Global Food Prices 2026: मार्च महीने में दुनियाभर में खाने-पीने की चीजों की कीमतों ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है. द यूनाइटेड नेशंस की फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन(FAO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल फूड प्राइस इंडेक्स अब 128.5 पॉइंट पर पहुंच गया है. यह सितंबर 2025 के बाद का सबसे हाइएस्ट लेवल है. फरवरी के मुकाबले इसमें 2.4% की बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में आपके राशन के बिल पर पड़ सकता है.
क्यों महंगी हो रही हैं खाने-पीने की चीजें?
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस महंगाई के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल (Crude Oil) है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. जब तेल महंगा होता है, तो सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का खर्चा (Transportation) बढ़ जाता है. इसके अलावा, तेल की कमी के कारण बायो-फ्यूल की मांग बढ़ती है, जिससे खेती की जमीन पर खाद और दूसरी चीजों का बोझ बढ़ता है.
किन चीजों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े?
सबसे ज्यादा उछाल खाद्य तेल (Vegetable Oil) में आया है, जो एक महीने में ही 5.1% महंगा हो गया है. चीनी की कीमतों में भी 7.2% की भारी तेजी आई है, क्योंकि ब्राजील जैसे देश अब गन्ने से चीनी बनाने के बजाय इथेनॉल बनाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. गेहूं की कीमतों में भी 4.3% की बढ़त हुई है, जिसका मुख्य कारण खराब मौसम और खाद की बढ़ती कीमतें हैं. हालांकि, चावल प्रेमियों के लिए थोड़ी राहत है क्योंकि चावल के दाम 3% कम हुए हैं.
क्या आगे और बढ़ेगी महंगाई?
FAO के मुख्य इकोनॉमिस्ट मैक्सिमो टोरेरो का कहना है कि अगर युद्ध और तनाव 40 दिनों से ज्यादा खिंचता है, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे. खाद महंगी होने की वजह से किसान अगली फसल कम उगा सकते हैं, जिससे मार्केट में अनाज की कमी हो सकती है. फिलहाल हालात काबू में हैं, लेकिन 2026 में आपकी जेब कितनी ढीली होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दुनिया में शांति कब बहाल होती है और तेल के दाम कितने स्थिर रहते हैं.
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