Jharkhand Economic Survey 2026, रांची: हेमंत सोरेन की प्रशासन ने शनिवार को आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट झारखंड विधानसभा में पेश की. इसके अनुसार झारखंड के विकास की रफ्तार राष्ट्रीय औसत से आगे है. वर्ष 2024-25 में झारखंड की वास्तविक विकास दर 7.02% रही. इसी अवधि में राष्ट्रीय विकास दर 6.5% थी. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2025-26 में राज्य की वित्तीय स्थिति 5.6 लाख करोड़ और 2026-27 तक 6.1 लाख करोड़ की हो जायेगी. आर्थिक सर्वे में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि और उद्योग सेक्टर का योगदान घटता दिख रहा है. वहीं, सर्विस सेक्टर का जीडीपी में योगदान बढ़ा है. राज्य गठन के बाद से झारखंड का बजट 20 गुना से अधिक बढ़ गया है. 2001-02 में जो बजट मात्र 6,067 करोड़ था, वह 2025-26 के लिए 1,45,400 करोड़ प्रस्तावित है.
झारखंड में प्रति व्यक्ति आय बढ़ी
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ी है. यह बढ़कर 1.16 लाख से पार हो गयी है. लेकिन राष्ट्रीय औसत से फिलहाल करीब 40% कम है. यह 2011 में राष्ट्रीय औसत से करीब 35% कम थी. आर्थिक सर्वे में वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2024-25 की तुलना की गयी है. सर्वे के अनुसार, झारखंड पिछले चार वर्षों से लगातार सात प्रतिशत से अधिक की विकास दर प्राप्त कर रहा है. यह राज्य की आर्थिक स्थिरता का प्रमाण है. सर्वे के अनुसार झारखंड न केवल महामारी (कोरोना) के प्रभाव से पूरी तरह उबर चुका है, बल्कि कई प्रमुख आर्थिक पैमानों पर राष्ट्रीय औसत को भी पीछे छोड़ रहा है.
गरीबी को कम करने में झारखंड का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर
झारखंड ने बहुआयामी गरीबी को कम करने में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है. 2015-16 में जहां 42.10% आबादी गरीब थी, वह 2019-21 तक घटकर 28.81% रह गयी है. सर्वे के सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ों के अनुसार, झारखंड का वास्तविक सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2011-12 के 1,50,918 करोड़ से दोगुना होकर वर्ष 2024-25 में 3,03,178 करोड़ पहुंच गया है. यदि वर्तमान कीमतों (नॉमिनल जीएसडीपी) की बात करें, तो यह 5,16,255 करोड़ के आंकड़े को छू चुका है, जो पिछले 13 वर्षों में तीन गुना से अधिक की वृद्धि है.
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सर्विस सेक्टर राज्य की वित्तीय स्थिति का बना इंजन
सर्वेक्षण झारखंड की वित्तीय स्थिति में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव को रेखांकित करता है. अब राज्य केवल खनिज और उद्योगों पर निर्भर नहीं है. सेवा क्षेत्र अब राज्य की वित्तीय स्थिति का सबसे बड़ा इंजन बन गया है. सकल राज्य मूल्य जोड़ (जीएसवीए) में इसकी हिस्सेदारी 38.54% से बढ़कर 45.56% हो गयी है. इस दौरान उद्योग क्षेत्र का प्रदर्शन शानदार रहा है. यह दोगुना होकर 64,717 करोड़ पहुंच गया है. 2011-12 में उद्योग सेक्टर का योगदान 45.41% था, यह 2024-25 में घटकर 42.02% रह गया है. हालांकि वित्तीय स्थिति में कृषि की हिस्सेदारी घटकर छह फीसदी रह गयी है. लेकिन मछली पालन (11.5% वृद्धि) और पशुपालन (सात फीसदी वृद्धि) हुई है.
प्रति व्यक्ति आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, सुधरी आर्थिक स्थिति
झारखंड के नागरिकों की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार देखा गया है. वर्तमान मूल्यों पर राज्य की प्रति व्यक्ति आय पहली बार एक लाख के स्तर को पार कर 1,16,663 तक पहुंच गयी है. वास्तविक प्रति व्यक्ति आय भी 2011-12 के मुकाबले 65.7% बढ़कर 68,357 हो गयी है. यह अभी भी राष्ट्रीय औसत का लगभग 60% है. पिछले सात वर्षों से यह अनुपात स्थिर बना हुआ है, जो दर्शाता है कि झारखंड देश की मुख्यधारा की आर्थिक वृद्धि के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है.
आर्थिक सर्वे : एक नजर में
- जीएसटी संग्रह 20% की वार्षिक दर से बढ़कर 14,174 करोड़ रुपये हुआ
- राजस्व में 13.7% वृद्धि दर्ज की गयी
- भूमि पंजीकरण से होनेवाला राजस्व 27.8% बढ़ा
- 90 % जनधन खाता ग्रामीण क्षेत्रों में
- 2025 में क्रेडिट रेशियो 41.80 % रहा, जो राष्ट्रीय मानक (69%) से कम है
- वार्षिक ऋण योजना के मुकाबले कृषि ऋण की उपलब्धि केवल 22.73 % रही
- शिक्षा और आवास ऋण में लक्ष्य से अधिक (102%) उपलब्धि
- महंगाई पर लगाम, राज्य में मुद्रास्फीति 2023 के 6.0% से घटकर 2024-25 में 04% हुई
क्या-क्या है सिफारिश
- सेवा क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए शहरों में लॉजिस्टिक्स और कौशल विकास पर निवेश बढ़ाना होगा
- खेती की घटती हिस्सेदारी को देखते हुए आधुनिक तकनीक से ग्रामीण आय बढ़ाना जरूरी है
- बैंकों को राज्य के भीतर ऋण वितरण (विशेषकर कृषि और एमएसएमइ क्षेत्र में) बढ़ाना होगा
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