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पीएचडी की यात्रा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं

मोतिहारी. महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के शैक्षिक अध्ययन विभाग में रविवार को पीएचडी की खुली मौखिकी परीक्षा का आयोजन किया गया. इस अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद की उत्तरी क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आचार्य हरिश्चंद्र सिंह राठौड़, वाह्य परीक्षक के रूप में उपस्थित रहे.मौखिक परीक्षा के उपरांत, वाह्य परीक्षक आचार्य हरिश्चंद्र सिंह राठौड़ ने अपने शोध एवं शिक्षण अनुभवों को साझा किया. उन्होंने कहा कि शिक्षकों को कक्षाओं में ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जो विद्यार्थियों को सृजनात्मक चिंतन और समस्या समाधान कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित करे. उन्होंने “महान शिक्षक ” की परिभाषा देते हुए कहा कि एक महान शिक्षक लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते हुए अपने सभी विद्यार्थियों के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाता है और उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करता है.उन्होंने शोधार्थियों को निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी और कहा कि पीएचडी की यात्रा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह शोध की गहरी समझ विकसित करने की प्रक्रिया है.उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में कहा कि शिक्षकों एवं शोधार्थियों को वैज्ञानिक मानकों के अनुसार गुणवत्तायुक्त शोध करना चाहिए ताकि हिंदुस्तान विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके. मौखिकी परीक्षा में शोधार्थी सुनील कुमार दूबे ने अपने शोध विषय “समग्र शिक्षा योजना की प्रक्रिया, प्रगति एवं संभावनाओं का राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में विश्लेषणात्मक अध्ययन ” को प्रस्तुत किया. यह शोध कार्य उन्होंने शैक्षिक अध्ययन विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रश्मि श्रीवास्तव के निर्देशन में पूर्ण किया. शोध निष्कर्ष और समग्र शिक्षा योजना की प्रभावशीलता शोधार्थी ने अपने अध्ययन में मिर्जापुर मंडल, उत्तर प्रदेश में समग्र शिक्षा योजना के प्रभावों का गहन विश्लेषण किया. उनके निष्कर्षों के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साथ समग्र शिक्षा योजना के प्रभावी समन्वय से विद्यालयी व्यवस्थाओं में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है. विशेष रूप से विद्यालयों में आधारभूत संरचना, शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या और आकलन में सकारात्मक बदलाव आए हैं.कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के नामांकन और धारण दर में वृद्धि हुई है, जिससे ड्रॉपआउट दर में कमी आई है. शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सुधार हुआ है, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और छात्र-केंद्रित बनी है.इस अवसर पर शैक्षिक अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार, कुलपति प्रतिनिधि आचार्य प्रसून दत्त सिंह, आचार्य आनंद प्रकाश, आचार्य सुनील महावर, आचार्य अजय कुमार गुप्ता, परीक्षा नियंत्रक डॉ. कृष्णकांत उपाध्याय सहित अन्य वरिष्ठ शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. श्यामनंदन, डॉ. मनीषा रानी, डॉ. पाथलोथ ओमकार, डॉ. मधु पटेल, डॉ. शत्रुघ्न प्रकाश सिंह, डॉ. अंजनी श्रीवास्तव सहित शोधार्थी आदि उपस्थित थे.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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