Bhabanipur Election Strategy 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का सबसे बड़ा और रोमांचक मुकाबला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में होने जा रहा है. यहां मुकाबला केवल 2 पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ‘इमोशनल अपील’ और भाजपा की ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के बीच है. नंदीग्राम की हार के बाद ममता बनर्जी के लिए यह साख की लड़ाई है. शुभेंदु अधिकारी के लिए ‘मिनी इंडिया’ कहे जाने वाले इस क्षेत्र में सेंध लगाने का बड़ा मौका है.
TMC की रणनीति : घर की बेटी और इमोशनल कनेक्ट
तृणमूल कांग्रेस ने भवानीपुर में आक्रामकता की बजाय भावनाओं का कार्ड स्पोर्ट्सा है. पार्टी ने नया नारा दिया है- बांग्लार उन्नयन घोरे घोरे, घोरेर मेये भबानीपुरे (बंगाल का विकास घर-घर में, घर की बेटी भवानीपुर में). ममता बनर्जी के निवास क्षेत्र (वार्ड 73 में) खास ‘फोटो कॉर्नर’ बनाये गये हैं, जहां लोग ममता बनर्जी के कटआउट के साथ सेल्फी ले सकते हैं.
Bhabanipur Election Strategy 2026: घर-घर जाकर बांटे जा रहे पर्चे
तृणमूल कांग्रेस ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में डोर-टू-डोर कैंपेन शुरू कर दिया है. पार्षद घर-घर जाकर विकास कार्यों के पर्चे बांट रहे हैं और जनता से अपनी ‘बेटी’ का समर्थन करने और उनके साथ खड़े होने की अपील कर रहे हैं. अभिषेक बनर्जी ने यहां जीत का अंतर 60,000 के पार ले जाने का लक्ष्य रखा है. 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी 58 हजार वोट से जीतीं थीं.
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BJP का चक्रव्यूह : जातियों का गणित और रामनवमी
भाजपा ने भवानीपुर को ‘अजेय’ मानना बंद कर दिया है. पार्टी के पास यहां के हर समुदाय का सटीक डेटा है.
- जातीय समीकरण : भाजपा के आंतरिक सर्वे के अनुसार, यहां 26.2 प्रतिशत कायस्थ, 24.5 प्रतिशत मुस्लिम, 14.9 प्रतिशत पूर्वी हिंदुस्तान के प्रवासी, 10.4 प्रतिशत मारवाड़ी और 7.6 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाता हैं.
- रामराज्य कार्ड : शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में सीएम आवास के पास से गुजरी रामनवमी यात्रा में शामिल होकर ‘तुष्टीकरण बनाम सुशासन’ का मुद्दा गर्म कर दिया है. भाजपा का लक्ष्य बंगाली और गैर-बंगाली हिंदुओं को एकजुट करना है.
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वोटर लिस्ट का ‘स्पोर्ट्स’ और बदलता रुझान
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद भवानीपुर की लड़ाई सांख्यिकी (Statistics) में उलझ गयी है.
- वोटर लिस्ट से नाम हटना : SIR के तहत भवानीपुर से 47,000 नाम हटाये गये हैं. जांच के दायरे में आये नामों में 56 प्रतिशत मुस्लिम हैं. आबादी में उनकी हिस्सेदारी मात्र 24 प्रतिशत है. टीएमसी इसे अपने समर्थकों को निशाना बनाने की साजिश बता रही है.
- वोट का घटता अंतर : वर्ष 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी 58,000 वोटों से जीती थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में यहां टीएमसी प्रत्याशी की बढ़त घटकर महज 8,297 रह गयी. 8 वार्डों में से 5 में भाजपा प्रत्याशी को टीएमसी से ज्यादा वोट मिले.
भाजपा ने ममता बनर्जी को डिफेंसिव मोड में ला दिया – विश्लेषक
नेतृत्वक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती का मानना है कि भाजपा ने वैचारिक ध्रुवीकरण के जरिये ममता बनर्जी को डिफेंसिव मोड (रक्षात्मक स्थिति) में ला दिया है. भवानीपुर अब वह ‘अभेद्य दुर्ग’ नहीं रहा, जो कभी हुआ करता था. अबकी बार ममता बनर्जी अपना किला बचा पायेंगी या नहीं, इसका फैसला 4 मई को होगा, जब बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आयेंगे.
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