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लोकसभा में पास हुआ फाइनेंस बिल 2026; वित्त मंत्री बोलीं- ‘ईमानदार करदाताओं के लिए आसान होगा सिस्टम

Financial Bill 2026 : बुधवार को लोकसभा में फाइनेंस बिल 2026 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के आर्थिक शासन (Economic Governance) में एक बड़े बदलाव का ऐलान किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन अब ‘रिएक्टिव’ उपायों के बजाय सिस्टम में स्पष्टता लाने पर ध्यान दे रही है. इस नए बिल का मुख्य स्तंभ ‘भरोसे पर आधारित टैक्स प्रशासन’ है, जिसका उद्देश्य ईमानदार करदाताओं की मुश्किलों को कम करना है.

मजबूरी नहीं, ‘मजबूत इरादों’ वाला सुधार

वित्त मंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदुस्तान अब किसी मजबूरी में सुधार नहीं कर रहा है, बल्कि यह बदलाव पूरे आत्मविश्वास और प्रतिबद्धता के साथ किए जा रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए इसे ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ का नाम दिया. यह पूरा बिल पांच बुनियादी सिद्धांतों पर टिका है, जो देश की वित्तीय स्थिति को नई दिशा देंगे.

आम जनता और बिजनेस के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’

इस बिल का एक बड़ा हिस्सा आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने (Ease of Living) और व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) पर केंद्रित है. प्रशासन का लक्ष्य है कि वैध काम करने वाले लोगों को अनावश्यक अनुपालन (Compliance), परमिट, कोटा और लाइसेंस के बोझ तले न दबना पड़े. इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और लोग अपने काम पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे.

MSME और किसानों को मिलेगी नई ताकत

वित्त मंत्री ने विस्तार से बताया कि फाइनेंस बिल 2026 में MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम), किसानों और सहकारी समितियों को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है. ये क्षेत्र रोजगार सृजन और उत्पादन की धुरी हैं. नए प्रावधानों के जरिए उनकी लिक्विडिटी (नकदी की उपलब्धता) में सुधार किया जाएगा और उन पर नियमों का बोझ कम किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और औद्योगिक विकास को रफ्तार मिलेगी.

हिंदुस्तान बनेगा ग्लोबल बिजनेस हब

घरेलू मदद के अलावा, प्रशासन हिंदुस्तान को दुनिया के बिजनेस हब के रूप में स्थापित करना चाहती है. इसके लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में टैक्स से जुड़ी स्पष्टता लाई जा रही है. साथ ही, विदेशी व्यापार को आसान बनाने के लिए सीमा शुल्क (Customs) सुधारों के जरिए क्रॉस-बॉर्डर प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा.

सेस (Cess) और खर्च का गणित

मद विवरण
कुल सेस उपयोग ₹15.14 लाख करोड़ (संग्रह से अधिक)
राज्यों को हस्तांतरण ₹15.97 लाख करोड़ (विभिन्न योजनाओं के तहत)
स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेस ₹74,000 करोड़ एक्स्ट्रा खर्च (संग्रह ₹7.03 लाख करोड़ के मुकाबले ₹7.77 लाख करोड़ खर्च)

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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