Trump Iran Deal Warning: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है. एक तरफ ओमान में दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है, जिसे ट्रंप ने बहुत अच्छा बताया है, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ईरान और उसका साथ देने वाले देशों को खुली चेतावनी दे दी है. ट्रंप ने शुक्रवार को एक बड़ा आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) साइन किया है. इसके तहत, जो भी देश ईरान के साथ बिजनेस करेगा, उस पर अमेरिका भारी टैक्स (टैरिफ) लगा सकता है.
क्या है ट्रंप का नया ‘टैरिफ प्लान’?
ट्रंप के नए आदेश के मुताबिक, अगर कोई भी देश ईरान से सीधे या घुमा-फिराकर कोई सामान या सर्विस खरीदता है, तो अमेरिका उस देश से आने वाले सामान पर भारी ड्यूटी लगा देगा. ऑर्डर में 25 प्रतिशत टैक्स का उदाहरण दिया गया है. व्हाइट हाउस के अनुसार, यह कदम ईरान के परमाणु प्रोग्राम, आतंकवाद को सपोर्ट और मिसाइल बनाने की कोशिशों को रोकने के लिए उठाया गया है. ट्रंप ने पहले ही सोशल मीडिया पर साफ कर दिया था कि ईरान से रिश्ता रखने वालों को अमेरिका के साथ बिजनेस करने की भारी कीमत चुकानी होगी.
बातचीत भी जारी, पर ‘धमकी’ के साथ
ओमान की राजधानी मस्कट में हुई बातचीत के बाद ट्रंप ने एयरफोर्स वन (राष्ट्रपति के विमान) में पत्रकारों से बात की. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि ईरान बहुत बुरी तरह से डील करना चाहता है और अगले हफ्ते फिर से बातचीत होगी. लेकिन साथ ही उन्होंने डराते हुए यह भी कहा कि हमारी बड़ी सेना (आर्मडा) और जहाजों का बेड़ा उस तरफ बढ़ रहा है और जल्द ही वहां पहुंच जाएगा. ट्रंप का सीधा मैसेज है कि अगर डील नहीं हुई, तो नतीजे बहुत गंभीर होंगे.
VIDEO | Onboard Air Force One: US President Donald Trump (@POTUS ) says, “US had very good talks with Iran, looks like Iran wants to make a deal badly.”
(Source: Third Party)
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/7TcmLAXAWp
— Press Trust of India (@PTI_News) February 7, 2026
बातचीत में कौन-कौन शामिल था?
सीएनएन की समाचार के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में अमेरिका की तरफ से स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर और एडमिरल ब्रैड कूपर शामिल थे. वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी मोर्चा संभाल रहे थे. ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने इस बातचीत को काफी सीरियस बताया है.
असली दिक्कत क्या है? (दोनों पक्षों की डिमांड्स)
दोनों देशों के बीच क्या बातचीत हुई, उसकी कुछ मुख्य बातें रॉयटर्स के मुताबिक नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं:
| मुद्दा | ईरान का स्टैंड (पक्ष) | अमेरिका की डिमांड (मांग) |
| यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) | यूरेनियम साफ करना हमारा हक है, लेकिन शुद्धता (purity) पर बात कर सकते हैं. | ईरान के अंदर यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद हो. |
| मिसाइल प्रोग्राम | मिसाइलों पर कोई चर्चा नहीं होगी, यह हमारी सुरक्षा का मामला है. | बैलिस्टिक मिसाइलों और मानवाधिकारों पर भी बात करनी होगी. |
| पाबंदियां (Sanctions) | तेल और बैंकिंग सेक्टर से तुरंत सारी पाबंदियां हटाई जाएं. | जब तक ठोस डील नहीं होती, दबाव बना रहेगा. |
| सेना की मौजूदगी | अमेरिका अपनी सेना ईरान के बॉर्डर से दूर हटाए. | अमेरिका ने इलाके में अपनी सैन्य ताकत और बढ़ा दी है. |
‘रेड लाइन’ और फ्यूचर का डर
ईरान के विदेश मंत्री अराक्छी ने साफ कहा है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब धमकियां और दबाव बंद होगा. ईरान चाहता है कि उसका तेल और पैसा फिर से ग्लोबल मार्केट में आ सके. दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अगर ईरान को यूरेनियम साफ करने की छूट दी गई, तो वह परमाणु बम बना सकता है.
इस तनाव के बीच अमेरिका ने 15 कंपनियों और 14 जहाजों पर नए प्रतिबंध भी लगा दिए हैं जो ईरान का तेल बेचने में मदद कर रहे थे. अब पूरी दुनिया की नजरें अगले हफ्ते होने वाली बातचीत पर हैं, क्योंकि अगर डिप्लोमेसी फेल हुई तो मिडिल ईस्ट में एक बड़ा युद्ध छिड़ने का डर है.
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