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यह वोट नहीं, मेरे भारतीय होने का सबूत है, मुर्शिदाबाद के 6 मजदूरों की कहानी जिन्हें ‘बांग्लादेशी’ बताकर सरहद पार भेज दिया

खास बातें

Murshidabad Migrant Workers Story: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मुर्शिदाबाद जिले के लिए मतदान महज एक नेतृत्वक प्रक्रिया नहीं, बल्कि वजूद को बचाने की जंग बन गया है. जिले के बेलडांगा और हरिहरपाड़ा के उन 6 प्रवासी मजदूरों के लिए इस बार ‘वोट’ का मतलब सड़क, राशन या रोजगार नहीं है.

महाराष्ट्र में हुई थी गिरफ्तारी

ये वही 6 बंगाली श्रमिक हैं, जिन्हें पिछले साल जून में महाराष्ट्र में पकड़ा गया, बांग्लादेशी करार देकर सीमा पार धकेल दिया गया. कुछ समय तक उन्हें बांग्लादेश के निरोध केंद्र (डिटेंसन सेंटर) में रहना पड़ा. बाद में बंगाल पुलिस ने उनकी नागरिकता साबित की और उनकी वतन वापसी हुई. अब ये मजदूर हाथ में वोटर कार्ड लेकर अपनी हिंदुस्तानीयता का हक मांगने मतदान केंद्र जायेंगे.

मीनारुल की आपबीती : हमें दूसरे देश में फेंक दिया गया था

बेलडांगा के 34 वर्षीय मीनारुल शेख अपने कच्चे घर के बाहर दस्तावेजों से भरी फाइल थामे खड़े हैं. उन्होंने भावुक होकर कहा- पिछले साल उन्होंने मुझे दूसरे देश में फेंक दिया था. कहा था कि मैं हिंदुस्तानीय नहीं हूं. यह वोट ही मेरा जवाब है. 8 महीने की कानूनी लड़ाई और प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटने के बाद उन्हें उनकी मतदाता पर्ची वापस मिली है. उनके लिए यह पर्ची केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके वजूद का प्रमाणपत्र है.

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अस्तित्व की रक्षा के लिए मतदान

मुर्शिदाबाद जिले से संशोधित मतदाता सूची (SIR) के तहत 7.48 लाख नाम हटाये गये हैं, जिससे पूरे इलाके में डर का माहौल है.

  • महबूब शेख का संकल्प : हरिहरपाड़ा के 36 वर्षीय महबूब शेख कहते हैं- मैं चावल या पैसों के लिए वोट नहीं दे रहा. मैं यह दिखाने के लिए वोट दे रहा हूं कि मैं हिंदुस्तानीय हूं और कोई मुझे फिर से बाहर नहीं फेंक सकता.
  • सबूत के तौर पर रखे ‘टके’ : नाजिमुद्दीन मंडल ने वे 300 बांग्लादेशी टका आज भी संभालकर रखे हैं, जो उन्हें सीमा पार भेजे जाने से पहले दिये गये थे. वे इसे अपनी पीड़ा और पहचान के संकट के सबूत के तौर पर देखते हैं.

Murshidabad Migrant Workers Story: पहचान खोने का डर गरीबी से भी बड़ा

बांग्लादेश के निरोध केंद्र में 2 दिन बिताने वाले निजामुद्दीन शेख अब काम के लिए बंगाल से बाहर जाने से कतराते हैं. उनका कहना है कि पहले वह गरीबी को सबसे बड़ी समस्या मानते थे, लेकिन अब समझ आया कि अपनी पहचान खो देना उससे भी बुरा है. जमालुद्दीन शेख कहते हैं कि उनके पिता और दादा ने इसी मिट्टी पर वोट दिया, फिर भी उनसे सबूत मांगा गया. इस बार वे अपने तमाम दस्तावेजों के साथ मतदान केंद्र जायेंगे.

मानवीय त्रासदी ने लिया नेतृत्वक रंग

  • TMC का आरोप : सांसद अबू ताहेर ने कहा कि भाजपा प्रशासनें बांग्ला बोलने वाले मुसलमानों को हमेशा संदेह की नजर से देखती हैं.
  • कांग्रेस का रुख : अधीर रंजन चौधरी ने इसे लोकतंत्र की विफलता बताया और कहा कि असली नागरिकों को कतार में खड़े होकर हिंदुस्तानीयता साबित करनी पड़ रही है.
  • BJP का जवाब : भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घुसपैठ एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन किसी भी वास्तविक हिंदुस्तानीय नागरिक को परेशान नहीं किया जायेगा.

मुर्शिदाबाद के गांव में उत्साह से ज्यादा गुस्से का भाव

मुर्शिदाबाद के इन गांवों में इस बार उत्साह से ज्यादा गुस्सा और असुरक्षा का भाव है. मीनारुल जैसे हजारों लोगों के लिए अब उनका वोट इस बात का अंतिम प्रमाण है कि यह देश उनका है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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