RSS Chief Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- अगर संघ उन्हें पद से हटने के लिए कहेगा तो वह इस्तीफा दे देंगे. इस संगठन ने ही उनसे उनकी उम्र के बावजूद काम जारी रखने के लिए कहा है. वह आरएसएस शताब्दी समारोह में प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे. भागवत ने कहा- आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए. उन्होंने कहा, मैंने 75 वर्ष पूरे कर लिए और मैंने आरएसएस को इसकी सूचना भी दे दी थी, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा. जब भी आरएसएस मुझसे पद छोड़ने को कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा लेकिन काम से सेवानिवृत्ति कभी नहीं होगी.
संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा : भागवत
भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा. उन्होंने कहा, आरएसएस प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता. क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं. भागवत ने कहा कि आरएसएस में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर पदोन्नति पाते हैं.
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: RSS Chief Mohan Bhagwat says, “… As far as I am concerned, when my 75 years were completed, I told the workers, but they said, “What has happened to you? You are roaming around, do the work…” I am here; this is not my wish. If I am not here; this… pic.twitter.com/MHJ0ezqPyg
— ANI (@ANI) February 8, 2026
संघ के अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण ही क्यों थे? भागवत ने दिया जवाब
संघ प्रमुख ने बताया कि जब आरएसएस की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था.
संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से होगा या नहीं? भागवत ने क्या दिया जवाब
भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा, अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं सबसे योग्य उम्मीदवार के मानदंड को अपनाता. जब मुझे आरएसएस प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे. मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था.
अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं : भागवत
संघ प्रमुख ने कहा- अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है. आरएसएस प्रमुख ने कहा कि परिस्थितियां सहायक या प्रतिकूल हो सकती हैं और उन पर अत्यधिक ध्यान देने की कोई आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा, हमें समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए. जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, भ्रम बना रहता है.
प्रचार से प्रसिद्धि तो मिलती है, लेकिन अहंकार आ जाता है : भागवत
भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है और उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो. उन्होंने कहा कि संघ का काम संस्कारों को बढ़ावा देना है, न कि चुनाव प्रचार करना. उन्होंने कहा, हम अपने प्रचार-प्रसार में पिछड़ गए हैं. अत्यधिक प्रचार से प्रसिद्धि तो मिलती है, लेकिन फिर अहंकार भी आ जाता है. इससे बचना जरूरी है. प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए, यानी समय और मात्रा दोनों में उचित होना चाहिए. उन्होंने कहा कि आरएसएस जनसंपर्क अभियान चला रहा है.
आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी कभी भी संचार का माध्यम नहीं होगी : भागवत
भागवत ने कहा कि आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी कभी भी संचार का माध्यम नहीं होगी क्योंकि यह हिंदुस्तानीय भाषा नहीं है. उन्होंने कहा, हम हिंदुस्तानीयों के साथ काम करना चाहते हैं. जहां भी अंग्रेजी आवश्यक होगी, हम उसका उपयोग करेंगे. हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है. संघ प्रमुख ने कहा कि लोगों को इस तरह से अंग्रेजी बोलनी आनी चाहिए कि अंग्रेजी भाषी लोग उसे सुनना चाहें. भागवत ने कहा, हमें अंग्रेजी में महारत हासिल करनी चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मातृभाषा को भूल जाएं.
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