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सऊदी की तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला, धू-धूकर जली दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल एक्सपोर्ट फैसेलिटी

Saudi Arabia Oil facility Ras Tanura Attacked: अमेरिका-इजरायल और ईरानी के बीच संघर्ष सोमवार को और तेज हो गया. सोमवार को ईरान ने इजरायल और अन्य खाड़ी देशों पर नई मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए. सोमवार को सऊदी अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ, जिसके बाद रिफाइनरी के एक सीमित हिस्से में आग लग गई. हालांकि यह हमला किसने किया, इसके बारे में अभी पुष्टि नहीं हो पाई है. सऊदी अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी तेल निर्यात सुविधाओं में से एक है और वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए बेहद अहम मानी जाती है.

रास तनुरा रिफाइनरी में लगी आग जल्दी काबू में आ गई और अब तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है.  वहीं हमले के बाद एहतियातन संचालन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग छोटे क्षेत्र तक ही सीमित रही और जान-माल का नुकसान नगण्य बताया जा रहा है. इस हमले के पीछे कथित तौर पर ईरान का हाथ बताया जा रहा है, लेकिन सऊदी अरब ने फिलहाल कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है.

रास तनुरा रिफाइनरी की प्रोसेसिंग क्षमता करीब 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन है. अगर यह लंबे समय तक बंद रहती है, तो पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आने की आशंका है. फिलहाल सऊदी अरब की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकन दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल सऊदी अरब के लिए यह स्थिति रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है.

वैश्विक तेल बाजार में खड़ी होगी समस्या

इन हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई है. मिडिल ईस्ट पहले से ही अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की चपेट में है, और होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी सबकी नजरें टिकी हैं, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल की आवाजाही होती है. यदि आने वाले दिनों में रिफाइनरियों या तेल टर्मिनलों पर ऐसे हमले बढ़ते हैं, तो वैश्विक स्तर पर तेल संकट गहरा सकता है. वहीं एक अन्य हमले में ईरान की प्रेस टीवी ने बहरीन के सलमान पोर्ट पर ईरानी मिसाइल हमले की भी रिपोर्ट दी. ईरानी मीडिया का दावा है कि इस बंदरगाह का इस्तेमाल अमेरिका के लॉजिस्टिक उपकरणों को ले जाने के लिए किया जा रहा था, जिन्हें ईरान पर हमले में उपयोग किया जाना था.

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी/रोरिंग लायन’ नाम के साझा अभियान में अमेरिकी और इजरायली बलों ने 28 फरवरी को ईरान भर में बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमले किए. इनमें प्रमुख सैन्य ठिकानों, परमाणु-संबंधी बुनियादी ढांचे, मिसाइल बैटरियों और शीर्ष नेतृत्व के ठिकानों को निशाना बनाया गया. जिसके जवाब में ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 शुरू किया  है. इसके तहत मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेसेज और और अन्य देशों को निशाना बनाया जा रहा है. सऊदी अरब पर हमले से पहले यूएई के प्रमुख शहर जैसे- दुबई और अबूधाबी निशाना बने थे. 

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IRGC ने और हमलों की दी चेतावनी

अपने बयान में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने उस अभियान पर बयान देते हुए कहा, ‘दसवीं लहर में खैबर मिसाइलों की रणनीतिक तैनाती के साथ कब्जे वाले इलाकों पर भीषण आग के दरवाजे खोल दिए गए.’ ईरानी प्रशासनी मीडिया ने टेलीग्राम पर कथित तौर पर उस अमेरिकी एफ-15 फाइटर जेट के पायलट की तस्वीर भी जारी की, जिसका विमान सोमवार सुबह कुवैत में मार गिराया गया था. इसके साथ ही ईरान के विशाल ड्रोन बेड़े और क्षेत्र में अमेरिकी-इज़रायली ठिकानों पर ईरानी हमलों के दृश्य भी साझा किए गए. टेलीग्राम पर प्रेस टीवी ने लिखा, ‘कुवैत में फाइटर जेट क्रैश होने के बाद अमेरिकी पायलट.’

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ईरान के हमलों से दहशत में खाड़ी के देश

इस बीच, इजरायल के i24 न्यूज के राजनयिक संवाददाता अमिचाई स्टीन ने बताया कि खाड़ी देशों के अधिकारी ईरान की जवाबी कार्रवाई की तीव्रता से हैरान हैं. एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘खाड़ी देशों के वरिष्ठ अधिकारियों से हुई मेरी तमाम बातचीत में वे ईरानी हमलों की तीव्रता से पूरी तरह स्तब्ध थे. उनमें से एक ने मुझसे कहा, ‘हमें पूरा भरोसा था कि खामेनेई की हत्या के बाद वे जवाब देंगे, लेकिन अभी वे आबादी वाले इलाकों को निशाना बना रहे हैं, सिर्फ सैन्य ठिकानों को नहीं; यह पूरी तरह पागलपन है और ऐसा आचरण है जिसका कोई तुक नहीं बनता.’ एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह हमारी कल्पना से कहीं ज्यादा है.’’

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दुनिया भर के नेता और अंतरराष्ट्रीय संगठन तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं, क्योंकि व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ता जा रहा है. हालांकि, लड़ाई जारी है और इसके अंत का फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहा है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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