Credit Card Fees: क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों हिंदुस्तानीयों के लिए यह समाचार बेहद जरूरी है. अगर आप सिर्फ ‘मिनिमम ड्यू’ भरकर निश्चिंत हो जाते हैं, तो आप भारी वित्तीय मुसीबत में फंस सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला ब्याज किसी भी अन्य लोन के मुकाबले सबसे ज्यादा होता है.
इन 7 चार्जेस पर रखें नजर
- भारी भरकम ब्याज (Interest Rate): अगर आप बिल का पूरा भुगतान नहीं करते, तो बची हुई राशि पर 30 से 45 प्रतिशत सालाना ब्याज लगता है. प्रोफेसर संजीत सिंह के मुताबिक, लोग सोचते हैं कि ब्याज सिर्फ बकाया पर लगेगा, लेकिन असल में बैंक आपकी नई खरीदारी पर भी उसी दिन से ब्याज वसूलना शुरू कर देते हैं.
- लेट पेमेंट फीस (Late Payment Fee): तय तारीख (Due Date) निकल जाने पर बैंक ₹500 से ₹1500 तक की भारी पेनल्टी लगाते हैं. इससे न सिर्फ आपका बिल बढ़ता है, बल्कि आपका क्रेडिट स्कोर भी खराब होता है.
- कैश निकालने की गलती (Cash Advance Fee): क्रेडिट कार्ड से एटीएम से पैसे निकालना सबसे महंगा सौदा है. इस पर कोई ‘फ्री पीरियड’ नहीं मिलता और पहले ही दिन से 48% सालाना तक का ब्याज लगना शुरू हो जाता है.
- ओवर लिमिट फीस (Over Limit Fee): अगर आपकी लिमिट 1 लाख है और आपने गलती से 1 लाख 5 हजार खर्च कर दिए, तो बैंक इस ‘ओवर लिमिट’ के लिए आपसे भारी फीस (अमूमन ₹500 या खर्च का एक हिस्सा) वसूलता है. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अपनी लिमिट का केवल 30% ही इस्तेमाल करें.
- विदेशी मुद्रा लेनदेन (Forex Markup Fee): अगर आप विदेश यात्रा पर हैं या किसी विदेशी वेबसाइट से खरीदारी कर रहे हैं, तो बैंक 2% से 3.5% तक कनवर्जन चार्ज वसूलते हैं.
- EMI कन्वर्जन के पीछे का स्पोर्ट्स: बड़ी खरीदारी को ईएमआई में बदलना आसान लगता है, लेकिन इसमें ‘प्रोसेसिंग फीस’ और ‘GST’ छिपे होते हैं. ईएमआई चुनने से पहले हमेशा ब्याज दरों की तुलना पर्सनल लोन से जरूर करें.
- सालाना और रिन्यूवल फीस: कई कार्ड ‘फ्री’ कहकर दिए जाते हैं लेकिन बाद में उन पर ‘एनुअल मेंटेनेंस चार्ज’ लगाया जाता है. हमेशा Life-Time Free (LTF) कार्ड चुनने की कोशिश करें.
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