Bihar News: पटना में एक अप्रैल से लागू स्कूली ऑटो और ई-रिक्शा पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है. करीब 10 हजार से अधिक चालकों के सामने रोजगार की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है. ऑटो यूनियन लगातार इस फैसले का विरोध कर रही है और परिवहन विभाग को पत्र लिखकर नियम में राहत की मांग कर रही है.
ऑटो यूनियन के महासचिव राजेश चौधरी ने कहा कि पहले बिना ओवरलोड और सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए ऑटो चालकों को स्कूल संचालन की अनुमति थी, लेकिन अब दुर्घटना से बचाव का हवाला देकर यह फैसला लिया गया है, जो अनुचित है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सभी ऑटो चालक हड़ताल और आंदोलन की राह पर उतरेंगे.
अभिभावकों और स्कूलों को भी हो रही परेशानी
इस फैसले से केवल ऑटो चालक ही नहीं, बल्कि अभिभावक और स्कूल प्रबंधन भी परेशान हैं. कई स्कूलों ने खुले तौर पर कहा है कि वे इस नियम को अमल में नहीं ला पा रहे हैं, क्योंकि इससे छात्रों की उपस्थिति प्रभावित हो रही है और वैकल्पिक व्यवस्था पर्याप्त नहीं है.
ई-रिक्शा पर सख्ती, ऑटो को मिल सकती है राहत
सूत्रों की मानें तो ई-रिक्शा से स्कूली बच्चों को ले जाने पर प्रतिबंध जारी रह सकता है, लेकिन ऑटो चालकों को राहत मिल सकती है. उन्हें बिना ओवरलोडिंग के स्कूल संचालन की अनुमति दी जा सकती है. हालांकि इस मुद्दे पर जिला प्रशासन अब भी असमंजस में है.
आज होगी निर्णायक बैठक
सोमवार को परिवहन निगम, ट्रैफिक एसपी और जिला प्रशासन के बीच इस मुद्दे को लेकर अहम बैठक होने जा रही है. इसी बैठक में तय होगा कि प्रतिबंध को पूरी तरह लागू किया जाएगा या उसमें ढील दी जाएगी. ट्रैफिक एसपी अपराजित लोहान ने स्पष्ट किया है कि बैठक के बाद ही पुलिस कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा. ट्रैफिक विभाग द्वारा ऑटो चालकों को दी गई एक हफ्ते की मोहलत भी अब समाप्त हो चुकी है.
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