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पाकिस्तान का करीबी दोस्त अमेरिका के साथ खेलेगा नया दांव, पुतिन को लौटा सकता है S-400 मिसाइल सिस्टम, क्या F-35 की राह खुलेगी?

S-400 Missile System: आज की दुनिया में ताकत का स्पोर्ट्स तेजी से बदल रहा है. हर देश अपनी सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्क हो गया है. आधुनिक हथियार, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और स्टील्थ फाइटर जेट्स अब सिर्फ ताकत का प्रतीक नहीं, बल्कि जरूरत बन चुके हैं. वजह साफ है कि आज के दौर में कोई भी देश खुद को पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानता. जहां ज्यादातर देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, वहीं पाकिस्तान का सबसे करीबी दोस्त तुर्की एक अलग रास्ता चुनता दिख रहा है. तुर्की की यह रणनीति न सिर्फ उसकी सैन्य नीति को बदल सकती है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.

S-400 Missile System in Hindi: S-400 को रूस लौटाने की तैयारी? 

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की रूस से खरीदे गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को वापस लौटाने पर विचार कर रहा है. यह वही सिस्टम है, जिसे तुर्की ने करीब एक दशक पहले रूस से खरीदा था. रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी हो चुकी है. रिपोर्ट के अनुसार, अगर रूस S-400 सिस्टम वापस लेने को तैयार हो जाता है, तो तुर्की और रूस के बीच हुआ यह लंबे समय से विवादों में घिरा सैन्य सौदा समाप्त हो जाएगा. यही सौदा तुर्की के लिए अमेरिका और नाटो देशों से तनाव की बड़ी वजह बना हुआ था.

S-400 Missile System Turkey Return To Russia in Hindi: S-400 बना अमेरिका-तुर्की रिश्तों में सबसे बड़ी दीवार

तुर्की द्वारा S-400 खरीदने के बाद अमेरिका ने उसे F-35 फाइटर जेट प्रोग्राम से बाहर कर दिया था. अमेरिका और नाटो का मानना था कि अगर तुर्की S-400 और F-35 को एक साथ इस्तेमाल करता है, तो रूस को F-35 की बेहद गोपनीय तकनीक की जानकारी मिल सकती है. रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, S-400 लौटाने की यह कोशिश एर्दोगन की सोची-समझी रणनीति हो सकती है. इसका मकसद अमेरिका से रिश्ते सुधारना और दोबारा F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स हासिल करना है, जिसकी तुर्की लंबे समय से कोशिश कर रहा है.

F-35 प्रोग्राम में तुर्की की पहले अहम भूमिका थी

S-400 खरीदने से पहले तुर्की अमेरिका के नेतृत्व वाले F-35 प्रोग्राम का अहम हिस्सा था. तुर्की की कंपनियां F-35 के कई जरूरी पुर्जे बनाती थीं. तुर्की के पायलट अमेरिका के ल्यूक एयरफोर्स बेस (एरिजोना) में ट्रेनिंग भी ले रहे थे. लेकिन जैसे ही S-400 सिस्टम तुर्की पहुंचा, अमेरिका ने उसे प्रोग्राम से बाहर कर दिया. यूक्रेन की न्यूज वेबसाइट आरबीसी यूक्रेन के मुताबिक, एर्दोगन और पुतिन के बीच S-400 को लेकर बातचीत हुई है. हालांकि, रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने इस तरह के किसी औपचारिक अनुरोध से इनकार किया है.

Erdogan Secret Move F-35 Deal in Hindi: अमेरिका का बढ़ता दबाव और प्रतिबंधों की मार

अमेरिका लंबे समय से तुर्की पर दबाव बना रहा है. S-400 खरीदने के बाद अमेरिका ने CAATSA कानून के तहत तुर्की के रक्षा उद्योग पर प्रतिबंध लगाए थे. अगर तुर्की S-400 छोड़ता है, तो इन प्रतिबंधों के हटने की उम्मीद भी जताई जा रही है. अमेरिका में तुर्की के राजदूत और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी टॉम बैरक ने कहा है कि तुर्की S-400 छोड़ने के करीब है और अगले 4 से 6 महीनों में यह मुद्दा सुलझ सकता है. एक सूत्र के अनुसार, अगले साल तुर्की पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध भी हट सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की सिर्फ S-400 लौटाने की बात नहीं कर रहा, बल्कि वह रूस से इसके बदले अरबों डॉलर के मुआवजे की मांग भी कर रहा है. एक विकल्प यह बताया जा रहा है कि रूस तुर्की को तेल और गैस की कीमतों में बड़ी छूट दे सकता है.

नाटो की चिंता और भरोसे का सवाल

नाटो देशों का मानना है कि अगर तुर्की S-400 को सक्रिय रखता है, तो रूस को पश्चिमी सैन्य तकनीक से जुड़ी अहम जानकारियां मिल सकती हैं. S-400 छोड़ना तुर्की के लिए नाटो में भरोसा बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है, क्योंकि उस पर रूस के बहुत करीब होने के आरोप लगते रहे हैं.

अमेरिका की साफ शर्त: S-400 छोड़ो, तभी F-35 मिलेगा

10 दिसंबर को यह साफ हो गया कि अमेरिका की शर्त बिल्कुल स्पष्ट है. अगर तुर्की को फिर से F-35 प्रोग्राम में लौटना है, तो उसे S-400 सिस्टम पूरी तरह छोड़ना होगा. तुर्की का कहना है कि वह S-400 को नाटो सिस्टम से अलग रख सकता है, लेकिन अमेरिका इस दलील से अब तक सहमत नहीं है. सितंबर में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह तुर्की को F-35 देने पर विचार कर सकते हैं, अगर एर्दोआन अमेरिका के लिए कुछ करेगा. अब S-400 को लेकर चल रही यह पूरी कवायद उसी बयान से जोड़कर देखी जा रही है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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