रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand Teacher Recruitment: झारखंड में हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है. वर्ष 2016 से चल रही स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो पाई है. 2034 पदों पर नियुक्ति लंबित रहने से हजारों अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. मामला अब फिर से झारखंड हाईकोर्ट पहुंच चुका है.
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं हुई नियुक्ति
एक सितंबर 2025 को झारखंड हाईकोर्ट ने 258 रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश दिया था कि रिक्त 2034 पदों को याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों से भरा जाए. कोर्ट ने इसके लिए तय समय सीमा भी निर्धारित की थी. अभ्यर्थियों को आठ सप्ताह के भीतर अपना अभ्यावेदन झारखंड कर्मचारी चयन आयोग जेएसएससी) को सौंपने का निर्देश दिया गया था.
अभ्यर्थियों ने समय सीमा के भीतर अपने दस्तावेज जमा भी कर दिए, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. इससे नाराज अभ्यर्थियों ने अब कोर्ट की अवमानना का रास्ता अपनाया है.
200 से अधिक अभ्यर्थियों ने दायर की अवमानना याचिका
कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर 200 से अधिक अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है. प्रार्थी मनोज कुमार गुप्ता व अन्य की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने यह याचिका दाखिल की है. अभ्यर्थियों का कहना है कि कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद जेएसएससी ने नियुक्ति प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया, जो न्यायालय की अवमानना है.
क्या था एकल पीठ का आदेश
इस मामले में जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया था. कोर्ट ने पूरे मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस डॉ. एसएन पाठक की अध्यक्षता में एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था.
कमेटी को रिपोर्ट सौंपने का आदेश
कमेटी को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य प्रशासन को सौंपने को कहा गया था. इसके बाद राज्य प्रशासन को छह सप्ताह के भीतर उस रिपोर्ट पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था. साथ ही, 2034 रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी करने का आदेश भी दिया गया था.
कमीशन गठन में आई बाधा
हालांकि, इस प्रक्रिया में भी बाधा उत्पन्न हो गई. जस्टिस डॉ. एसएन पाठक ने वन मैन कमीशन का अध्यक्ष बनने में असमर्थता जताई. इसके बाद कोर्ट को नए नामों पर विचार करना पड़ा. इस मुद्दे पर अब 7 अप्रैल को सुनवाई निर्धारित की गई है, जिससे मामले में और देरी की आशंका बनी हुई है.
राज्य प्रशासन और जेएसएससी ने दी चुनौती
इस बीच राज्य प्रशासन और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपील याचिकाएं दायर की हैं. दोनों पक्षों का कहना है कि आदेश में कई विसंगतियां हैं और इसे निरस्त किया जाना चाहिए. हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक इस आदेश पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगी है.
क्या है पूरा नियुक्ति विवाद
यह पूरा मामला वर्ष 2016 में शुरू हुई शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है. जेएसएससी ने हाईस्कूल शिक्षकों के 17,786 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की थी. इसके बाद 26 विषयों की स्टेट मेरिट लिस्ट और कटऑफ जारी की गई. नियुक्ति प्रक्रिया में जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय मेरिट को आधार बनाया गया. इसी कारण कई ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए थे, नियुक्ति से वंचित रह गए. इन अभ्यर्थियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और नियुक्ति की मांग की.
अभ्यर्थियों में बढ़ती नाराजगी
लंबे समय से नियुक्ति नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है. कई अभ्यर्थी वर्षों से इस परीक्षा के परिणाम और नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं. उनका कहना है कि प्रशासन और आयोग की लापरवाही के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है.
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा असर
2034 पदों पर नियुक्ति लंबित रहने का सीधा असर राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. यदि समय पर नियुक्ति हो जाती, तो स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सकती थी.
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7 अप्रैल को होगी सुनवाई
अब सभी की निगाहें 7 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या जेएसएससी को जल्द नियुक्ति पूरी करने का निर्देश देता है या नहीं. इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रशासनी नियुक्तियों में देरी क्यों होती है और इसका खामियाजा आखिरकार युवाओं को ही क्यों भुगतना पड़ता है.
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