उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का इंटरव्यू लिया था. आलोचकों का कहना था कि इससे इस्लामिक रिपब्लिक के प्रतिनिधि को वैश्विक मंच मिला और उन्हें पर्याप्त चुनौती नहीं दी गई.
कार्लसन पर पहले भी यह आरोप लग चुका है कि उन्होंने यहूदी विरोधी साजिश सिद्धांतों को बढ़ावा दिया. उन्होंने उस सैन्य कार्रवाई को, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हुई थी, ‘पूरी तरह घृणित और बुरा’ बताया था और कहा था कि यह युद्ध इजरायल की ओर से लड़ा जा रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ आलोचकों ने यह तक आरोप लगाया कि कार्लसन को कतर से आर्थिक समर्थन मिलता है. हालांकि कार्लसन ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया है.
कार्लसन ने आरोपों से किया इनकार
कार्लसन ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा, ‘मैं किसी विदेशी ताकत का एजेंट नहीं हूं. मेरी केवल एक ही निष्ठा है और वह संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रति है, और मैंने कभी इसके खिलाफ काम नहीं किया.’ उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी विदेशी प्रशासन से पैसा नहीं लिया. उन्होंने कहा, ‘मुझे इसकी जरूरत नहीं है और मैं इसे चाहता भी नहीं हूं.’
कार्लसन ने कहा कि एक अमेरिकी नागरिक होने के नाते उन्हें अन्य देशों के लोगों से बात करने का अधिकार है. ‘कानूनी तौर पर मुझे लगता है कि यह मामला हास्यास्पद है और मुझे नहीं लगता कि यह वास्तव में केस बनेगा.’
हिंदुस्तान से संबंध बढ़ा रहा इजरायल
हाल ही में कार्लसन ने इजरायल के ऊपर आरोप लगाया था कि वह अब हिंदुस्तान के साथ संबंध बढ़ा रहा है. यह बात उन्होंने तब कही थी, जब पिछले महीने पीएम मोदी इजरायल गए थे. उन्होंने कहा कि इजरायल का अमेरिका में समर्थन कम हो रहा है, तो उसे एक मजबूत साझेदार चाहिए, इसलिए वह इंडिया के पाले में जा रहा है.
.@TuckerCarlson has lost it. Modi addressing Israeli Parliament will not go well with adversaries of Israel. Guess the name Qatarlason is apt! https://t.co/9rXMAC4NWa
— Rohit Sharma 🇺🇸🇮🇳 (@DcWalaDesi) February 27, 2026
ट्रंप ने भी कार्लसन की आलोचना की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल के हफ्तों में ईरान संघर्ष पर कार्लसन की टिप्पणियों की आलोचना की है. 5 मार्च को एबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ‘टकर रास्ता भटक गए हैं. मुझे यह बहुत पहले से पता था और वह MAGA का हिस्सा नहीं हैं.’ ट्रंप ने कहा, ‘MAGA हमारे देश को बचा रहा है. MAGA हमारे देश को फिर महान बना रहा है. MAGA का मतलब अमेरिका फर्स्ट है, और टकर इनमें से कुछ भी नहीं हैं. और टकर इतने समझदार भी नहीं हैं कि इसे समझ सकें.’
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कार्लसन ने यह भी दावा किया कि युद्ध के समय खुफिया एजेंसियां अक्सर अमेरिकी नागरिकों पर ज्यादा नजर रखती हैं. उन्होंने कहा, ‘युद्ध के दौरान देश आमतौर पर ज्यादा अधिनायकवादी हो जाते हैं. असहमति के लिए सहनशीलता बहुत कम हो जाती है.’
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