Hot News

प्राइवेट स्कूलों में किताबों के नाम पर लूट, 3442 रुपये की हो जाता है एनसीईआरटी के 260 वाला बुकसेट

रांची से राजेश झा की रिपोर्ट

Ranchi News: शिक्षा का उद्देश्य भले ही ज्ञान देना हो, लेकिन मौजूदा दौर में यह अभिभावकों के लिए महंगा सौदा बन गया है. स्कूलों और प्रकाशकों के बीच कथित ‘गठजोड़’ के कारण किताबों की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. स्थिति यह है कि जहां एनसीईआरटी की कक्षा एक की किताबें मात्र 260 रुपये में उपलब्ध हैं. वहीं, डीएवी स्कूलों में यही दाम 517 रुपये तक पहुंच जाता है. प्राइवेट स्कूलों में तो किताबों का पूरा सेट 3442 रुपये तक में बेचा जा रहा है, जो आम परिवारों की जेब पर भारी पड़ रहा है.

120 करोड़ का कारोबार, 36 करोड़ कमीशन

बताया जा रहा है कि इस पूरे सिस्टम में करीब 120 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा है, जिसमें से लगभग 36 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में जुड़े पक्षों तक पहुंचता है. इसके अलावा, हर साल किताबों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हो रही है. सीबीएसई और आइसीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी किताबों के साथ निजी प्रकाशकों की रेफरेंस बुक लेना भी लगभग अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों की परेशानी और बढ़ गई है.

120 करोड़ के कारोबार में 160 स्कूल शामिल

रांची में स्कूली किताब-कॉपी का कारोबार इस साल करीब 120 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इसमें सीबीएसई, आईसीएसई, के लगभग 160 स्कूल शामिल हैं, जहां औसतन 2000 छात्र पढ़ते हैं. हर छात्र पर करीब 5000 रुपये का खर्च आता है, जिससे लगभग 90 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. इसके अलावा, 400 से अधिक गैर मान्यता प्राप्त स्कूल हैं, जहां औसतन 250 छात्र पढ़ते हैं और प्रति छात्र करीब 3000 रुपये खर्च होते हैं. इससे करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कारोबार जुड़ता है. इस कुल कारोबार में लगभग 30 प्रतिशत यानी करीब 36 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में स्कूलों तक पहुंचने की बात सामने आई है.

हर साल बढ़ रही कीमतें, अभिभावक परेशान

किताबों की कीमतों में हर साल 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हो रही है. पिछले साल जहां कक्षा एक के लिए अभिभावकों को लगभग 3500 रुपये खर्च करने पड़ते थे, वहीं इस साल यह राशि बढ़कर 5195 रुपये हो गई है. कक्षा पांच की बात करें, तो मुख्य विषयों के अलावा 21 किताबें दी जा रही हैं, जिनकी कुल कीमत 7580 रुपये तक पहुंच गई है. नर्सरी और प्रेप कक्षाओं के लिए भी 3000 से 3500 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है. इस बढ़ती कीमत ने मध्यम वर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जिनके लिए बच्चों की पढ़ाई एक बड़ा आर्थिक बोझ बनती जा रही है.

कितना खरीदने का पता बताते हैं स्कूल

राजधानी रांची में अप्रैल के पहले सप्ताह से निजी स्कूलों का नया सत्र शुरू होने जा रहा है. साथ ही स्कूलों ने परीक्षाफल के साथ किताब-कॉपी की सूची भी अभिभावकों को थमा दी है. कई स्कूलों द्वारा यह भी बताया जा रहा है कि किताबें कहां से खरीदनी हैं. कहीं लिखित पर्ची के जरिये, तो कहीं मौखिक रूप से. इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि स्कूलों और प्रकाशकों के बीच गहरे संबंध हैं. हर साल की तरह इस बार भी बुक लिस्ट में बदलाव किया गया है.

कंटेंट बराबर, प्रकाशक चेंज

किताबों का कंटेंट लगभग वही है, लेकिन प्रकाशक का नाम बदल दिया जाता है. उदाहरण के तौर पर गणित की प्रसिद्ध किताबों के नये संस्करण केवल नये कवर के साथ पेश किये जा रहे हैं. इसके अलावा कुछ प्रकाशकों ने कुछ अध्यायों में बदलाव भी किया है, ताकि पुराने संस्करण का उपयोग न हो सके और अभिभावकों को नयी किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़े. वहीं, एनसीइआरटी की किताबें नहीं दी जा रही हैं.

प्रिंट रेट पर किताबें, फिर भी महंगी क्यों?

स्कूलों की ओर से अभिभावकों को किताबें प्रिंट रेट पर ही खरीदने को कहा जाता है. लेकिन सवाल यह है कि जब किताबें प्रिंट रेट पर मिल रही हैं, तो कीमत इतनी अधिक क्यों है? दरअसल, कई किताबों में पन्नों की संख्या बेहद कम होती है, फिर भी उनकी कीमत 300 से 350 रुपये तक रखी जाती है. खासकर मोरल साइंस, जनरल नॉलेज और एटलस जैसी किताबों में यह प्रवृत्ति ज्यादा देखी जा रही है.

निजी प्रकाशकों की किताबों का दबदबा

सीबीएसई और आइसीएसई स्कूलों में एनसीइआरटी की किताबों के साथ-साथ निजी प्रकाशकों की रेफरेंस बुक लेना लगभग अनिवार्य कर दिया गया है. ये किताबें एनसीईआरटी की तुलना में पांच से छह गुना तक महंगी होती हैं. स्कूलों द्वारा इन्हें कोर्स में शामिल करने के पीछे मोटे कमीशन का लालच बताया जा रहा है. प्रकाशक और बुक सेलर पहले से ही कमीशन तय कर लेते हैं और उसी के आधार पर किताबों को कोर्स में शामिल किया जाता है. कक्षा एक से आठ तक के पाठ्यक्रम में हिंदी, गणित, विज्ञान के अलावा जीके, मोरल साइंस, कंप्यूटर जैसी कई अतिरिक्त किताबें शामिल कर दी जाती हैं, जिससे कुल खर्च और बढ़ जाता है. इस वर्ष कोर्स में बदलाव को लेकर कक्षा 9वीं व 10वीं की एनसीइआरटी की किताब नहीं मिल रही है.

दिसंबर से ही शुरू हो जाती है लूट की तैयारी

नए सत्र में अभिभावकों से लूट की तैयारी दिसंबर से ही शुरू हो जाती है. निजी प्रकाशकों के डीलर स्कूलों से संपर्क कर कमीशन तय करते हैं. इसके बाद यह निर्णय लिया जाता है कि किस प्रकाशक की कौन-कौन सी किताबें कोर्स में शामिल होंगी. इस प्रक्रिया में स्कूलों को लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है. इसके अलावा, कई बार स्कूल प्रबंधन को अन्य लाभ जैसे विदेश यात्रा के ऑफर भी दिए जाते हैं. बुक सेलरों को भी 20 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता है, जबकि वे स्कूलों को 2.5 से तीन लाख रुपये तक भुगतान करते हैं, ताकि अभिभावकों को उनकी दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए भेजा जाये.

100 की किताब ऐसे हो जाती है 400 की

एक उदाहरण से समझें तो सातवीं कक्षा की एक विज्ञान की किताब की कीमत 469 रुपये है. इसमें से 140 रुपये (30 प्रतिशत) स्कूल को और 94 रुपये (20 प्रतिशत) बुक सेलर को कमीशन के रूप में जाते हैं. इसके अलावा, 70 रुपये (15 प्रतिशत) मार्केटिंग पर खर्च होते हैं. इस तरह कुल 65 प्रतिशत राशि कमीशन और मार्केटिंग में चली जाती है. आखिर में प्रकाशक के पास करीब 165 रुपये बचते हैं, जिसमें से यदि 65 रुपये लाभ मान लिया जाये, तो किताब की वास्तविक कीमत लगभग 100 रुपये बैठती है. इसके विपरीत, एनसीईआरटी की किताबें अपनी मूल कीमत पर ही उपलब्ध होती हैं.

कक्षा एक से आठ तक सबसे ज्यादा मुनाफा

कक्षा एक से आठ तक के कोर्स में सबसे ज्यादा मुनाफा होता है, क्योंकि इन कक्षाओं में अतिरिक्त विषयों की किताबें ज्यादा शामिल की जाती हैं. इनकी कीमत 200 से 400 रुपये तक होती है. इसी कारण इन कक्षाओं में एनसीइआरटी किताबों की हिस्सेदारी केवल 30 प्रतिशत है, जबकि कक्षा 9 से 12 तक यह बढ़कर 60 प्रतिशत तक हो जाती है.

एनसीईआरटी की किताबों का मूल्य

  • कक्षा-1 : 260 रुपये
  • कक्षा-2 : 260 रुपये
  • कक्षा-3 : 650 रुपये
  • कक्षा-4 : 520 रुपये
  • कक्षा-5 : 390 रुपये
  • कक्षा-6 : 975 रुपये
  • कक्षा-7 : 780 रुपये
  • कक्षा-8 : 650 रुपये

डीएवी स्कूलों में किताबों का मूल्य

  • कक्षा-1 : 517 रुपये
  • कक्षा-2 : 550 रुपये
  • कक्षा-3 : 725 रुपये
  • कक्षा-4 : 815 रुपये
  • कक्षा-5 : 1009 रुपये
  • कक्षा-6 : 1208 रुपये
  • कक्षा-7 : 1314 रुपये
  • कक्षा-8 : 1620 रुपये

इसे भी पढ़ें: देवघर के छात्रों का हैरतअंगेज कारनामा, अपहरण से लेकर ज्वैलरी पर करते हैं हाथ साफ

निजी स्कूलों में किताबों का मूल्य

  • कक्षा-1 : 3442 रुपये
  • कक्षा-2 : 3490 रुपये
  • कक्षा-3 : 4193 रुपये
  • कक्षा-4 : 4189 रुपये
  • कक्षा-5 : 5042 रुपये
  • कक्षा-6 : 5807 रुपये
  • कक्षा-7 : 6007 रुपये
  • कक्षा-8 : 5340 रुपये

नोट : इस सूची में कॉपी और स्टेशनरी का मूल्य नहीं दिया गया है.

इसे भी पढ़ें: धनबाद में गड़बड़झाला: रैयतों की जमीन बनी प्रशासनी, 15 हजार परिवारों पर छाया संकट

The post प्राइवेट स्कूलों में किताबों के नाम पर लूट, 3442 रुपये की हो जाता है एनसीईआरटी के 260 वाला बुकसेट appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top