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बंगाल में ‘महाभारत’ : ममता बनर्जी बनाम चुनाव आयोग, 24 घंटे के आरोप-प्रत्यारोप

जरूरी बातें

Mahabharata in Bengal: विधानसभा चुनाव 2026 से पहले पश्चिम बंगाल एक अखाड़े में तब्दील हो गया है, जहां पिछले 15 सालों से प्रशासन चला रही तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी हर दिन चुनाव आयोग और केंद्र प्रशासन पर हमला बोल रहे हैं. इन दिनों चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तृणमूल कांग्रेस के निशाने पर हैं. खासकर पिछले 24 घंटे के दौरान ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी से लेकर चंद्रिमा भट्टाचार्य और अन्य टीएमसी नेताओं ने सीईसी पर कई गंभीर आरोप लगाये.

इन मुद्दों पर ममता बनर्जी ने बोला हमला

बंगाल विधानसभा 2026 की तैयारियों की समीक्षा के लिए 2 दिन के दौरे पर कोलकाता आये चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार पर बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने लगातार हमला बोला. महज 24 घंटे के भीतर अधिकारियों के सम्मान, वोटर लिस्ट (SIR), चुनावी हिंसा और संवैधानिक मर्यादा के मुद्दे पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने आयोग और हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा, तो चुनाव आयोग ने मंगलवार को इन सभी बिंदुओं पर अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब दिया.

अधिकारियों को सम्मान का मुद्दा

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने पश्चिम बंगाल के अफसरों को धमकी दी. ममता बनर्जी ने सोमवार को धर्मतला के मेट्रो चैनल पर धरनास्थल से कहा कि आयोग का यह दुस्साहस है, जिसे स्वीकार नहीं किया जायेगा. चुनाव आयोग ने मंगलवार को कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना है. इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी.

वोटर लिस्ट को नेतृत्वक हथियार बनाने का आरोप

वोटर लिस्ट और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के मुद्दे पर ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाना नेतृत्वक हथियार है. लाखों लोगों को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है. इस आरोप के जवाब में आयोग ने लोगों को आश्वस्त किया है कि किसी भी योग्य वोटर का नाम लिस्ट से नहीं हटाया जायेगा. साथ ही कहा कि कोई अवैध वोटर मतदाता सूची में नहीं रहेगा. आयोग ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल विसंगतियों को दूर करना है.

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चुनावी हिंसा के आरोपों का जवाब 100 फीसदी वेबकास्टिंग

चुनावी हिंसा को भी ममता बनर्जी ने मुद्दा बनाया. कहा कि वोटर को भाजपा डरा-धमकाकर भाजपा सत्ता हासिल करना चाहती है. जनता इसका जवाब देगी. वोटर को डराने-धमकाने के मुद्दे पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा कि 100 फीसदी बूथ पर वेबकास्टिंग होगी. बंगाल में इस बार स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव कराना चुनाव आयोग की गारंटी है.

संवैधानिक मर्यादा की ECI को दिलायी याद, तो मिला जवाब

संवैधानिक मर्यादा की भी चुनाव आयोग को याद दिलायी गयी. वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि दिल्ली के अधिकारी पश्चिम बंगाल की नौकरशाही पर दबाव बना रहे हैं. इसके जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग संवैधानिक दायरे में रहकर काम कर रहा है. सभी को समान अवसर देगा.

चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने वाली 3 बातें

इस पूरे टकराव में 3 मुख्य बातें उभरकर सामने आ रही हैं, जो चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं.

  1. स्त्री वोटर और ‘पहचान’ का मुद्दा : ममता बनर्जी SIR की प्रक्रिया को ‘बंगाल की अस्मिता’ और ‘पहचान की लड़ाई’ से जोड़ रही हैं. बादुरिया की आत्महत्या जैसी घटनाओं को वे भावनात्मक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि स्त्री वोटर्स के बीच संदेश जाये कि उनकी प्रशासन ही उनकी रक्षक है.
  2. चुनाव आयोग का ‘टेक्नोलॉजी कार्ड’ : चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग का दांव चलकर पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रशासन की भूमिका को सीमित करने के संकेत दिये हैं. यह भाजपा की उस पुरानी मांग का जवाब है, जिसमें वे हर बूथ पर केंद्रीय बलों की तैनाती और कड़ी निगरानी की बात करते रहे हैं.
  3. सुप्रीम कोर्ट की ढाल : चुनाव आयोग अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर काम कर रहा है. कोर्ट द्वारा नियुक्त 250 न्यायिक अधिकारियों (जजों) की मौजूदगी ने ममता बनर्जी प्रशासन के ‘प्रशासनिक दबाव’ वाले आरोपों को कमजोर कर दिया है, क्योंकि अब फैसला अधिकारियों के नहीं, जजों के हाथ में है.
मुद्दा ममता बनर्जी का आरोप/पक्ष चुनाव आयोग (CEC) का जवाब/स्टैंड
अधिकारियों का सम्मान CEC ने हमारे अफसरों को धमकाया. यह उनका दुस्साहस है, जो स्वीकार्य नहीं है. हमारा उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना है. किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी.
वोटर लिस्ट (SIR) नाम हटाना एक नेतृत्वक हथियार है. लाखों लोगों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है. किसी भी पात्र (Eligible) मतदाता का नाम नहीं हटेगा. हम केवल विसंगतियों को दूर कर रहे हैं.
चुनावी हिंसा भाजपा डरा-धमकाकर सत्ता हासिल करना चाहती है, जनता इसका जवाब देगी. 100% बूथों पर वेबकास्टिंग होगी. बंगाल में इस बार स्वतंत्र और शांतिपूर्ण मतदान हमारी गारंटी है.
संवैधानिक मर्यादा दिल्ली के अधिकारी राज्य की नौकरशाही पर दबाव बना रहे हैं. आयोग संवैधानिक दायरे में रहकर काम कर रहा है और सभी को समान अवसर (Level Playing Field) देगा.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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