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कोयला चोरी से जुड़ रहे महिलाएं व बच्चे जब तब कर देते हैं पहरेदारों पर हमला

आसनसोल/जामुड़िया.

इसीएल के विभिन्न कोयला खदानों में चोरी की घटना आम है. लगभग सभी खदानों में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग प्रवेश करते हैं और कोयला उठा कर चल देते हैं. बाधा देने या अड़ंगा लगाने पर सुरक्षाकर्मियों से उलझने में भी उन्हें गुरेज नहीं होता. मशीनों में तोड़फोड़ करना आम बात है, जिसे लेकर आखिरकार कोलियरी प्रबंधन ने प्राथमिकी दर्ज करायी. जामुड़िया थाना क्षेत्र में इसीएल के नॉर्थ सियारसोल ओसीपी के प्रबंधन यशवंत कुमार अतुलकर ने अपनी शिकायत में गंभीर आरोप लगाया. कहा कि भारी संख्या में स्त्रीएं व शिशु कोयला चोरी में शामिल हो रहे हैं. शिकायत के आधार पर जामुड़िया थाना में केस नंबर 201/25 में 329(3)/303(2)/351(2)/324(4)/3(5) और 21 एमएमडीआर एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी. गौरतलब है कि शिल्पांचल में अवैध कोयला कारोबार के साथ भारी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं. किसी भी कोयला खदान में देर रात 2:00 बजे से भोर 5:00 बजे तक अलिखित तौर पर कोयला लूटने की छूट रहती है. खदान से चुराया हुआ कोयला विभिन्न माध्यमों से होकर कारखानों में पहुंचता है. इस नेटवर्क की कड़ी में ऊपर से लेकर नीचे तक काफी लोग जुड़े हुए हैं. इसे रोकना कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. कंपनी की कोशिश यही रहती है कि खनन किये हुए कोयले की चोरी ना हो. हालांकि सैकड़ों की संख्या में जब कोयला चोर खदान में दाखिल होते हैं, तो कहां से कोयला ले जायेंगे, यह उन पर निर्भर करता है. उन्हें रोकने या बाधा देने पर वे लोग आक्रामक या हिंसक हो जाते हैं और सुरक्षाकर्मियों पर ही हमला कर देते हैं.

ऐसी दर्जनों घटनाओं को लेकर प्राथमिकी थानों में दर्ज है, जहां कोयला चोरों ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया और वाहनों में तोड़फोड़ की. जिसमें अनेकों सुरक्षा कर्मी घायल भी हुए हैं. जामुड़िया इलाके में कोयला चोरी रोकने को लेकर सुरक्षा एजेंसियां काफी एक्टिव है. लगभग हर दिन ही छापेमारी होती है और अवैध कोयला लदे वाहनों को पकड़ा जाता है और प्राथमिकी दर्ज होती है.

कोयला चोरी में बच्चों की लिप्तता चिंताजनक

कोयला चोरी में स्त्रीओं की भगीदारी बढ़-चढ़कर होती है. किसी भी खदान इलाके में भोर पांच बजे जाने पर मेला जैसा नजारा दिखना आम बात है. सैकड़ों की संख्या में स्त्रीएं कोयला बेचती हुई दिखेंगी. सब्जी मंडी की तरह कोयला मंडी लगती है. जहां से कोयला कारोबारी उसे खरीदकर एक जगह जमा करते हैं, फिर उसे गाड़ियों से जहां भेजना होता है भेजते हैं. खदानों में अनेकों बार दुर्घटना में इनलोगों की मौत भी होती है, जिसकी आधिकारिक सूचना किसी के पास नहीं होती. कोयला माफिया इनके शवों को गायब कर देते हैं. मरनेवाले के घर के सदस्य भी इस मौत पर चुप्पी साध लेते हैं. खदान से कोयला चोरी करके ये लोग प्रतिदिन पांच सौ से सात सौ रुपये तक कमाते हैं, जिनसे इनका परिवार चलता है. इस चोरी में बच्चों की संलिप्तता की बात पहली बार सामने आयी है. जो सबसे ज्यादा चिंता का विषय बन गया है. सियारसोल ओसीपी के प्रबंधक श्री अतुलकर ने अपनी शिकायत में कहा कि लंबे समय से स्थानीय बदमाश, जिसमें भारी संख्या में स्त्री व शिशु शामिल होते हैं, ये लोग हायर्ड पैच-4 में कोयला चोरी करने के लिए घुसते हैं. ये लोग पोस्ट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के प्रति काफी आक्रमक हो जाते हैं और उन्हें निशाना बनाकर पथराव करते हैं, मशीनों को नुकसान पहुंचाते हैं और जबरन कोयला ले जाते हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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