मुख्य बातें
Humayun Kabir : कोलकाता. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नयी नेतृत्वक पार्टी का नाम बदल दिया है. कबीर ने पहले अपनी पार्टी का नाम जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) रखा था, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे अस्वीकार कर दिया. चुनाव आयोग की ओर से बताया कि इस नाम से एक पार्टी पहले से ही रजिस्टर्ड है. चुनाव आयोग की आपत्ति के बाद हुमायूं कबीर ने अब पार्टी का नाम बदल कर आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) कर दिया.
क्या है पूरा मामला?
हुमायूं कबीर ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने पिछले हफ्ते उनके पुराने नाम (जेयूपी) की सिफारिश दिल्ली भेजी थी, लेकिन दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय ने सूचित किया कि यह नाम पहले से किसी और के पास है. इसके बाद कबीर खुद अपने प्रतिनिधियों के साथ दिल्ली गए और नया और नए नाम एजेयूपी का प्रस्ताव दिया. उन्हें उम्मीद है कि उनकी पार्टी का निबंधन हो जायेगा. उन्होंने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव में वो एक बड़ी नेतृत्वक ताकत रहेंगे. जनता इस बार ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने का मन बना चुकी है.
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क्यों हुआ था टीएमसी से निलंबन?
हुमायूं कबीर के निलंबन की कहानी भी काफी रोचक है. तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें बेलडांगा में एक मस्जिद के शिलान्यास की घोषणा के बाद बाहर का रास्ता दिखाया था. कबीर ने कहा था कि वह इस मस्जिद को अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को ढहाई गई बाबरी मस्जिद के डिजाइन जैसा बनाएंगे. इस बयान के बाद विवाद बढ़ा और पार्टी ने उन पर कार्रवाई की. निलंबन के बाद 22 दिसंबर 2025 को कबीर ने अपनी नई पार्टी बनाने का एलान किया था. उन्होंने पार्टी के मुख्य पदाधिकारियों के नामों की घोषणा भी कर दी. कबीर इस साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लड़ने के लिए दूसरे दलों से गठबंधन करने की अपील भी की है.
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