Bihar Government: बिहार प्रशासन ने जमीन की खरीद-बिक्री को सेफ और ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए रजिस्ट्री प्रक्रिया में बदलाव किया है. अब राज्य में किसी भी जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री सिर्फ कागजों के आधार पर नहीं होगी, बल्कि GIS (Geographic Information System) तकनीक के जरिए उसका फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दी गई है.
विभाग ने साफ कर दिया है कि रजिस्ट्री से पहले जमीन की सटीक लोकेशन, उसका असली क्षेत्रफल और उस पर बने निर्माण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि दस्तावेजों और हकीकत में कोई अंतर न रहे.
किस मकसद से किया गया बदलाव
इस नई व्यवस्था को लागू करने का मकसद राजस्व की चोरी रोकना और गलत जानकारी देकर की जाने वाली धोखाधड़ी को खत्म करना है. अक्सर समाचार आती है कि लोग जमीन पर मकान या निर्माण होने के बावजूद उसे खाली दिखाकर कम स्टांप ड्यूटी चुकाते हैं, जिससे प्रशासन को भारी नुकसान होता है.
अब GIS तकनीक की मदद से जमीन की नेचर ऑफ लैंड तुरंत सामने आ जाएगी. इससे न केवल प्रशासनी खजाने में सही टैक्स पहुंचेगा, बल्कि खरीदारों को भी यह भरोसा रहेगा कि वह जो संपत्ति खरीद रहे हैं वह पूरी तरह सही और विवाद मुक्त है.
बिहार में जमीन रजिस्ट्री का सिस्टम बदला. अब सिर्फ कागजों पर नहीं, GIS तकनीक से जमीन का मौके पर फिजिकल वेरिफिकेशन होगा. रजिस्ट्री से पहले लोकेशन, क्षेत्रफल और निर्माण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. प्रशासन का लक्ष्य—जमीन खरीद-बिक्री में पारदर्शिता और धोखाधड़ी पर रोक.… pic.twitter.com/MYXsNDDtPI
— Naya Vichar (@prabhatkhabar) January 25, 2026
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
नियमों को सख्त बनाते हुए विभाग ने अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है. अब निबंधन के लिए आवेदन मिलने के 3 दिनों के भीतर अधिकारियों को जमीन का मौका मुआयना करना होगा. शहरी इलाकों में खुद निबंधन पदाधिकारी जांच करेंगे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी जिम्मेदारी अन्य कर्मियों को दी गई है.
ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने के लिए बड़े अधिकारी कम से कम 10 फीसदी मामलों की दोबारा जांच करेंगे. फ्लैट्स के मामले में बिल्डर और रेरा (RERA) के साथ तालमेल बिठाकर डेटा का मिलान किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे.
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लोगों के लिए राहत भरी समाचार
डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन अब नॉन-इनकंबरेंस सर्टिफिकेट और डॉक्यूमेंट की सही कॉपी ऑनलाइन जारी करेगी. विभाग के सचिव अजय यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राजस्व के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अटके मामलों को जल्द निपटाएं और सप्ताह में कम से कम तीन दिन ऑफिस का इंस्पेक्शन करें. यह बड़ा कदम बिहार में जमीन रजिस्ट्री को पुराने ढर्रे से निकालकर पूरी तरह हाईटेक और सेफ बना देगा.
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