Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण शुरू हो चुका है. यह ग्रहण हिंदुस्तान में भी दिखाई दे रहा है, इसलिए इसका सूतक काल मान्य माना गया है. चंद्र ग्रहण खगोलीय और धार्मिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व रखता है. एक ओर जहां देशभर में होली की तैयारियां चल रही हैं और कल रंगों की होली स्पोर्ट्सी जाएगी, वहीं दूसरी ओर आज चंद्र ग्रहण का प्रभाव देखा जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में भगवान का जप, तप और ध्यान करना शुभ माना जाता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद दान करने की भी परंपरा है, जिससे ग्रहण का दोष दूर होता है.
सूतक काल क्या है और कब से शुरू हुआ?
चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो चुका है. चूंकि यह ग्रहण हिंदुस्तान के कई बड़े शहरों में दिखाई देगा, इसलिए सूतक पूरी तरह मान्य है. शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ नहीं किया जाता और मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं.
इस समय गर्भवती स्त्रीओं, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए और भगवान का स्मरण करना चाहिए.
चंद्र ग्रहण का समय
इस चंद्र ग्रहण की शुरुआत 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी. ग्रहण की समाप्ति शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगी. इस दौरान चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया का प्रभाव दिखाई देगा.
कब और कैसे लगता है चंद्र ग्रहण?
चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं. इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है. यह घटना केवल पूर्णिमा की रात को ही संभव होती है. जब चंद्रमा पूरी तरह या आंशिक रूप से पृथ्वी की छाया में आता है, तब चंद्र ग्रहण दिखाई देता है.
144 साल बाद होली पर चंद्र ग्रहण
इस बार होली के दिन चंद्र ग्रहण लगना खास माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि 144 वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है. अयोध्या में 3 मार्च को सुबह 9 बजे तक ही रामलला के दर्शन होंगे. सुबह 9 बजकर 19 मिनट पर सूतक लगने के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे. रात 8 बजकर 30 मिनट पर मोक्ष काल के बाद फिर से दर्शन शुरू होंगे.
खंडग्रास चंद्र ग्रहण क्या होता है?
इस बार लगने वाला ग्रहण खंडग्रास चंद्र ग्रहण है. इसका मतलब है कि चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा ही पृथ्वी की छाया से ढका होगा. पूरा चंद्रमा ग्रहणग्रस्त नहीं होगा.
किन-किन देशों में दिखेगा ग्रहण?
यह चंद्र ग्रहण हिंदुस्तान के अलावा ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, पूर्वी यूरोप, एशिया, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर क्षेत्रों में भी दिखाई देगा. ताइवान, फिलीपींस, वियतनाम, पेरू, कनाडा, अमेरिका, इंडोनेशिया, हांगकांग, कोरिया, जापान, थाईलैंड, क्यूबा और चीन सहित कई देशों में इसे देखा जा सकेगा.
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चंद्र ग्रहण के प्रकार
चंद्र ग्रहण तीन प्रकार का होता है—
- पूर्ण चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाता है.
- आंशिक चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा छाया में आता है.
- उपच्छाया चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा पृथ्वी की हल्की छाया से गुजरता है और हल्का धुंधला दिखाई देता है.
इस प्रकार साल का पहला चंद्र ग्रहण धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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