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विराट और रोहित के साथ ठीक सलूक नहीं हो रहा

Virat and Rohit : स्पोर्ट्सों में तो क्रिकेट पर सबसे अधिक किताबें लिखी गयी हैं. इनमें से एक मशहूर किताब डेविड फ्रिथ की है, ‘साइलेंस ऑफ द हार्ट : क्रिकेट सुइसाइड्स’. हिंदुस्तानीय क्रिकेट की मौजूदा स्थिति को देखें, तो इन दिनों यह अपनी ही आत्महंता कहानी लिखने में लगा हुआ है. इस कहानी का एक प्लाॅट हेड कोच गौतम गंभीर हैं और दूसरे प्लाॅट हैं विराट कोहली और रोहित शर्मा की जबरदस्त ‘रोको’ जोड़ी.

गंभीर इन दोनों को महत्वहीन करने के अभियान में लगे हैं, लेकिन मैदान में इन दोनों का स्पोर्ट्स जबरदस्त है. हेड कोच गौतम गंभीर हिंदुस्तानीय क्रिकेट की शब्दावली अपने तरीके से लिखना चाहते हैं. विराट कोहली और रोहित शर्मा क्रिकेट के मॉडर्न लीजेंड हैं, जो हेड कोच की इस सोच के खिलाफ मिशन मोड पर हैं. इस संघर्ष का विजेता भले जो भी हो, हिंदुस्तानीय क्रिकेट का दिल डेविड फ्रिथ की किताब के टाइटल के माकूल शांतिपूर्वक आत्महत्या की घुटन से गुजर रहा है.

दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से पढ़े गौतम गंभीर एक उम्दा क्रिकेटर थे, असाधारण नहीं. गंभीर ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को पहले सचिन, सौरव, द्रविड़ और फिर महेंद्र सिंह धोनी तथा विराट कोहली जैसे असाधारण क्रिकेटर के साये में गुजारा. शायद यही एक बड़ी वजह रही कि जब वह कोच बने, तो बड़ी शख्सियतों का विरोध उनकी कोचिंग फिलोसॉफी का केंद्रबिंदु बना. क्रिकेट छोड़ने के बाद अपने तमाम इंटरव्यू में उन्होंने कभी महेंद्र सिंह धोनी, तो कभी विराट कोहली के कल्ट पर सवाल उठाये. आइपीएल के कप्तान गौतम गंभीर को कामयाबी दिल्ली की टीम से नहीं मिली, जहां उन्होंने अपना अधिकतर क्रिकेट स्पोर्ट्सा था, बल्कि कोलकाता की टीम से मिली, जहां उन्हें मन माकूल टीम को चलाने की आजादी मिली.

बतौर कोच भी वह कमोबेश इसी परिस्थिति में कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ कामयाब हुए. यहां सवाल यह है कि क्या उनकी कोचिंग की फिलोसॉफी हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम में कारगर होगी, जहां सुनील गावस्कर और कपिल देव से लेकर सचिन-सौरव दौर तक और विराट कोहली-रोहित शर्मा के मौजूदा दौर में सितारों का बोलबाला रहा है. यह सच है कि क्रिकेट एक टीम गेम है. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी टीमों की ताकत उनका मजबूत टीम कल्चर है, पर हिंदुस्तान में क्रिकेट स्पोर्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार और ब्रॉडकास्टर्स ने मिलकर इसे जबरदस्त बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर-द ग्रेट इंडियन क्रिकेट स्टोरी-बना दिया है.

बॉलीवुड की अधिकतर फिल्मों की तरह हिंदुस्तानीय क्रिकेट में सुपरस्टार एक अभिन्न अंग है. रोहित और विराट हिंदुस्तानीय क्रिकेट के मौजूदा सुपरस्टार हैं. मैच में कैमरों का फोकस इन दोनों पर रहता है. कमेंटेटर इन्हीं का महिमामंडन करते हैं. विज्ञापनों में ये छाये रहते हैं. ऐसे में, गौतम गंभीर की कोचिंग फिलोसॉफी और हिंदुस्तानीय क्रिकेट के सुपरस्टार कल्चर में टकराव स्वाभाविक है.

हिंदुस्तानीय क्रिकेट में टीम संस्कृति और सुपरस्टार संस्कृति का ऐसा ही टकराव सौरव गांगुली और ग्रेग चैपल के दौर में देखा गया था. गौतम गंभीर तब युवा खिलाड़ी थे और मुख्य चयनकर्ता किरन मोरे थे. टकराव का नतीजा यह हुआ कि हिंदुस्तान को 2007 वर्ल्ड कप में करारी हार का सामना करना पड़ा और ग्रेग चैपल की विदाई हुई. टीम इंडिया के मौजूदा मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर हैं. क्या गंभीर-अगरकर की अगुआई में इतिहास खुद को दोहरा रहा है? अगरकर के दौर में रविचंद्रन अश्विन बीच सीरीज में रिटायर हुए, रोहित शर्मा और विराट कोहली इंग्लैंड टेस्ट सीरीज से ठीक पहले रिटायर हुए और मोहम्मद शमी को अब तक इस बात का अंदाजा नहीं कि वह टीम से क्यों बाहर हैं. रोहित -विराट और मुख्य चयनकर्ता अगरकर के बीच संवाद की कमी भयावह रूप लेती जा रही है. अगर मौजूदा टकराव का समय रहते हल नहीं निकाला गया, तो इसका असर 2026 टी-20 वर्ल्ड कप और 2027 विश्व कप पर पड़ सकता है.

ग्रेग चैपल के अनुभव के बाद साफ है कि ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड की सामाजिक-आर्थिक रचना और हिंदुस्तानीय परिस्थिति में फर्क है. भारी आबादी की वजह से हिंदुस्तान में असुरक्षा का माहौल रहता है. असुरक्षा का दौर अब और भी हावी हो गया है, क्योंकि व्हाइट बॉल क्रिकेट में टैलेंट की भरमार है. दूसरे, कोई भी सुधार चरणबद्ध तरीके से हो सकता है, रातोंरात नहीं. यह सच है कि अगर टीम इंडिया को क्रिकेट मैदान पर तीनों फॉर्मेट में अजेय बनना है, तो टीम कल्चर को बढ़ाना होगा और सुपरस्टार कल्चर की संस्कृति को कम करना होगा, लेकिन यह रातोंरात नहीं हो सकता.

तीसरे, टीम तभी कामयाब होती है, जब कप्तान टीम का सारथी हो और कोच परदे के पीछे काम करे. गौतम गंभीर को यह बात समझनी होगी. विराट और रोहित सर्वकालीन श्रेष्ठ क्रिकेटर हैं और यह जोड़ी अपने करियर का जबरदस्त क्रिकेट स्पोर्ट्स रही है. इनका पूरा ध्यान एकदिवसीय क्रिकेट पर है. हिंदुस्तान को अगला विश्व कप दक्षिण अफ्रीका में स्पोर्ट्सना है. ऐसे में, टीम इंडिया इन दोनों के फॉर्म और अनुभव का फायदा उठा सकती है. ऐसे में हेड कोच और मुख्य चयनकर्ता का यह कहना अपरिपक्वता की निशानी है कि विश्व कप अभी दूर है और इन दोनों की जगह तय नहीं. हिंदुस्तानीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को अब हस्तक्षेप करने की जरूरत है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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