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बंगाल चुनाव 2026 में ‘बाबरी’ मस्जिद ने बदला सियासी गणित, ढह जायेगा TMC का ‘अल्पसंख्यक’ किला?

Murshidabad Babri Masjid Politics: बंगाल चुनाव 2026 के बीच मुर्शिदाबाद जिला ‘प्रतिस्पर्धी सांप्रदायिकता’ (Competitive Communalism) की प्रयोगशाला बन गया है. जिले की 3 अहम सीटों – भरतपुर, रेजीनगर और बेलडांगा में विकास और रोजगार के मुद्दे गौण हो गये हैं. चर्चा के केंद्र में आ गयी है एक निर्माणाधीन मस्जिद. अयोध्या के ढांचे की तर्ज पर बनायी जा रही इस प्रस्तावित मस्जिद ने न केवल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, बल्कि हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के लिए भी नये समीकरण पैदा कर दिये हैं.

हुमायूं कबीर का मास्टरस्ट्रोक या सियासी जुआ?

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के निलंबित विधायक और अब आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर इस पूरे विमर्श के केंद्र में हैं. उन्होंने 6 दिसंबर 2025 को रेजीनगर में इस मस्जिद की नींव रखी थी.

  • इमोशनल कार्ड : कबीर अब इस मस्जिद को मुसलमानों के ‘सम्मान और नेतृत्वक पहचान’ से जोड़ रहे हैं. उनका कहना है कि बंगाल के मुसलमानों को अब अपनी खुद की स्वतंत्र आवाज चाहिए.
  • सोशल मीडिया पर लहर : सिर पर ईंटें ढोते समर्थकों के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिससे यह निर्माण एक बड़े नेतृत्वक प्रतीक में बदल गया है.

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TMC के ‘वोट बैंक’ में सेंध का खतरा

मुर्शिदाबाद टीएमसी का मजबूत गढ़ रहा है. यहां करीब 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. वर्ष 2021 में टीएमसी ने मुस्लिम बहुल 85 में से 75 सीटें जीती थीं. अब कबीर की पार्टी और ओवैसी की AIMIM का गठबंधन टीएमसी के इस वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है. युवा मतदाता, जो टीएमसी और कांग्रेस दोनों से निराश हैं, वे कबीर के इस ‘बाबरी’ कार्ड की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

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Murshidabad Babri Masjid Politics: BJP की नजर ‘हिंदू ध्रुवीकरण’ पर

भाजपा इस मुद्दे को अपने हक में देख रही है. भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि ‘बाबरी’ के नाम पर हो रहा यह निर्माण हिंदू मतदाताओं को एकजुट करेगा. इसे ‘तुष्टीकरण की नेतृत्व’ के चरम उदाहरण के तौर पर पेश कर भाजपा ध्रुवीकरण की कोशिश में है, जो उसे त्रिकोणीय मुकाबले में फायदा पहुंचा सकता है.

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इन 3 सीटों पर सबकी नजर

  • रेजीनगर विधानसभा : इस सीट पर 65 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं और AJUP के प्रमुख हुमायूं कबीर खुद यहां से चुनाव लड़ रहे हैं.
  • भरतपुर विधानसभा : हुमायूं कबीर का इस विधानसभा क्षेत्र में पुराना प्रभाव है, जो टीएमसी की राह मुश्किल कर रहा है.
  • बेलडांगा विधानसभा : सांप्रदायिक तनाव के इतिहास वाली इस सीट पर ध्रुवीकरण की सबसे ज्यादा संभावना है.

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भाजपा को मिल सकती है बढ़त : विश्लेषक

नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि अगर मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा भी टीएमसी से छिटककर कबीर की ओर जाता है, तो भाजपा को सीधे तौर पर बढ़त मिल सकती है. मुर्शिदाबाद का यह ‘बाबरी’ फैक्टर पूरे बंगाल चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की ताकत रखता है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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