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झारखंड को जल्द मिलेगा पहला गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र, 2013 में तैयार हुआ था इन्फ्रास्ट्रक्चर

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Jharkhand First Vulture Conservation and Breeding Centre: हिंदुस्तान में तेजी से घट रही गिद्धों की संख्या को कम करने के लिए झारखंड में जल्द ही गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र की शुरुआत होगी. रांची में यह अपनी तरह का पहला गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र होगा. राज्य के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. इसके लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के साथ झारखंड प्रशासन ने तकनीकी सहायता के लिए एक समझौता (एमओयू) करने की मंजूरी वन विभाग को दे दी है.

2013 में 41 लाख की लागत से तैयार हुआ था इन्फ्रास्ट्रक्चर

मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एसआर नटेश ने कहा है कि अगले वर्ष तक इस केंद्र को चालू करने का प्रयास चल रहा है. उन्होंने बताया कि केंद्र प्रशासन ने पक्षियों की घटती संख्या को बढ़ाने के लिए वर्ष 2009 में झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 36 किलोमीटर दूर मुटा में राज्य के पहले गिद्ध संरक्षण और प्रजनन केंद्र को मंजूरी दी थी. वर्ष 2013 में 41 लाख रुपए की लागत से इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया था.

Jharkhand First Vulture Conservation and Breeding Centre: बीएनएचएस देगा तकनीकी सहायता

हालांकि, नौकरशाही संबंधी बाधाओं और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति न मिलने जैसे विभिन्न मुद्दों के कारण यह केंद्र शुरू नहीं हो सका था. नटेश ने कहा कि बीएनएचएस तकनीकी सहायता देगा और केंद्र की निगरानी करेगा. उन्होंने कहा कि गिद्ध, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची (1) के तहत संरक्षित पक्षी हैं.

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देश में गिद्धों की 9 प्रजातियां, झारखंड में मिलती हैं 6

वहीं, बीएनएचएस झारखंड के समन्वयक सत्य प्रकाश ने बताया कि देश में पाये जाने वाले गिद्धों की 9 प्रजातियों में से 6 झारखंड में पायी जाती हैं. उन्होंने कहा कि कभी पूरे हिंदुस्तान में बहुतायत में पाये जाने वाले गिद्ध पशु चिकित्सा दवा ‘डाइक्लोफेनैक’ से संबंधित विषाक्तता के कारण लगभग गायब हो गये हैं.

झारखंड में मौजूद हैं 400 से 450 गिद्ध

सत्य प्रकाश ने बताया कि हाल के रिसर्च में बताया गया है कि झारखंड में 400 से 450 गिद्ध हैं. संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए कोडरमा जिले में एक ‘गिद्ध रेस्तरां’ स्थापित किया गया है. तिलैया नगर परिषद के अंतर्गत गुमो में एक हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित यह सुविधा गिद्धों के लिए ‘डाइक्लोफेनैक-मुक्त पशु शव’ उपलब्ध कराने के लिए नामित भोजन स्थल के रूप में काम कर रही है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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