Supreme Court On Lottery Tax: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में कहा कि लॉटरी पर कर लगाने का अधिकार केवल राज्य प्रशासनों का होगा, केंद्र प्रशासन इसका कराधान नहीं कर सकती. यह फैसला न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सुनाया, जिसमें केंद्र प्रशासन द्वारा लॉटरी डिस्ट्रीब्यूटर्स पर सर्विस टैक्स लगाने के प्रयास को असंवैधानिक ठहराया गया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान की राज्य सूची के एंट्री 62 के तहत “सट्टेबाजी और जुआ” के रूप में वर्गीकृत लॉटरी पूरी तरह से राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आती है.
केंद्र का तर्क और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
केंद्र प्रशासन ने लॉटरी के वितरण और मार्केटिंग में शामिल कंपनियों पर सर्विस टैक्स लगाने का प्रयास किया. प्रशासन ने इसे वित्त अधिनियम (Finance Act) के तहत “सेवा” (Service) कर योग्य मानने की दलील दी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि राज्यों और लॉटरी डिस्ट्रीब्यूटर्स के बीच का संबंध “प्रिंसिपल से प्रिंसिपल” का है, न कि “प्रिंसिपल से एजेंट” का. इसलिए, इस पर सेवा कर नहीं लगाया जा सकता.
पहले भी हुई थी केंद्र की कोशिशें
केंद्र प्रशासन ने 1994, 2010 और 2015 में वित्त अधिनियम में संशोधन कर लॉटरी से जुड़े कार्यों को कर के दायरे में लाने की कोशिश की. इन संशोधनों के तहत लॉटरी वितरण को “व्यावसायिक सहायक सेवाओं” (Business Auxiliary Services) के रूप में वर्गीकृत किया गया, लेकिन 2012 से 2015 के बीच सिक्किम हाईकोर्ट ने इन्हें असंवैधानिक घोषित कर दिया. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा है.
केस की पृष्ठभूमि
यह मामला केंद्र प्रशासन द्वारा Future Gaming & Hotel Services और Summit Online Trade Solutions जैसी कंपनियों के खिलाफ दायर अपीलों से जुड़ा था. इन कंपनियों को पहले हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है.
हिंदुस्तान में लॉटरी पर अलग-अलग राज्यों का रुख
कुछ राज्य जैसे केरल, सिक्किम, नागालैंड और पश्चिम बंगाल लॉटरी की अनुमति देते हैं और इससे राजस्व उत्पन्न करते हैं. वहीं, गुजरात, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में लॉटरी पर प्रतिबंध लगाया गया है, क्योंकि इसे लत और आर्थिक शोषण का कारण माना जाता है. संविधान की राज्य सूची के एंट्री 34 के तहत “सट्टेबाजी और जुआ” पूरी तरह से राज्यों के अधिकार में आता है. इसलिए किसी राज्य को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह लॉटरी की अनुमति देगा या नहीं.
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