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रिम्स की दवाएं भेजी जा रहीं बाहर! सादा पर्ची पर लिखी दवा खरीदने के लिए दुकानों पर भीड़

RIMS Medicine Crisis| झारखंड के सबसे बड़े प्रशासनी अस्पताल राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) रांची में कई दवाइयां नहीं मिलने से मरीजों के परिजन परेशान हैं. रिम्स प्रशासन को आशंका है कि रिम्स की दवाइयां बाहर भेज दी जा रहीं हैं, जिसकी वजह से अस्पताल में दवा की किल्लत हो रही है. हालांकि, रिम्स इस मामले में कोई कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है. रिम्स में दवाएं नहीं मिलने की वजह से बाहर की दुकानों में दवा खरीदने वालों की भारी भीड़ लग रही है.

रिम्स तालाब के पास खुली आधा दर्जन दवा दुकानें

रिम्स तालाब के पास पिछले एक साल में करीब आधा दर्जन दवा दुकानें खुल गयीं हैं. इन दवा दुकानों पर रिम्स की सादा पर्ची पर लिखी दवा खरीदने के लिए मरीज और उनके परिजन पहुंच रहे हैं. दरअसल, रिम्स में कई दवाइयां उपलब्ध नहीं रहतीं. इसलिए मरीजों के परिजन इन दुकानों से दवा खरीदने को मजबूर हैं. यही वजह है कि इन दुकानों में हमेशा भीड़ लगी रहती है.

अस्पताल के वार्ड तक दवा पहुंचा रहे बाहर के दुकानदार

इतना ही नहीं, बाहर के दवा दुकानदार अस्पताल के वार्ड तक दवा पहुंचा देते हैं. आसानी से दवा उपलब्ध होने की वजह से परिजनों को भी सुविधा होती है. कोरोना के बाद रिम्स सेंट्रल इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की भीड़ रहती है.

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कॉस्मेटिक की दुकानें फार्मेसी में तब्दील

वहीं, रिम्स में कई बार दवा की उपलब्धता नहीं होने के कारण मरीज निजी दवा दुकानों का रुख करते हैं. यही वजह है कि रिम्स तालाब के पास कई नयी दवा दुकानें खुल गयी हैं. इन इलाकों में पहले से राशन और कॉस्मेटिक की दुकानें फार्मेसी में तब्दील हो गयी हैं.

‘दवाओं की किल्लत से रिम्स प्रबंधन को संदेह’

रिम्स प्रबंधन का कहना है कि अधिकांश दवाएं वार्डों में उपलब्ध करायी जाती हैं. बावजूद दवा की किल्लत से संदेह उत्पन्न हो रहा है. लगता है कि रिम्स की दवाएं बाहर चली जा रही हैं. लेकिन, पुख्ता सबूत नहीं होने की वजह से कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है. निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी है.

रिम्स में अधिकांश दवा उपलब्ध करा दी गयी है. इलाज कर रहे डॉक्टर को अगर लगता है कि उपलब्ध दवा के अलावा कोई अन्य दवा की जरूरत है, तो वह अमृत फार्मेसी और जन औषधि केंद्र से मंगा सकते हैं. परिजनों से भी यही आवग्रह किया जा रहा है. जगह-जगह इससे संबंधित सूचना भी चस्पा कराये गये हैं.

डॉ राजीव रंजन, पीआरओ, रिम्स

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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