Chirag Paswan: पटना. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एनडीए नेताओं द्वारा दिए गए बयानों और फैसलों के खिलाफ उंगली उठाई है. बीजेपी के नेता छत और सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक और नवरात्रि में मांस की दुकानें बंद करने के पक्ष में हैं. वहीं दूसरी तरफ चिराग पासवान ने अपने ही नेताओं को कठघरे में खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा कि कौन कहां नमाज पढ़ेगा, नवरात्रि में दुकानें खुली रहेंगी या बंद रहेंगी, ये सब बेकार की बातें हैं. इस पर चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं है.
इसपर चर्चा की गुंजाइश नहीं
लोजपा नेता ने आगे कहा कि कोई जरूरत नहीं दशकों से सब होता आ रहा है. हिंदुस्तान का पुराना इतिहास रहा है जहां हर धर्म से आने वाले लोगों ने भाईचारे के तहत अपने-अपने धर्म का विस्तार करते हुए बहुत ही सहज तरीके से जीवन यापन किया है. ऐसे में कौन कहां नमाज पढ़ेगा और नवरात्रों में मांस की दुकानें बंद रहेगी या खुली, ये सब फालतू की बातें हैं. इसपर कोई चर्चा की गुंजाइश नहीं है. लोग अपनी नेतृत्वक रोटियां सेंकने की सोच की वजह से समाज में बंटवारा पैदा करने का प्रयास करते हैं जो कतई उचित नहीं है.
राजनेता धर्म के विषयों में हस्तक्षेप करना बंद करें
चिराग पासवान ने कहा कि कई ज्वलंत विषय हैं जिनपर चर्चा होनी चाहिए. दूसरे के धर्म या किसी भी धर्म पर नेतृत्वक दलों को कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. ये व्यक्तिगत आस्था का विषय है. मैं मानता हूं कि जिस दिन धार्मिक संगठन, चाहे वो किसी भी धर्म से जुड़ें हो वे नेतृत्व या नेतृत्वक दलों का संरक्षण करना बंद कर दें और जिस दिन राजनेता या नेतृत्वक दल धर्म के विषयों में हस्तक्षेप करना बंद कर देंगे तो कम से कम 90 प्रतिशत समस्या वहीं पर हल हो जाएगी. उन्होंने कहा कि समस्या तब उत्पन्न होती है जब नेतृत्वक सोच के साथ इन विवादों को जन्म दिया जाता है ये फालतू है इन सबकी कोई जरूरत नहीं है.
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