Shaksgam Valley Row: हिंदुस्तानीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 के समझौते को हिंदुस्तान गैर-कानूनी मानता है. इसलिए, शक्सगाम घाटी में किसी भी गतिविधि को हम मंजूरी नहीं देते हैं. इस संबंध में विदेश मंत्रालय पहले ही बयान जारी कर चुका है. इसलिए, चीन में जो संयुक्त बयान जारी किया गया है, CPEC 2.0 के बारे में मैं जो समझता हूं, हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं, और हम इसे दोनों देशों (चीन-पाकिस्तान) द्वारा की जा रही एक गैर-कानूनी कार्रवाई मानते हैं.
शक्सगाम घाटी पर चीन की चाल
चीन ने हिंदुस्तान की आपत्तियों के बीच सोमवार को शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावों को दोहराया. और कहा कि इस इलाके में उसकी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बिल्कुल उचित हैं. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) को लेकर हिंदुस्तान द्वारा आलोचना किए जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग के पुराने रुख को दोहराया. उन्होंने कहा कि यह एक आर्थिक पहल है, जिसका उद्देश्य स्थानीय आर्थिक व सामाजिक विकास करना और लोगों की जीवन में सुधार लाना है.
#WATCH | Delhi: Indian Army Chief General Upendra Dwivedi says, “As far as the Shaksgam Valley is concerned, India considers the 1963 agreement between Pakistan and China as illegal. Therefore, any activity in the Shaksgam Valley is concerned, we do not approve of it. And in… pic.twitter.com/LNVa1k9lVr
— ANI (@ANI) January 13, 2026
शक्सगाम घाटी को हिंदुस्तान ने बताया अपना क्षेत्र
हिंदुस्तान ने पिछले शुक्रवार को शक्सगाम घाटी में चीन की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आलोचना करते हुए कहा था कि यह हिंदुस्तानीय क्षेत्र है. ड्रैगन और पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा, उसके पास अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, शक्सगाम घाटी हिंदुस्तानीय क्षेत्र है। हमने 1963 में किए गए तथाकथित चीन-पाकिस्तान ‘सीमा समझौते’ को कभी मान्यता नहीं दी है. हम लगातार कहते आए हैं कि यह समझौता अवैध और अमान्य है. उन्होंने कहा, हम तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को भी मान्यता नहीं देते, क्योंकि यह हिंदुस्तानीय क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसपर पाकिस्तान का अवैध और जबरन कब्जा है.
1963 में पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी के 5180 वर्ग किलोमीटर हिस्से को चीन को सौंप दिया था
पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से कब्जाए गए हिंदुस्तानीय क्षेत्र में से शक्सगाम घाटी के 5180 वर्ग किलोमीटर हिस्से को चीन को सौंप दिया था.
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