Garhwa Nagar Parishad Election 2026, गढ़वा, (जितेंद्र सिंह): राज्य प्रशासन द्वारा नगर निकाय चुनाव की घोषणा किये जाने के साथ ही गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में चुनावी माहौल गर्म हो गया है. इस बार नगर परिषद अध्यक्ष पद की सीट सामान्य वर्ग के लिए घोषित होने के बाद नेतृत्वक दलों और संभावित प्रत्याशियों में हलचल तेज हो गयी है. चुनावी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और विभिन्न दलों के भीतर प्रत्याशी चयन को लेकर बैठकों और रायशुमारी का दौर चल रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए भाजपा, झामुमो, कांग्रेस, राजद, आजसू और भाकपा माले समर्थित प्रत्याशी मैदान में उतर सकते हैं.
भाजपा और झामुमो प्रत्याशी चयन को लेकर आंतरिक मंथन पूरा
भाजपा और झामुमो ने प्रत्याशी चयन को लेकर आंतरिक मंथन लगभग पूरा कर लिया है, जबकि अन्य दल भी अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं. एक ही दल से कई इच्छुक उम्मीदवार सामने आने के कारण प्रत्याशी चयन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कई वरिष्ठ नेता पार्टी द्वारा अधिकृत प्रत्याशी की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि चुनाव दलीय आधार पर नहीं होगा, लेकिन नेतृत्वक दल अपने-अपने समर्थित प्रत्याशियों को पूरा समर्थन देंगे.
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आरक्षण बदलने से बढ़ी दावेदारी
गौरतलब है कि पिछले करीब डेढ़ दशक से यह सीट ओबीसी स्त्री वर्ग के लिए आरक्षित थी, लेकिन इस बार इसे सामान्य वर्ग के लिए घोषित किया गया है. इससे चुनावी मुकाबला और रोचक होने की संभावना है. कयास लगाये जा रहे हैं कि इस बार एक दर्जन से अधिक पुरुष प्रत्याशी मैदान में उतर सकते हैं. कई समाजसेवी, जो पहले आरक्षण के कारण अपनी पत्नियों को चुनाव में उतारते थे, अब स्वयं अध्यक्ष पद के लिए तैयारी कर रहे हैं.
अब तक चर्चा में आये प्रमुख चेहरे
अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों की चर्चा है, उनमें भाजपा समर्थित कंचन जायसवाल, अनिल पांडेय, सुरेंद्र विश्वकर्मा और संतोष केसरी शामिल हैं. वहीं झामुमो की ओर से पूर्व नगर अध्यक्ष अनिता दत्त, कंचन साहू और जितेंद्र सिन्हा के नाम सामने आ रहे हैं. इसके अलावा समाजसेवी आशीष कुमार सोनी उर्फ दौलत सोनी , कन्या विवाह एंड विकास सोसाइटी के सचिव विकास माली और ज्योति प्रकाश केसरी भी संभावित प्रत्याशियों में गिने जा रहे हैं. अन्य दलों के प्रत्याशियों के नाम जल्द सामने आने की संभावना है.
बुनियादी सुविधाएं बनेंगी चुनावी मुद्दे
नगर परिषद चुनाव में इस बार बुनियादी सुविधाएं और विकास कार्य प्रमुख मुद्दे रहेंगे. शहर में पेयजलापूर्ति, सड़क और नाली निर्माण, बिजली व्यवस्था, जलजमाव की समस्या, कचरा प्रबंधन, सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर मतदाताओं में असंतोष है. साथ ही दुकानों के आवंटन में पारदर्शिता भी चुनावी बहस का अहम विषय बनेगी. मतदाता इस बार केवल वादों से नहीं, बल्कि ठोस योजनाओं और ईमानदार कार्यप्रणाली की उम्मीद कर रहे हैं. आने वाले दिनों में नगर परिषद चुनाव को लेकर शहर की नेतृत्व में हलचल और तेज होने की संभावना है.
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