Women Reservation : नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को प्रशासन जल्दी ही लागू करना चाहती है, ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव में स्त्रीओं की भागीदारी बढ़ें. प्रशासन की इस योजना से स्त्री सांसद खुश हैं और उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन इस योजना को लागू करती है, तो शासन में स्त्रीओं की भागीदारी बढ़ेगी.
नेतृत्व में स्त्रीओं की भागीदारी बढ़ेगी
पीटीआई न्यूज एजेंसी से बात करते हुए जनता दल (यू) की सांसद लवली आनंद ने कहा कि यह स्वागतयोग्य कदम है और इससे नेतृत्व में स्त्रीओं की अधिक भागीदारी होगी और देश प्रगति की ओर तेजी से जाएगा. उन्होंने संसद भवन परिसर में मीडिया से कहा कि जब स्त्रीएं आगे आएंगी, तभी देश प्रगति करेगा. पुरुष और स्त्रीएं एक गाड़ी के दो पहियों की तरह हैं. प्रधानमंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री दोनों ने स्त्रीओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम किया है.
भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि स्त्री आरक्षण कानून के पारित होने से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की ‘आधी आबादी’ से किया गया एक पुराना वादा पूरा हो गया है. सहरावत ने कहा, ‘इस देश में कई लोगों ने स्त्रीओं के बारे में बात की है, लेकिन नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाने का प्रयास और ऐसा करने में सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री को जाता है.
विपक्ष की मांग, आरक्षण के मानदंड तय किए जाएं
समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने भी इस पहल का स्वागत किया, लेकिन कहा कि आरक्षण कैसे लागू किया जाएगा, इस पर स्पष्टता की जरूरत है. उन्होंने कहा, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारे देश में स्त्रीओं के लिए आरक्षण हो, लेकिन इसे कैसे लागू किया जाएगा, आरक्षण के मानदंड क्या होंगे, यह सब देखने की जरूरत है.
सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि कि प्रशासन यह चाहती है कि वह लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के लिए परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से पहले स्त्री आरक्षण कानून लागू कर दे, ताकि आगामी चुनावों में स्त्रीओं का इसका लाभ मिल सके. गृह मंत्री इसके लिए एनडीए के नेताओं के साथ बैठक करके उनमें आम सहमति बना रहे हैं, अगर सहमति बन गई तो संशोधन विधेयक इस सप्ताह लाए जा सकते हैं. विपक्षी दलों ने प्रशासन से मांग की है कि अगले महीने विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद स्त्री आरक्षण कानून पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि इसे लागू कैसे किया जाएगा इसपर बात हो सके.
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