कुरसेला औरंगाबाद के देव थाना में पदस्थापित रहे दिवंगत पुलिस अवर निरीक्षक धनंजय कुमार सिंह का शव बुधवार सुबह खेरिया गांव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया. परिजन स्त्रीओं की चीख चित्कार से माहौल गमगीन हो उठा. समाचार को सुन ग्रामीणों सहित आसपास गांव के लोगों की भीड़ जुट गयी. असमय मौत से हर चेहरा दुख से आहत था. पार्थिव शरीर को तिरंगा से लपेट कर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए दरवाजा पर रखा गया था. राजद नेत्री कुमारी बेबी, मुखिया ललन राम, महेश राय सहित ग्रामीणों व नेतृत्वक समाजिक लोगों ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर दुख भरे भावों से अंतिम विदायी दी. भाई के असामयिक मौत की जानकारी देते हुए बड़े भाई पुलिस इंस्पेक्टर विजय कुमार सिंह ने कहा, 15 अप्रैल की सुबह नाश्ता के बाद 11 बजे दिन में धनंजय की तबियत बिगड़ने पर औरंगाबाद अस्पताल ले जाया गया था. अस्पताल में जांच उपचार में चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया. हदृयगति रुकने से उनके भाई की मौत हो गयी. खेरिया गांव में घर वालों को उनके मौत की जानकारी दोपहर 1.30 बजे मिली. उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर उसने पटना में पहला योगदान किया था. उसके बाद जहानाबाद औरंगाबाद सहित आठ स्थानों पर उनका स्थानांतरण हुआ. उसके बाद वह देव थाना में पदस्थापित हुआ था. पुलिस विभाग में नौकरी के चार साल बाद वर्ष 2013 में कटिहार में मिनु से इनका विवाह हुआ था. दामपत्य जीवन से इनके घर एक लड़की ने जन्म लिया. जिनका नाम टिक्कु रखा गया. कुरसेला प्रखंड क्षेत्र के दक्षिणी मुरादपुर पंचायत के खेरिया ग्राम निवासी गणेश प्रसाद सिंह के चार पुत्रों में धनंजय सबसे छोटा पुत्र था. चार पुत्रों में विजय कुमार सिंह व संजय कुमार सिंह पुलिस इंस्पेक्टर और धनंजय कुमार सिंह पुलिस अवर निरीक्षक एक पुत्र चन्दु कुमार सिंह विद्यालय में प्रधानाध्यापक है. पिता किसान है. दिवंगत पुलिस अवर निरीक्षक धनंजय कुमार सिंह की पत्नी मिनु रावल शिक्षिका है. यह अपने पीछे पत्नी एक पुत्री सहित भरा पुरा परिवार छोड़ गये है. जवान बेटे के असामयिक मौत ने दहला दिया माता पिता को जवान कमाउ बेटे के असामयिक मौत ने अंदर से दहला कर रख दिया. बुढ़े माता पिता को पुत्र के मौत ने विक्षिप्त सा बना दिया. चाह कर भी पुत्र के अंतिम दर्शन करने की उसे हिम्मत नहीं हो रही थी. सात वर्षीय पुत्री ने पिता को दिया मुखाग्नि दिवंगत पुलिस अवर निरीक्षक की इकलौती पुत्री टिक्कु ने त्रिमोहनी संगम के गंगा तट पर दाह संस्कार में पिता को मुखाग्नि दिया. मासूम के हाथ पिता के मुखाग्नि पर वहां मौजूद लोगों के आंखों से अश्रू बह निकला.
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