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चीन की बादशाहत खत्म! कजाकिस्तान में मिला रेयर अर्थ का महाभंडार, AI से हो रही खोज

Kazakhstan Rare Earth Deposit Discovery: कजाकिस्तान को अब तक लोग सिर्फ तेल और लंबे मैदानों के लिए जानते थे, लेकिन अब इस देश ने एक ऐसा दांव स्पोर्ट्सा है जिसने पूरी दुनिया के टेक मार्केट में हलचल मचा दी है. कजाकिस्तान के कारागांडी (Karagandy) इलाके में जमीन के नीचे रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिजों) का एक बहुत बड़ा भंडार मिला है. दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक हो सकता है. इसमें नियोडिमियम, सीरियम, लैंथेनम और येट्रियम जैसे तत्व मिले हैं, जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक कारों, विंड टर्बाइन और आपके स्मार्टफोन में होता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज कजाकिस्तान को केवल एक ‘ट्रांजिट हब’ से बदलकर हाई-टेक सप्लाई चेन का ‘सुपरपावर’ बना सकती है. इससे रेयर अर्थ मार्केट पर चीन की जो मजबूत पकड़ है, उसे अब कड़ी टक्कर मिलने वाली है.

‘न्यू कजाकिस्तान’ में मिला 20 मिलियन टन का भंडार

शुरुआती अनुमानों की मानें तो यहां लगभग 9,35,400 मीट्रिक टन रेयर अर्थ ऑक्साइड मौजूद है. कुछ अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे अयस्क (ore body) की मात्रा 20 मिलियन टन तक हो सकती है, जिसमें औसतन 700 ग्राम प्रति टन खनिज है. स्थानीय लोग इस जगह को अब गर्व से न्यू कजाकिस्तान बुलाने लगे हैं.

भले ही ये खनिज मात्रा में छोटे दिखते हों, लेकिन क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और मिलिट्री के लिए ये ऑक्सीजन की तरह जरूरी हैं. PONEN के जॉर्जी फ्रीमैन ने 2025 के MINEX फोरम में सावधानी बरतते हुए कहा कि इसे आधिकारिक तौर पर ‘डिपॉजिट’ घोषित करने के लिए अभी हाइड्रोलॉजी और इकोनॉमिक्स पर पूरी स्टडी की जरूरत है.

कब शुरू होगी माइनिंग? 

भले ही खजाना मिल गया है, लेकिन इसे जमीन से निकालना इतना आसान नहीं है. जानकारों का कहना है कि बड़े पैमाने पर माइनिंग शुरू होने में 2031 तक का समय लग सकता है. इसमें शुरुआती निवेश 10 मिलियन डॉलर से शुरू हो सकता है, लेकिन इसमें रिफाइनरी और ट्रांसपोर्ट का खर्च शामिल नहीं है.

फिलहाल कजाकिस्तान के पास इन खनिजों को रिफाइन (शुद्ध) करने की अपनी तकनीक नहीं है. इसके लिए कजाकिस्तान की प्रशासनी कंपनी ताऊ-केन समरुक (Tau-Ken Samruk), कनाडा की इवानहो माइन्स (Ivanhoe Mines) के साथ मिलकर काम कर रही है. वे यहां टाइफून नाम की खास डीप-डिटेक्शन टेक्नोलॉजी का टेस्ट कर रहे हैं.

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दुनिया की बड़ी कंपनियों की नजर

इस खोज ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. 2020 से 2025 के बीच यहां 1 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी निवेश आ चुका है. रियो टिंटो (Rio Tinto), बीएचपी (BHP), फोर्टेस्क्यू और बैरिक जैसी दिग्गज कंपनियां यहां कतार में हैं. वहीं दक्षिण कोरिया की KIGAM एजेंसी यहां AI सर्वे का इस्तेमाल कर रही है ताकि खोज का काम जल्दी पूरा हो सके.

चीन के लिए क्यों है यह खतरे की घंटी?

फिलहाल दुनिया के 70% रेयर अर्थ प्रोडक्शन और 85% रिफाइनिंग पर चीन का कब्जा है. दुनिया के कई देश चीन पर इस निर्भरता से परेशान हैं. ऐसे में कजाकिस्तान का यह नया रोल ग्लोबल मार्केट का बैलेंस बदल सकता है. हालांकि, अभी एनवायरमेंट और कमर्शियल स्टडीज 2026 तक चलेंगी और प्रशासन ने अभी तक रिफाइनिंग प्लान या लाइसेंस को लेकर कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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