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रांची निकाय चुनाव में बदला आरक्षण का फॉर्मूला, लेकिन राजनीति में परिवारवाद हावी

रांची से उत्तर महतो की रिपोर्ट

Ranchi Civic Polls: रांची निकाय चुनाव के लिए शहर की नेतृत्व परवान पर है. शहर की नेतृत्व में परिवार की पकड़ गहरी है. निकाय चुनाव में आरक्षण का फॉर्मूला बदलता रहा है. लेकिन चुनाव में नेतृत्व कुछ खास परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. एक ही परिवार का दबदबा बना रहा है. पिछले तीन चुनाव में ऐसे कई वार्ड हैं, जो परिवारवाद से बाहर नहीं आ पाए. जनता के प्रतिनिधि के रूप में चुने जाने वाले कई चेहरे एक ही परिवार से आते रहे हैं.

रोटेशन के साथ बदलते रहे परिवार के चेहरे

रोटेशन के हिसाब से कभी वार्ड सामान्य रहा, तो परिवार के पुरुष सदस्य ने चुनाव जीता. जैसे ही सीट स्त्री के लिए आरक्षित हुई, तो उसी परिवार की स्त्री सदस्य मैदान में उतरी और जीत हासिल की. कई जगहों पर तो पति-पत्नी बारी-बारी से पार्षद बनते रहे हैं. कुछ वार्डों में भाभी, तो कहीं पर ननद चुनावी मैदान में उतरी. बताते चलें कि रांची नगर निगम में चौथी बार चुनाव हो रहा है. पहली बार वर्ष 2008 में चुनाव हुआ था. इसके बाद 2013 और 2018 में चुनाव कराये गये. अब 2026 में फिर से चौथी बार नगर निगम का चुनाव हो रहा है.

वार्ड नंबर-21: रोशनी खलखो–सुजीत उरांव, गीता कुमारी

वार्ड नंबर-21 से रोशनी खलखो और उनके पति सुजीत उरांव लगातार जीत दर्ज करते आए हैं. 2008 में सुजीत उरांव यहां से पार्षद बने. 2013 में सीट स्त्री के लिए आरक्षित हुई तो रोशनी खलखो विजयी रहीं. 2018 में भी रोशनी खलखो ने जीत हासिल की. 2026 में रोशनी फिर से मेयर पद के लिए मैदान में हैं. लेकिन, इस बार उन्होंने अपनी ननद गीता कुमारी को वार्ड 19 से मैदान में उतारा है.

वार्ड नंबर-1: नकुल तिर्की-सुनीता तिर्की

वार्ड नंबर-1 कांके रोड क्षेत्र से नकुल तिर्की और उनकी पत्नी सुनीता तिर्की का दबदबा रहा है. 2008 में नकुल तिर्की पहली बार पार्षद चुने गये. 2013 में सीट स्त्री के लिए आरक्षित हुई तो सुनीता तिर्की ने जीत दर्ज की. 2018 में आरक्षण बदलने पर नकुल तिर्की फिर पार्षद बने. 2026 में वे चौथी बार मैदान में हैं.

वार्ड नंबर-20: सुनील यादव-निकिता देवी

मामा के नाम से मशहूर सुनील यादव और उनका परिवार पिछले 15 वर्षों से वार्ड नंबर-20 में काबिज है. 2008 में सुनील यादव पार्षद बने. 2013 में सीट स्त्री के लिए आरक्षित हुई तो उनकी पत्नी निकिता देवी पार्षद चुनी गयीं. 2018 में आरक्षण बदला और सुनील यादव फिर विजयी रहे. 2026 में वे एक बार फिर चुनाव लड़ रहे हैं.

वार्ड नंबर-22: मो असलम-नाजिया असलम

हिंदपीढ़ी के वार्ड नंबर-22 में मो असलम और उनकी पत्नी नाजिया असलम का वर्चस्व रहा है. 2008 और 2013 में मो असलम विजयी रहे. 2018 में सीट स्त्री के लिए आरक्षित हुई, तो नाजिया असलम पार्षद बनीं. 2026 में आरक्षण बदलने के बाद मो असलम फिर मैदान में हैं.

वार्ड नंबर-18: भाई-बहन का दबदबा

वार्ड नंबर-18 में भाई-बहन का दबदबा पिछले तीन चुनावों से बना हुआ है. 2008 में सबसे पहले राजेश गुप्ता यहां से पार्षद बने. 2013 में और 2018 में उनकी बहन आशा देवी इस वार्ड से विजयी हुईं. 2026 में आशा देवी एक बार फिर से मैदान में हैं.

वार्ड नंबर 10: पति-पत्नी का रहा जलवा

वार्ड नंबर 10 में 2013 में संगीता देवी पार्षद बनीं. 2018 में उनके पति अर्जुन यादव पार्षद बने. इस वर्ष सीट स्त्री के लिए आरक्षित है, ऐसे में संगीता देवी फिर मैदान में हैं. वार्ड नंबर 21 में 2013 में सबा नाज पार्षद बनीं. 2018 में उनके पति मो एहतेशाम विजयी रहे. 2026 में मो एहतेशाम फिर से मैदान में हैं.

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वार्ड नं 29: पत्नी को हटाकर पति मैदान में

वार्ड नं 29 से वर्ष 2018 में सोनी परवीन पार्षद बनी. इस बार सीट सामान्य हुई, तो उनके पति फैयाज वारसी चुनावी मैदान में हैं. वार्ड नं 13 से पूर्व में पूनम देवी पार्षद थी. इस बार सीट सामान्य हुई, तो उनके पति प्रभुदयाल बड़ाइक चुनावी मैदान में हैं. वहीं वार्ड 30 से पूर्व में रीमा देवी पार्षद थी. इस बार इस सीट से उनकी भाभी सोनी देवी चुनावी मैदान में है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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