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जिहादियों के डर से भाग रहे लोग, शादी के लिए महिलाओं की किडनैपिंग, अफ्रीका का यह देश बना आतंक का नया अड्डा

Mozambique Terror Attacks: अफ्रीका के मोजाम्बिक देश में इस्लामिक स्टेट (IS) के आतंकवाद ने लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है. जुलाई के बाद से अब तक 3 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर भाग चुके हैं. कई लोग तो दो-तीन या चार बार भी विस्थापित हुए हैं. यूक्रेन, गाजा और सूडान जैसी बड़ी घटनाओं के कारण दुनिया का ध्यान वहां कम गया है और विदेशी मदद भी घट गई है.

रवांडा और मोजाम्बिक की फोर्सेज की चुनौती

मोजाम्बिक की सेना और रवांडा की फोर्सेज अब तक इस हिंसा को रोकने में सफल नहीं हो पाईं. अक्टूबर 2017 में काबो डेलगाडो प्रांत में IS ने हमला शुरू किया था. मार्च 2021 में पाल्मा शहर पर हमला हुआ, जिसमें 600 से ज्यादा लोग मारे गए. रवांडा ने जुलाई 2021 में 1,000 सैनिक तैनात किए और थोड़ी सफलता मिली. अब वहां लगभग 4,000-5,000 सैनिक हैं, लेकिन नागरिकों के खिलाफ हिंसा कम नहीं हुई. नवंबर में अकेले 1 लाख लोग विस्थापित हुए क्योंकि आतंकियों ने नामपुला प्रांत में सबसे बड़ा हमला किया.

Mozambique Terror Attacks in Hindi: नागरिकों की मौतें बढ़ीं, सेना कमजोर पड़ रही है

इस साल अब तक 302 हमलों में 549 लोग मारे गए, जिनमें 290 आम नागरिक हैं. यह पिछले साल की तुलना में 56% ज्यादा है. 2017 से अब तक करीब 2,800 नागरिक मारे गए हैं, जिनमें 80% IS और 9% मोजाम्बिक सेना के हाथों. शोधकर्ता टोमस क्युफेस के अनुसार आतंकवादी बहुत हिम्मती हैं और रवांडा व मोजाम्बिक फोर्सेज़ पहले जितनी प्रभावी नहीं हैं. प्रशासन चाहती है कि मोजाम्बिक सेना आगे बढ़े और रवांडा पीछे रहे.

संवाद ही समाधान हो सकता है

दक्षिण अफ्रीका के इंस्टिट्यूट फॉर सिक्योरिटी स्टडीज के शोधकर्ता बोरगेस नहामिरे का कहना है कि स्थानीय समुदायों और आतंकवादियों के साथ संवाद ही समाधान हो सकता है. लेकिन वह इस पर संदेह जताते हैं. उनका कहना है कि आठ सालों में कोई कारगर योजना नहीं बनी. सेना का ध्यान मुख्य रूप से $20 अरब के LNG प्रोजेक्ट की सुरक्षा पर केंद्रित है. अगर सुरक्षा का उद्देश्य मानव सुरक्षा है तो वे असफल रहे, लेकिन LNG प्रोजेक्ट की सुरक्षा में थोड़ी सफलता मिली है. (Mozambique Terror Attacks Civilians Kidnapping Displacement in Hindi)

बच्चों और स्त्रीओं पर खतरनाक असर

IS ने बच्चों को जबरन श्रम, शादी या लड़ाई के लिए अपहरण करना शुरू कर दिया है. ह्यूमन राइट्स वॉच की शोधकर्ता शीला नहानकले के अनुसार विस्थापित लोगों में यौन हिंसा, शोषण और बच्चों के खिलाफ अत्याचार का खतरा बढ़ गया है. नवंबर में विस्थापित 1 लाख लोगों में 70,000 शिशु शामिल थे. इस साल ह्यूमैनिटेरियन मदद में $195 मिलियन ही मिले, जो जरूरत के सिर्फ 55% हैं. पिछले साल यह राशि $246 मिलियन थी. मेडीसिन्स सैंस फ्रोंटियर्स के प्रमुख सेबस्टियन ट्राफिकांटे कहते हैं कि विस्थापित लोग बहुत खराब परिस्थितियों में हैं. लोग बस शांतिपूर्ण जीवन चाहते हैं, अपने खेतों में काम करना चाहते हैं और अपने घर लौटना चाहते हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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