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टी-20 विश्व कप में भारतीय क्रिकेट का स्वर्णकाल, पढ़ें अभिषेक दुबे का लेख

T20 World Cup : किसी भी स्पोर्ट्स में विश्व कप की ट्रॉफी जीतना एक ऐतिहासिक लम्हा होता है. यह ऐतिहासिक पल तब यादगार स्वर्णिम काल बन जाता है, जब ट्रॉफी की जीत एक आदत बन जाती है. सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम के लिए अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में बीते रविवार की रात उस स्वर्णिम काल का ऐलान था. कपिल देव के नेतृत्व में 1983 में और महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में 2011 में हिंदुस्तान 50 ओवर के विश्व कप का चैंपियन बना. फिर धोनी की ही कप्तानी में हिंदुस्तान 2007 के टी-20 विश्व कप, फिर रोहित शर्मा की कप्तानी में 2024 में टी-20 विश्व कप का विजेता बना.

वर्ष 2023 के विश्व कप में हिंदुस्तान ने फाइनल को छोड़ अपने सभी मैच जीते थे. जबकि 2024 के टी-20 विश्व कप में अपने सभी मैच जीतकर हिंदुस्तान विश्वविजेता बना था. ऐसे ही, 2025 में सभी टीमों को हराकर हिंदुस्तान चैंपियंस ट्रॉफी विजेता बना. टीम इंडिया ने 2024 के टी-20 विश्व कप और 2026 टी-20 विश्व कप के बीच टी-20 की आठ शृंखलाओं में जीत हासिल की, जिनमें से सात जीत सूर्यकुमार यादव की कप्तानी और गौतम गंभीर के हेड कोच के दौर में मिली. इस आधार पर यह निस्संदेह सफेद बॉल फॉर्मेट में हिंदुस्तानीय क्रिकेट का स्वर्णकाल है . क्रिकेट के पंडितों को हिंदुस्तानीय क्रिकेट का पराक्रम किसी दौर में वेस्ट इंडीज और ऑस्ट्रेलिया की टीमों की धमक की याद दिलाता है.

यह स्वर्णिम दौर कब और कहां से आया? महेंद्र सिंह धोनी के बाद विराट कोहली ने टीम इंडिया की कमान संभाली. आइपीएल के शुरू होने से हिंदुस्तानीय क्रिकेट के टैलेंट पूल में इजाफा हुआ. विराट कोहली ने टीम को आक्रामकता, ऊर्जा और फिटनेस का मूलमंत्र दिया. इसने टीम को दो देशों के बीच सीरीज में तो जीत दिलानी शुरू कर दी, पर टीम का अभियान विश्व कप में सेमीफाइनल में जाकर रुक जाता था. फिर रोहित शर्मा टीम के सेनापति बने. उन्हें यह बात समझ में आ गयी थी कि विश्वविजेता बनने के लिए निडरता और पहली गेंद से आक्रामक रवैया जरूरी है. रोहित ने खुद मिसाल पेश करते हुए विरोधी खेमे पर पहली गेंद से ही हल्ला बोलना शुरू कर दिया. रोहित-राहुल द्रविड़ की कमान में हिंदुस्तान ने 2024 में टी-20 विश्व कप जीता और यहीं से हिंदुस्तानीय टीम के स्वर्णकाल की शुरुआत हुई.

गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद हिंदुस्तानीय टीम ने 2026 के टी-20 विश्व कप की तैयारी शुरू कर दी. सूर्यकुमार यादव को टीम की कमान सौपी गयी और उन्हें सिर्फ टी-20 फॉर्मेट पर फोकस करने को कहा गया. ऐसे ही, फिटनेस की समस्या से जूझ रहे हार्दिक पंड्या टीम के लिए असरदार ऑलराउंडर साबित हुए. इसके अलावा टीम इंडिया ने ऐसी टीम की रचना शुरू कर दी, जो पहली गेंद से हल्ला बोले. रोहित शर्मा और विराट कोहली के टी-20 से रिटायरमेंट के बाद संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी गयी. ऐसे ही, टीम को साफ संदेश दे दिया गया कि पहले तीन पोजीशन के अलावा किसी को भी कभी भी वक्त के हिसाब से भेजा जा सकता है.

तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव, शिवम दुबे, हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल और रिंकू सिंह को फ्लोटर की भूमिका दी गयी. टीम ने नाम को नहीं, फॉर्म को तवज्जो दी और इसलिए शुभमन गिल की जगह ईशान किशन को टीम में शामिल कर लिया. नतीजा सामने था. हिंदुस्तानीय टीम ने 200 के स्कोर को न्यू नॉर्मल बना लिया. जब आप 200 से अधिक का स्कोर बनाते हैं, तो टॉस और ओस मैच का फैसला तय नहीं करते. इसके अलावा टीम इंडिया ने ऑलराउंडर को टीम में तवज्जो दी. इसलिए विकेट के हिसाब से कभी कुलदीप यादव, तो कभी अर्शदीप बाहर बैठे और अक्षर, हर्षित, शिवम और वाशिंगटन सुंदर को मौका मिला.

इस बीच हिंदुस्तानीय टीम के पास जसप्रीत बुमराह के रूप में नायाब हीरा है. बुमराह खुद को क्रिकेट में किसी भी दौर के महानतम गेंदबाजों में से एक साबित कर चुके हैं. वेस्ट इंडीज, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व महान गेंदबाज उन्हें तेज गेंदबाजी की गुर का दिग्गज मान चुके हैं. टेस्ट क्रिकेट और एकदिवसीय क्रिकेट में तो कोई बुमराह के गेंदबाजी स्पेल से बचकर निकल भी सकता है, लेकिन टी-20 क्रिकेट में उनके चार ओवर डेथ वारंट के समान होते हैं. हिंदुस्तानीय टीम प्रबंधन और चयनकर्ता ने उनके वर्कलोड को भी बेहतरीन तरीके से संभाला है.

हर विश्व कप की जीत एक नायक लेकर आता है. इस बार के विश्व कप की जीत के नायक संजू सैमसन हैं. संजू सैमसन के पास हुनर है, इसका अंदाजा हर किसी को बीते दस साल से था. वह हुनर अब विश्वविजेता टीम को अपने अंजाम तक पहुंचाने में सूत्रधार बनेगा, यह टी-20 विश्व कप की तीन यादगार पारियों से साबित हुआ. संजू सैमसन की इन तीन पारियों ने हिंदुस्तान को ट्रॉफी तक पहुंचाया. लेकिन संजू और टीम इंडिया का पड़ाव अभी खत्म नहीं हुआ है. अभी एकदिवसीय विश्व कप और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जीतनी है. तभी सही मायने में टीम इंडिया का स्वर्णकाल होगा.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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