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महाशिवरात्रि पर झारखंड के इस मंदिर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़, कई राज्यों से आते हैं लोग

बगोदर से गौरव कुमार की रिपोर्ट

Mahashivratri: झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर-हजारीबाग रोड पर जमुनिया नदी के तट स्थित हरिहर धाम मंदिर महाशिवरात्रि के मौके पर श्रद्धा और भक्ति का विराट केंद्र बन जाता है. हर साल यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर परिसर शिवभक्ति के जयघोष से गूंज उठता है और चारों ओर हर-हर महादेव की ध्वनि सुनाई देती है.

देवघर के बाद दूसरा प्रमुख शिवधाम

झारखंड में बाबा बैद्यनाथ धाम के बाद हरिहर धाम को विशेष स्थान प्राप्त है. यह मंदिर न केवल राज्य में बल्कि देशभर में प्रसिद्ध है. यहां झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं.

1980 के दशक में हुई स्थापना

हरिहर धाम मंदिर की स्थापना वर्ष 1981 के आसपास मानी जाती है. इसका निर्माण कोलकाता निवासी संस्थापक बाबा अमरनाथ मुखोपाध्याय द्वारा कराया गया था. बताया जाता है कि वे 1980 के आसपास बगोदर पहुंचे और उन्होंने यहां इस भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया. मंदिर को आकर्षक स्वरूप देने के लिए कोलकाता के कारीगरों ने विशेष योगदान दिया. निर्माण कार्य में मुस्लिम समुदाय के राजमिस्त्रियों का भी सहयोग रहा, जो सामाजिक समरसता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है.

65 फीट ऊंचा भव्य शिवलिंग

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल बाहरी ढांचा है, जो शिवलिंग के आकार में बना है. लगभग 65 फीट ऊंचा यह संरचना दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है. मंदिर के अंदर गर्भगृह में भगवान शिव का पवित्र शिवलिंग स्थापित है. सामने नंदी महाराज विराजमान हैं. गर्भगृह में मां पार्वती, भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण मंदिर और संकट मोचन हनुमान मंदिर भी स्थित हैं. एक कोने में संस्थापक बाबा अमरनाथ मुखोपाध्याय की प्रतिमा भी स्थापित है, जहां श्रद्धालु श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.

विवाह के लिए प्रसिद्ध है हरिहर धाम

हरिहर धाम मंदिर को विवाह की विशेष मान्यता प्राप्त है. स्थानीय लोगों के अनुसार जिन युवाओं के विवाह में बाधा आती है, वे यहां पूजा-अर्चना करते हैं तो भगवान शिव उनकी मनोकामना पूरी करते हैं. यही कारण है कि मंदिर चट मंगनी और पट विवाह के लिए भी प्रसिद्ध है. लग्न के दिनों में यहां बड़ी संख्या में विवाह संपन्न होते हैं. मंदिर स्थापना से अब तक लाखों जोड़े यहां परिणय सूत्र में बंध चुके हैं. वर-वधू भगवान शिव और माता पार्वती को साक्षी मानकर सात फेरे लेते हैं. देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां विवाह करने पहुंचते हैं.

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती भीड़

हालांकि पूरे वर्ष मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन सावन माह और महाशिवरात्रि पर यहां विशेष आयोजन होता है. सैकड़ों की संख्या में भक्त जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. महाशिवरात्रि के अवसर पर चार पहर की पूजा की जाती है, जिसमें भक्तगण पूरी श्रद्धा से भाग लेते हैं. मंदिर के पुजारी विजय पाठक के अनुसार इस वर्ष भी महाशिवरात्रि की भव्य तैयारी की जा रही है. सुरक्षा, स्वच्छता और जल व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

समय के साथ बढ़ी सुविधाएं

समय के साथ हरिहर धाम मंदिर का विस्तार भी हुआ है. हजारीबाग रोड पर करीब एक किलोमीटर की दूरी तक सुविधायुक्त मैरिज हॉल और अन्य व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं. मंदिर परिसर में पार्किंग, पेयजल और विश्राम की सुविधाएं बढ़ाई गई हैं. इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और विवाह समारोह में शामिल होने वाले लोगों को सुविधा मिलती है.

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आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक

हरिहर धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का भी प्रतीक है. इसके निर्माण में विभिन्न समुदायों की भागीदारी और यहां होने वाले विवाह समारोह इस बात का प्रमाण हैं कि आस्था लोगों को जोड़ती है. महाशिवरात्रि के अवसर पर जब हजारों दीप जलते हैं और भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, तब यह मंदिर भक्ति और विश्वास का जीवंत प्रतीक बन जाता है. झारखंड समेत देशभर से आने वाले श्रद्धालु यहां न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों की शुरुआत भी यहीं से करते हैं. हरिहर धाम मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है और आने वाले वर्षों में इसकी ख्याति और बढ़ने की उम्मीद है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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