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खरसावां में रज पर्व पर भक्ति की अनूठी परंपरा, जलते अंगारों पर चलकर भक्तों ने दिखाई हठभक्ति

Kharsawan News | खरसावां, शचिंद्र कुमार दाश: खरसावां में रज पर्व के अवसर पर भक्ति का अनोखा रंग देखने को मिला. जानकारी के अनुसार, रज संक्रांति के मौके पर रविवार को खरसावां के प्रसिद्ध गीतिलोता शिव मंदिर में करीब पांच सौ से अधिक शिव भक्तों ने हठ भक्ति का प्रदर्शनत किया. इन शिव भक्तों ने चिलचिलाती धूप और हीट वेब के बीच उपवास रखा और दहकते अंगारों पर नंगे पांव चले.

भक्तों ने निभायी नियां माडा की रस्म

बताया गया कि भक्तों ने शनिवार से व्रत रख कर यहां मंदिर परिसर में भैरव नाथ की पूजा अर्चना की. इसके बाद रविवार को दोपहर करीब 12 बजे तेज धूप में मंदिर के सामने जलते अंगरों में नंगे पांव चले. ढोल व नगाडे की थाप पर आग के जलते अंगारों में चलने वालों में बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया. अपने आराध्य देव भगवान शिव से मांगी गयी मन्नत पूरी होने की खुशी में भक्तों ने नियां माडा (आग में चलने) की रस्म को पूरे भक्ति भाव के साथ निभाया.

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शरीर पर सुई-धागा पिरोकर दिखाई हठभक्ति

वहीं, इस दौरान लगभग 50 से अधिक संख्या में शिव भक्तों ने बाहं और पीठ की चमड़ी पर सुई-धागा पिरो कर रजनी फुडा नामक धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया. इन हठी भक्तों ने स्वेच्छा से अपने शरीर के चमड़े पर सुई-धागा पिरोया. इसके अलावा मंदिर के पाट भोक्ता ने एक पटरे पर लगाने गये नुकीले लौहे के कील पर लेटा. फिर कुछ अन्य भोक्ताओं ने इस पटरे को अपने कंधे में ले कर करीब एक किमी दूर गांव के नदी से मंदिर तक पहुंचाया. भक्तों ने अपने शरीर को कष्ट दे कर अपने आराध्य देव महादेव से किया हुआ वादा पूरा किया. हठ भक्ति की इस परंपरा को देखने के लिये हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे.

शरीर को कष्ट दे कर शिव भक्तों को मिलता है सुकून

बताया गया कि गीतिलोता के शिव मंदिर में आग पर चलने व शरीर की चमड़ी में सुई-धागा पिरोने के इस हठ भक्ति की परंपरा वर्षों पुरानी है. हर साल भक्त रजो संक्रांति के मौके पर यहां आग पर चल कर अपनी हठ भक्ति को प्रदर्शित करते हैं. भोक्ताओं की मानें तो हठ भक्ति को पारण करने में मन व आत्मा को बेहद सुकून मिलता है. वर्षों से इस गांव में चली आ रही यह परंपरा अब भी पूरे उत्साह के साथ पूरी की जा रही है. भक्तों के अनुसार पूरी प्रक्रिया ही भगवान को समर्पित है.

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रज संक्रांति पर निभायी जाती है परंपरा

श्रद्धालु सूर्यदेव महतो ने बताया कि रज संक्रांति के मौके पर खरसावां के गीतिलोता शिव मंदिर परिसर में आग पर चलने, शरीर के चमड़ी पर सुई-धागा पिरोने की परंपरा को निभाया जा रहा है. सैकडों की संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होते हैं. वहीं, भोक्ता सुनील महतो ने कहा कि खरसावां के गीतिलोता में हर वर्ष श्रद्धा व उल्लास के साथ आग में चलने की परंपरा को निभाया जा रहा है. विगत कई वर्षों से भोक्ता के तौर पर आग में चलने की परंपरा को निभाते आ रहा हूं.

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भगवान करते हैं श्रद्धालुओं की रक्षा

इधर, श्रद्धालु कृष्णा महतो कहते हैं कि भगवान शिव से मांगी हुई मन्नत के पूरी होने पर भोक्ता आग में चल कर अपने आराध्य देव से किये वादों को पूरा करते हैं. हठ भक्ति की पूरी प्रक्रिया भगवान शिव को समर्पित है. श्रद्धालुओं की रक्षा भगवान शिव करते हैं. जबकि श्रद्धालु कुलदीप महतो ने कहा कि हठ भक्ति की इस परंपरा को निभाने में मन व आत्मा को बेहद सुकून मिलता है. वर्षो से इस गांव चली आ रही यह परंपरा अब भी पूरे उत्साह के साथ हर वर्ष निभाया जाता है. साथ ही मंदिर में पूजा करने के लिये भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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