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हनुमान कथा में कथावाचक ने दिया माता-पिता सम्मान का संदेश

परबत्ता. प्रखंड के दक्षिणी छोर पर स्थित प्रसिद्ध उत्तरवाहिनी अगुवानी गंगा घाट पर आयोजित 10 दिवसीय मेला एवं श्री गंगा महायज्ञ के अवसर पर हनुमान कथा का आयोजन किया गया. इस मौके पर देवघर (झारखंड) से पहुंचे प्रसिद्ध हनुमान कथा वाचक आचार्य प्रदीप भैया जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया. उन्होंने कहा कि जब शिशु रोते हैं तो पूरे टोले-मोहल्ले में आवाज गूंज जाती है, लेकिन जब माता-पिता रोते हैं तो वह आवाज किसी को सुनाई नहीं देती, उसे सिर्फ ईश्वर ही सुनते हैं. इसलिए आप चाहे किसी देवी-देवता की पूजा करें या न करें, लेकिन यदि माता-पिता का आदर, सम्मान और उनका आशीर्वाद आपके जीवन में उतर गया तो आपका बेड़ा स्वयं पार हो जायेगा. कथावाचक ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग मंदिरों में शीश नवाते हैं, व्रत-उपवास रखते हैं, लेकिन अपने घर में बैठे माता-पिता के दुख-सुख को अनदेखा कर देते हैं. हनुमान जी की सच्ची भक्ति वही है, जिसमें सेवा, संस्कार और समर्पण हो. माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ा तीर्थ है, ऐसा संदेश उन्होंने कथा के माध्यम से दिया. महायज्ञ एवं मेला समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोगों में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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