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कौन है मुठभेड़ में ढेर हुआ नक्सली अनल दा? माओवादी संगठन का माना जाता था बड़ा रणनीतिकार

Jharkhand Naxal News, चाईबासा : झारखंड के चाईबासा स्थित सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) संगठन के सीनियर पद पर बैठे अनल दा मारा गया. उन पर प्रशासन ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. उसकी मौत को झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को लगाम लगाने की दिशा में बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है. मुठभेड़ के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है. सुरक्षाबलों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में अब भी तलाशी अभियान जारी है, ताकि किसी अन्य नक्सली की मौजूदगी की आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके.

कई नामों से जाना जाता था अनल दा

मारे गए नक्सली नेता का असली नाम पतिराम था. लेकिन वह अपने संगठन में अनल दा, तूफान, रमेश और गोपाल दा जैसे कई नामों से जाना जाता था. वह गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र का रहने वाला था और भाकपा माओवादी की केंद्रीय कमेटी का अहम सदस्य माना जाता था.

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माओवादी संगठन का बड़ा रणनीतिकार

अनल दा को माओवादी संगठन का बड़ा रणनीतिकार माना जाता था. नक्सली हमले कहां और कैसे करना है? इसकी प्लानिंग वही तैयार करता था. इसी वजह से वह लंबे समय से सुरक्षाबलों की हिट लिस्ट में शामिल था.

1987 से नक्सली गतिविधियों में था सक्रिय

अनल दा करीब 1987 से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था. उसने पीरटांड़ इलाके से अपने नेटवर्क की शुरुआत की और धीरे-धीरे झारखंड और बिहार के कई जिलों में संगठन का विस्तार किया. 1987 से 2000 के बीच पीरटांड़, टुंडी और तोपचांद क्षेत्रों में वह गोपाल दा के नाम से काफी प्रभावशाली हो गया था. उस दौर में इन इलाकों में नक्सलवाद चरम पर था और पुलिस के साथ-साथ ग्रामीण भी उससे खौफ खाते थे.

जेल गया, फिर दोबारा नक्सली गतिविधियों में हुआ एक्टिव

साल 2000 में संगठन ने उसे बिहार के जमुई भेजा था. वहां वह एक बार गिरफ्तार हुआ और बाद में गिरिडीह जेल लाया गया. जमानत पर बाहर आने के बाद उसने फिर से नक्सली गतिविधियां शुरू कर दीं. जेल से बाहर आने के बाद उसकी पकड़ संगठन में और मजबूत हो गयी.

रांची और गुमला की कमान संभाली

जेल से रिहा होने के बाद अनल दा को रांची और गुमला जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई. यहां उसने संगठन को नए सिरे से मजबूत किया. उसकी रणनीतिक समझ और संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए उसे भाकपा माओवादी की केंद्रीय कमेटी में शामिल किया गया.

झारखंड में नक्सली हिंसा का अहम चेहरा

जानकारों के अनुसार, झारखंड में नक्सली हिंसा के पीछे अनल दा की बड़ी भूमिका रही है. उसकी मौत से माओवादी संगठन को गहरा झटका लगा है. माना जा रहा है कि इससे झारखंड में नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और सुरक्षाबलों का मनोबल और मजबूत होगा.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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