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साहित्य संगम के वार्षिकोत्सव सह महाकवि आरसी प्रसाद सिंह जयंती समारोह संपन्न

नया विचार न्यूज़ रोसड़ा /समस्तीपुरसाहित्य संगम के तत्वावधान में मंगलवार को वार्षिकोत्सव सह महाकवि आरसी प्रसाद सिंह जयंती समारोह का भव्य आयोजन किया गया। नगर स्थित मारवाड़ी विवाह भवन के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन अवर निबंधक पदाधिकारी डॉ. भास्कर ज्योति ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता यू आर कॉलेज रोसड़ा के पूर्व प्राचार्य प्रो. शिव शंकर प्रसाद सिंह ने की।

उद्घाटन भाषण में डॉ. भास्कर ज्योति ने महाकवि आरसी प्रसाद सिंह के जीवन व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “यह मेरा सौभाग्य है कि मैं महाकवि की कर्मभूमि एवं जन्मभूमि में सेवक के रूप में कार्य कर रहा हूँ। महाकवि आरसी प्रसाद सिंह एक महामानव थे, जिन्होंने हिंदी और मैथिली साहित्य में काव्य लेखन कर अमूल्य योगदान दिया।”

मुख्य अतिथि के रूप में बेगूसराय से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार अशांत भोला ने कहा कि महाकवि आरसी प्रसाद सिंह छायावाद के कवि थे। उन्होंने हिंदी और मैथिली दोनों भाषाओं में सशक्त रचनाएँ दीं। भले ही वे राष्ट्रकवि के रूप में विख्यात न हुए हों, किंतु साहित्य जगत उन्हें महाकवि के रूप में सदैव याद रखेगा।

कार्यक्रम का संचालन पत्रकार संजीव कुमार सिंह एवं रामस्वरूप सहनी रोसड़ाई ने संयुक्त रूप से किया। समारोह का शुभारंभ मनोज कुमार झा शशि के सरस्वती वंदना से हुआ। अतिथियों का स्वागत अनिरुद्ध झा दिवाकर ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन तृप्ति नारायण झा ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर रमाकांत राय रामा, आचार्य परमानंद प्रभाकर, शिवकुमार सुमन, साधना भगत, कृष्ण कुमार लखोटिया, रमेश गामी, डॉ. परमानंद मिश्रा, चांद मुसाफिर, सच्चिदानंद पाठक समेत तीन दर्जन से अधिक साहित्यकार मौजूद थे।

कवि संगोष्ठी में बहा काव्य रस

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कवि कैलाश पोद्दार मनोहर ने देशभक्ति से ओतप्रोत काव्य-पाठ किया।

विजय कुमार कुशवाहा ने प्रकृति व जीवन से जुड़ी रचना प्रस्तुत की।

साहित्य अकादमी से सम्मानित युवा कवि अमित कुमार मिश्रा ने मैथिली कविता सुनाकर समां बांधा।

डॉ. सच्चिदानंद पाठक ने सामाजिक यथार्थ पर आधारित कविता प्रस्तुत की।

वरिष्ठ साहित्यकार अशांत भोले की पंक्तियाँ “कुछ न कुछ अपनी निशानी छोड़ जाएंगे…” ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।

कवि एवं अधिवक्ता अवधेश्वर प्रसाद सिंह ने अपनी गजल सुनाकर तालियाँ बटोरीं।

कवयित्री सुमन सिंह ने “औरत होने का मतलब” काव्य रूप में प्रस्तुत कर स्त्री संवेदनाओं को स्वर दिया।

कवयित्री दिव्या चौहान ने सखी-गीत की प्रस्तुति से सभागार को भावनाओं से भर दिया।

आचार्य परमानंद प्रभाकर ने अपनी हास्य-व्यंग्य कविता “मैं तो हूँ अपनी बीवी का परमानेंट सर्वेंट…” से श्रोताओं को ठहाकों पर मजबूर कर दिया।

खगड़िया से आए कवि शिवकुमार सुमन ने अपनी रचना “प्यास है मेरा मुकद्दर आज भी…” सुनाकर काव्यधारा को गहराई दी।

कवि रामस्वरूप सनी रोसराय ने महाकवि आरसी प्रसाद सिंह को समर्पित अपनी कविता से सभागार को भावविभोर कर दिया।

इसके अतिरिक्त तृप्ति नारायण झा, चंद्रभूषण कुमार, अनिरुद्ध झा दिवाकर, मनोज कुमार झा शशि, संजीव कुमार सिंह, कृष्ण कुमार सिंह मैथिली माधव, संतोष कुमार राय, रामेश्वर पूर्व, राम प्रकाश सिंह, शंकर सिंह सुमन, श्रीराम सिंह, सुरेश कुमार सहनी, नकी समस्तीपुरी, आफताब समस्तीपुरी, पंकज कुमार पांडेय सहित बड़ी संख्या में कवि एवं साहित्यप्रेमियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया।

कवि संगोष्ठी का काव्यात्मक संचालन साहित्यकार संजीव कुमार सिंह ने किया जबकि समापन धन्यवाद ज्ञापन तृप्ति नारायण झा ने किया।

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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