Naxal Free India Campaign: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नक्सल मुक्त हिंदुस्तान अभियान को मंगलवार (14 अक्टूबर 2025) को बड़ी सफलता मिली है. भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लौजुला उर्फ वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले में अपने 60 समर्थकों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, सोनू का सरेंडर माओवादी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है.
अमित शाह के अभियान की बड़ी उपलब्धि
गृह मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे लगातार अभियानों और राज्यों की पुलिस की रणनीति के कारण पिछले कुछ महीनों में कई नक्सली सरेंडर कर चुके हैं. माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व में शामिल सोनू का हथियार डालना इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर अब टूटन बढ़ रही है. अधिकारियों का कहना है कि सितंबर में ही सोनू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आत्मसमर्पण की मंशा जताई थी.
कई उप-क्षेत्रीय इकाइयों से मिला समर्थन
पुलिस के अनुसार, सोनू को उत्तर और पश्चिम उप-क्षेत्रीय ब्यूरो से जुड़े माओवादी कैडरों का समर्थन मिला, जिन्होंने भी मुख्यधारा में शामिल होने में रुचि दिखाई है. उन्होंने 15 अगस्त को एक लिखित बयान में कहा था कि वह युद्धविराम और संवाद के लिए तैयार हैं. हाल ही में तेलंगाना के मूल निवासी सोनू के पार्टी से इस्तीफा देने की समाचारें भी आई थीं.
माओवादियों में दरार की बड़ी वजह बना सोनू का पत्र
वेणुगोपाल राव ने अपने साथियों को एक पत्र लिखकर जीवन बचाने की अपील की थी. इसमें उन्होंने कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में सशस्त्र संघर्ष जारी रखना मुश्किल है. यह पत्र संगठन के अंदर असंतोष और थकान की स्थिति को उजागर करता है. सुरक्षाबलों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण आने वाले महीनों में नक्सलवाद के खिलाफ और बड़ी सफलता की नींव रखेगा.
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