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हजारीबाग के 23 स्कूलों में बना लैंग्वेज लैब, अब फर्राटेदार अंग्रेजी बोलेंगे बच्चे

Language Lab | हजारीबाग, आरिफ: हजारीबाग जिले के 23 प्रशासनी स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 6 से 12वीं के विद्यार्थी अब फर्राटेदार अंग्रेजी बोलेंगे. इसके लिए 4 सीबीएसई आधारित मुख्यमंत्री उत्कृष्ट एवं 19 आदर्श स्कूलों में लैंग्वेज प्रयोगशाला स्थापित हुए हैं. पूरे राज्य में कुल 405 स्कूलों में लैंग्वेज लैब स्थापित किये गये हैं. इसमें 80 मुख्यमंत्री उत्कृष्ट स्कूल शामिल है. इस प्रोजेक्ट को झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) ने तैयार किया है. प्रोजेक्ट का कार्यकाल 3 वर्षों के लिए निर्धारित है. स्कूलों में कार्यरत अंग्रेजी एवं संस्कृत विषय के शिक्षकों को लैंग्वेज लैब पर प्रशिक्षण देने का बीड़ा गुजरात की एक एनजीओ वर्ड्स वर्थ ने लिया है.

जानिए क्या है लैंग्वेज लैब प्रोजेक्ट ?

लैंग्वेज लैब प्रयोगशाला एक तरह की डिजिटल लाइब्रेरी है. इसमें विद्यार्थी बेहतर ढंग से अंग्रेजी व संस्कृत की भाषा कौशल में 4 विषय जैसे सुनना, बोलना, पढ़ने व लिखने में अपनी सुधार करेंगे. विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से संवाद करने में लैंग्वेज लैब मददगार बनेगा. विद्यार्थी सुविधा अनुसार ऑडियो और वीडियो दोनों रूप में शिक्षा प्राप्त करेंगे. इसके लिए उन्हें हेडफोन इस्तेमाल करने की भी सुविधा मिली है. वहीं, शिक्षकों को अंग्रेजी बोलने के कौशल में सुधार के लिए “वर्ड्स वर्थ” नाम का एक ऐप उपलब्ध किया गया है.

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शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरू

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरू हो गया है. एक बैच में 50 से अधिक शिक्षक शामिल हैं. इन्हें 7 दिनों का आवासीय प्रशिक्षण मिल रहा है. प्रयोगशालाओं के उपयोग और भाषा कौशल में सुधार के मामले में वर्ड्स वर्थ की ओर से शिक्षकों को परिपक्व (वेल ट्रेंड) किया जायेगा. पहले बैच का आवासीय प्रशिक्षण 1 जुलाई से शुरू किया गया है. प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक अपने-अपने स्कूल में विद्यार्थियों को भाषाई ज्ञान की मजबूत पकड़ बनाने में मददगार बनेंगे.

आदर्श विद्यालयों में लागू होगी सभी विकसित सुविधाएं

डीईओ सह क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक प्रवीण रंजन ने कहा कि आदर्श विद्यालयों में विभाग की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में निजी स्कूलों की तरह विकसित तमाम सुविधाएं लागू की जा रही है. इसका एक उद्देश्य प्रशासनी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भाषा के ज्ञान में निपुण बनाना है. इससे विद्यार्थियों का कम्युनिकेशन स्किल बेहतर बनेगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में चार भाषा (हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत के अलावा स्थानीय आवश्यकता के अनुसार एक भाषा) में विद्यार्थियों को निपुण बनाने के लिए लैंग्वेज लैब प्रयोगशाला की स्थापना की गयी है.

“ज्ञान की कमी से विद्यार्थियों का घटता है आत्मविश्वास”

विभाग का मानना है ज्ञान की कमी के कारण विद्यार्थियों में आत्मविश्वास की कमी है. ऐसे में विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगिता में पिछड़ जाते हैं. इतना ही नहीं, कई विद्यार्थी ऐसे भी होते हैं, जिनकी हिंदी भाषा पर पकड़ कम है. लैंग्वेज लैब प्रयोगशाला की स्थापना से खासकर ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र में आकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों का सभी भाषाओं के प्रति आत्मविश्वास बढ़ेगा. विद्यार्थियों को जरूरी सभी भाषाओं पर अपनी पकड़ बनाने में लैंग्वेज लैब मददगार साबित होगा. अब प्रशासनी स्कूल के विद्यार्थी भी फर्राटेदार अंग्रेजी बोलेंगे.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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