Freebies : सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु बिजली बोर्ड को उपभोक्ता की वित्तीय स्थिति पर गौर किए बिना हर किसी को मुफ्त बिजली देने का वादा करने के लिए फटकार लगाई. कोर्ट ने राज्यों द्वारा अपनाई जा रही नि:शुल्क सेवा संस्कृति की कड़ी आलोचना की. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि यह विकास में बाधा डालती है.
कोर्ट ने कहा कि केवल फ्रीबीज बांटने के बजाय पार्टियों को ऐसी योजनाएं बनानी चाहिए जो लोगों की जिंदगी बेहतर करें, जैसे बेरोजगारी दूर करने की योजनाएं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह संसाधन बांटने से देश के आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य पहले से घाटे में चल रहे हैं, तो फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों दी जा रही हैं. उन्होंने कहा कि सालाना आय का 25 प्रतिशत विकास कार्यों में क्यों नहीं लगाया जाता.
The Supreme Court has strongly criticised the distribution of “freebies” by political parties of all states and expressed concern over its impact on public finances.
The Court has said that instead of distributing resources by freebie schemes, the political parties should come… pic.twitter.com/VdoC1p4XbE
— ANI (@ANI) February 19, 2026
प्रशासनें बजट में स्पष्ट प्रस्ताव और खर्च का कारण बताएं : सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने साफ किया कि यह मामला किसी एक राज्य का नहीं, बल्कि सभी राज्यों का है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि प्रशासनें बजट में स्पष्ट प्रस्ताव और खर्च का कारण बताएं.
रोजगार के अवसर खोलने के लिए काम करना चाहिए प्रशासन को : सुप्रीम कोर्ट
द्रमुक प्रशासन की मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने कहा कि राज्यों को सभी को मुफ्त भोजन, साइकिल और बिजली देने के बजाय रोजगार के अवसर खोलने के लिए काम करना चाहिए.
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